My Favourites – 2022

आपका कर्तव्य क्या है ? _खुश लोगों की वजह से यह विश्व चल रहा है _ और हम

इस विश्व का हिस्सा हैं, ” इसलिए खुश रहना हमारा कर्तव्य भी है और अधिकार भी “

तुम जिस बात को समझ लेते हो, वो बात तुम्हें कभी परेशान नहीं कर सकती, _ यदि फिर भी

वो बात तुम्हें परेशान करे, तो समझ लेना कि तुम्हें समझ नहीं आई _ सिर्फ तुमने सिर हिला दिया है..

” कौन, किसकी मदद करता है “? आपसे कम ज्ञानी इंसान, आपसे मदद लेकर वास्तव में आपकी ही मदद करता है.

_ क्योंकि वह निम्न स्तर पर रहकर भी आपको ऊपर उठाता है.

जिंदगी में कोई भी चीज इसलिए हासिल करने की कोशिश करें _ _ क्योंकि उससे

आपको ख़ुशी मिलेगी, इसलिए नहीं कि वो आपके दोस्त, रिश्तेदार या पड़ोसी के पास है.

जिंदगी की ठोकर बहुत निराली है, _ जब भी लगती है,

किसी की असलियत दिखा ही जाती है, या फिर कुछ ना कुछ, जरूर सिखा जाती है.

जरुरी नहीं कि इंसान बदला हो, क्या पता जीवन की किसी उलझन में फंसा हो _

_थोड़ा वक्त दो उसे,,!!

जिसके साथ जीवन गुज़ारना हो,

उसकी निंदा करके आप कभी भी आनंद को उपलब्ध नहीं हो सकते.

जो लोग आपको अच्छे लगते हैं,

कोशिश करें कि उनसे आपको कभी कोई काम ना पड़े..

बदल गई है रंगत जमाने की साहब,

आजकल वही अनजान बनते हैं, जो सब कुछ जानते हों..

अत्यधिक सोचना एक नकारात्मक कला है,

ये ऐसी समस्या को भी निर्माण करती है, _ जो वास्तविकता में नहीं है.

” गज़ब का चमत्कार होगा,” सिर्फ कुछ दिनों के लिए,

अपने-आप को “होश” में पूरी तरह से महसूस करने की कोशिश करो..

कभी किसी को उसके बीते हुए कल से मत परखिए,

लोग सीखते हैं, बदलते हैं और आगे बढ़ते हैं..

” वजह ” ही तय करती है, कामयाबी का सफ़र..

वरना ज़िन्दगी का क्या है, आए – बैठे और रवाना हो गए…

आपको आगे बढ़ते रहने के लिए पिछली बातों को भूलते रहना होगा,

ये सोच कर कि बीता हुआ कल वापस नहीं आएगा.

बिता हुआ कल अगर वर्तमान पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगे,

तो बीते हुए कल को ज़हर समझकर त्याग देना चाहिए.

दिखावे के लिए बड़े लोगों में बैठकर ख़ुद को जलील मत किया करो,

बस रहो अपनों में नवाबों की तरह…

लोगों की निंदा से परेशान होकर अपना रास्ता मत बदलना,

क्योंकि सफलता शर्म से नहीं साहस से मिलती है..

जो लोग बेहतर उपायों का विरोध करने लगें,

तो इसका मतलब है कि वो हमारे हितैषी नहीं हैं.

दिल तो रोज कहता हैं कि मुझे कोई सहारा चाहिए..

फिर दिमाग कहता है क्यों तुम्हे धोखा दोबारा चाहिए…

दुनिया में आधे लोगों को आप की मुसीबत सुनने में कोई रस नहीं,

और बाकी आधे लोगों का खयाल है कि आप इसी लायक हो.

कोई फायदा नहीं किसी के पीछे पीछे जाने का, हँसते हँसते खुद की Life Enjoy करो

और भूल जाओ उसे, जो तुम्हे भूल गया हो.

ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है, क्योंकि लोगों की तो आदत होती है,

सामने सलाम और पीठ पीछे बदनाम करने की..

आप स्वयं को तब तक स्वतंत्र नहीं कह सकते ;

जब तक आप दूसरों को प्रभावित करने के लिए खुद में बदलाव लाते रहेंगे.

