कुछ इस तरह हमने ज़िंदगी को जी लिया.
_ ग़म के सागर को दवा, कड़वी समझ कर पी लिया.
_ ज़िंदगी कि राह काँटों से भरी थी.
_ गिरते-उठते और सम्भलते रास्ता तय कर ही लिया.
_ कई नई मंजिलें भी आयीं, कई नयी खुशियां मिलीं.
_ रास्ते बढ़ते गए, ज्यों-ज्यों सफ़र हमने किया.
_ कुछ इस तरह हमने जिंदगी को जी लिया.!!




