मस्त विचार 4073

ना जाने उस शख्स को कैसा यह हुनर आता है …

रात होते ही मेरी आंखों में उतर जाता है…

मैं उसके ख्याल से निकलू तो कैसे निकलू …

वो मेरी सोच के हर रास्ते पे नजर आता है.

मस्त विचार 4070

शीशा तो टूट कर भी अपनी कशिश बता देता है,

दर्द तो उस पत्थर का है जो टूटने के काबिल भी नहीं..

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