फिक्र मत करो उनकी, वो तुम्हारी बुराई इसलिए कर रहे हैं, _ क्योंकि वो तुम्हारी बराबरी नहीं कर सकते,,,!!

” कोई दवा नहीं है उसके रोगों की, जो जलता है तरक्की देखकर लोगों की “

मुर्ख होते हैं वो लोग, जो साधारण से काम को भी जबरदस्ती जटिल बना लेते हैं,

समझदार तो वो हैं, जो बड़े बड़े काम भी सरलता से कर लेते हैं.

जिंदगी के कुछ चैप्टर ऐसे होते हैं, जिन्हें आज नहीं तो कल बंद होना ही है…

इसलिए जो चीज़ें आपके लिए हैं ही नहीं, उन्हें ज़बरदस्ती पकड़ने से कोई फायदा नहीं है.

लोग इसलिए आपको रास्ते बदलने को कहते हैं, _ क्योंकि वो नहीं चाहते कि,

जो वो नहीं हासिल कर पाए, वो लछ्य आप हासिल कर लो.

कभी कभी आप बिना कुछ किए भी दुनिया को गलत लगते हैं, बुरे बन जाते हैं,

क्योंकि आप वो नहीं करते, जैसा लोग चाहते हैं कि आप करें.

उन लोगों के बारे में सोचना बंद कर दें _ जिनके लिए आप बिलकुल भी मायने नहीं रखते,

यकीन मानिए आप हर पल खुश रहेंगे..

जो लोग आपसे नफरत करते हैं, उनसे कभी बहस ना करें ; वे परजीवी की तरह हैं _

_ जो आप में से सभी सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर सकते हैं.

जब लोग बराबरी करने की स्थिति में नहीं होते तो जल कर और बुराई करके,

अपनी व्याकुलता कम करने की कोशिश करते हैँ.

जब कोई आपसे नफरत करने लग जाए, तो समझ लेना _

_ वो आपका मुकाबला नहीं कर सकता..

नफरत ही करते हैं ना लोग, _ और हमारा कर भी क्या सकते हैं..
जो लोग दूसरों को निचा दिखाने में उलझे रहते हैं,

वो कभी ऊंचाइयों पर नहीं पहुंच पाते हैं..

अब इतनी ज्यादा समझ आ गयी है कि…

ना तो किसी के साथ बहस करने का मन करता है और ना ही ” समझाने का “

जैसे जैसे आयु बढ़ती है ; आपको ये आभास होने लगता है कि आपने

व्यर्थ ही उन लोगों को महत्व दिया, जिनका आपके जीवन में कोई योगदान था ही नहीं.

नही मन करता अब किसी से बहस करने का, _ जो है जैसा है बस ठीक है..
खुद का ख्याल रखना सीख लो, नहीं तो जब कोई धोखा देगा, तो कुछ करने लायक नहीं बचोगे.
बहुत कुछ है कहने को _ पर ना जाने क्यों _

_ अब कुछ ना कहना ही बेहतर होगा..

बढ़ती उम्र आपको यह अवश्य बताएगी की _ कुछ लोगों को खो देना

_ वास्तव में _ बहुत कुछ पा लेने जैसा था.

जीवन में हम अपना काफी समय उनके लिए नष्ट कर देते हैं,

जिन्हें हमारी चिन्ता नहीं होती.

” कुछ लोगों के लिए आप महत्वपूर्ण नहीं हैं ”

इस बात को स्वीकारिये और जीवन में आगे बढ़ते रहिए..

ज़िन्दगी को खुली किताब ना बनाओ क्योंकि..

लोगों को पढ़ने में नहीं पन्ने फाड़ने में ज्यादा मजा आता है.

सफर में कहीं तो दगा खा गए हम..

जहां से चले थे फिर वहीँ आ गए हम…

पहचान बड़े लोगों से नहीं,

#समय पर #साथ देने वालों से होनी चाहिए !!

जरूरी नही गुनाहों की सज़ा में ही दर्द मिले,

कुछ ज्यादा अच्छाइयों के सिला भी दर्द में मिल जाया करता हैं.

उजालो में मिल ही जायेगा.. कोई ना कोई,

तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे..!!

बताकर कुछ न कुछ कमियाँ निगाहों से गिराता है.

ज़माना नेक नीयत पर भी अब उंगली उठाता है….

कुछ बनना ही है तो समंदर बनो,

लोगों के पसीने छूट जायें, तुम्हारी औकात नापते- नापते..

जितना दिखाते हो, उससे अधिक आपके पास होना चाहिए,

जितना जानते हो, उससे कम आपको बोलना चाहिए.

” शख़्सियत अच्छी होगी _ तभी लोग उस में बुराइयाँ खोजेंगे,

वरना बुरे की तरफ़ _ देखता ही कौन है “

आपकी बदनामी का धुंआ, वहीँ से उठता है ;

जहाँ आपके नाम से आग लग जाती है..

जिसे गुण की पहचान नहीं है, उसकी प्रशंसा से डरो ;

और जो गुण का जानकार है, उसके मौन से डरो..

निकले हैं वह लोग मेरी शख्सियत बिगाड़ने,

किरदार जिनके खुद के मरम्मत मांग रहे है.

बिना फल वाले सूखे पेड़ पर_ कभी कोई पत्थर नहीं फैंकता.

पत्थर तो लोग उसी पेड़ पर मारते हैं _ जो फलों से लदा लदा होता है..

पेड़ों जैसी जिंदगी गुजर रही है,

फल भी खाते हैं लोग, हमसे तोड़ कर, और पत्थर भी मार देते हैं..

 

 

 

 

My Favourites – 2021

ज्ञान कि बूंदें हमारे ऊपर अभी गिरनी चाहिए – अभी मतलब जब हम जवान हैं, स्वस्थ हैं और एक लम्बा जीवन हमारे सामने पड़ा है,

और यह ज्ञान बूँदों के तौर पर नहीं, बल्कि हमारे ऊपर बारिश के रूप में गिरना चाहिए.

ज्ञान एक ऐसा निवेश है, इसका मुनाफा हमारे जीवन के अंत तक भी मिलता रहता है.
ज्ञान जानने में नहीं, वैसा बनने में है..
अच्छा लिखना ही शानदार नहीं होता साहब, पढ़ने वाले भी समझदार होने चाहिए …!!
पागल का एक ही अर्थ है कि जो विश्राम करने में असमर्थ हो गया, _ अगर आप विश्राम करने में समर्थ हैं,

_ तो आप समझना कि आप पागल नहीं हैं, – अगर विश्राम के आप मालिक हैं, तो समझना कि आप पागल नहीं हैं..

प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने आत्महित एवमं स्वार्थ के बारे में ही सोचता है, इसीलिए स्वयं बलवान बनें, कोई साथ नहीं देगा…!!!
अपने अतीत को लेकर शांत रहें _ जो हो गया सो हो गया _ अब ऐसा करें कि ” वर्तमान खराब न हो “
अगर आपके बेवजह दुश्मन हैं तो आप के पास या तो सम्पत्ति ज़्यादा है या आपका किरदार ख़ूबसूरत है.
अपनी सुविधाओं का दुरुपयोग न करें, _ क्योंकि इसका परिणाम आपको खुद भुगतना पड़ सकता है.
जिस चीज़ को आप कमा सकते हैं, उसे मांग कर _ अपनी वैल्यू _ कम करने की _ कोई जरुरत नहीं..
“लम्बी छलांगों से कहीं बेहतर है निरन्तर कदम, _ जो एक दिन आपको मंज़िल तक ले जाएगा”
आप आज जिसकी कदर नहीं कर रहे हो,_ यकीन मानो कुछ लोग उसको दुआओं में मांग रहे हैं..
अगर आप अपने मन के जाल में ही खोए रहेंगे तो _ इस जीवन की सुंदरता से चूक जाएंगे.
ज़िंदगी में कोई न कोई हार ऐसी होती है, _ जिस के बाद कुछ भी हारने को नहीं बचता..
खुद यकीन नहीं होता जिनको अपनी मंजिल का, _ उनको राह के पत्थर रास्ते नहीं देते..
उस सुख का क्या महत्व, जो थोड़ी- बहुत वेदना का अनुभव किए बिना ही मिला हो ?
तराशने वाले पत्थरों को भी तराश देते हैं, और नासमझ हीरे को भी पत्थर करार देते हैं.
नासमझी और उतावलेपन में, उठाये कदम, कलम और कसम, तकलीफ ही देते हैं.
पहाड़ रुका रहा और नदी बह चली, _ दोनों ने कभी _ एक दूसरे की शिकायत नहीं की..
दर्द को भी ताक़त बनाना पड़ता है, जब भी ज़िंदगी में कुछ हासिल करना पड़ता है.
दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद, वो ज़ख्म कैसे दिखाएं जो दिखते नहीं..
शरीफ़ व्यक्ति जब बदमाशी पर उतर जाता है ; तो फिर वो किसी से नहीं हारता..
सम्भवतः कोई नहीं देख सकेगा _ लेकिन दुःख तुम्हें _ भीतर से सुंदर कर देता है…
न अमीर खुश है न गरीब खुश है, जो रिलैक्स रहने का हुनर जानता है वही खुश है.
जो आपके सुख में सुखी नहीं हुआ, वह आपके दुख में दुखी कैसे हो सकता है ?
यदि आप कुछ भी जोखिम नहीं लेते हैं, _ आप सब कुछ जोखिम में डालते हैं..
काटने जाओ तो जिंदगी बहुत लंबी है, और जो जीने जाओ तो बहुत छोटी है..
लोगों की बातें सुनें, लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें !
मिलती नहीं मेरी तबियत किसी से, कुसूर मेरा है…शख्स कोई बुरा नहीं..
जीवन खेल है ! जिसे समझना मुश्किल है ,,,,? और समझाना नामुमकिन !
सिर्फ़ कुछ खोकर ही _ बहुत कुछ खोने के दुःख से बचा जा सकता है.
कोई चीज अजीब तब तक है जब तक हम उसे अजीब समझें… नही तो !
बुद्धिमान के पास परेशानी नही प्लान होता है जिससे वह सफल होता है.
आप जिसे बल से नहीं हरा सकते, उसे बुद्धि से अवश्य हरा सकते हो !!
बात बस नज़रिये की है ; काफी अकेला हूँ, _ या अकेला काफी हूँ..
जिसका उदय होना निश्चित है, उसके लिए प्रकृति भी रास्ता बना देती है.
*हमारे बारे में वो लोग ज्यादा जानते हैं*, *जिने हम खुद भी नही जानते*
देर लगती है मगर समझ आ जाता है, _ कौन कैसा है नज़र आ जाता है ..
समस्याओं पर मानसिक बहस करने की बजाय समाधान पर जोर दीजिए.
खोई हुई चीज़ को याद मत करो और जो मिला है ” उसे बर्बाद मत करो “
अगर आपके ख्वाब बड़े हैं तो _ आपके संघर्ष कैसे छोटे हो सकते हैं.
मनुष्य को अपने ऊपर ही विश्वास नहीं है कि वह सुखी जीवन जी लेगा.
अपने बीते हुए कल को_ _ अपने आज का ज्यादा समय न लेने दें.
वे अड़े रहे नफरत करने में, हम ध्यान दे रहे हैं आसमान छूने में !
ढूंढो तो सुकून सिर्फ खुद में है, दूसरों में सिर्फ उलझने मिलेंगी …
रास्ता एक बार भूलने की बजाए, दो बार पूछकर चलना बेहतर है..
अन्तरदृष्टि रखने वाले व्यक्ति को, अपनी कीमत मालूम होती है.
अपनी औकात हम खुद तय करते हैं, लोग तो सिर्फ़ हमें बताते हैं.
बुरे से बुरा क्या हो जायेगा _ चलो जो भी होगा _ देखा जायेगा..
साथ ठहरना भी आना चाहिए, चलने के लिए तो सब तैयार हैं.
संघर्ष जितना बड़ा होगा, _ समझदारी उतनी ही बेहतर होगी.
जिंदगी चैन से गुज़र जाए, अगर कुछ बातें ज़हन से उतर जाए..
खफा हैं सब मेरे लहजे से, पर मेरे हाल से वाकिफ़ कोई नहीं !
जीत कर हम वो नहीं सीख सकते, जो हार कर सिख जाते हैं..
मंज़िल को ख़बर ही नहीं, सफ़र ने क्या क्या छीना है हमसे…
जिसे हम स्वीकार कर लेते हैं, उसके हम ” पार ” हो जाते हैं.
लोगों के मुंह बंद करने से अच्छा है, अपने कान बंद कर लो.
सकून में इसलिए हूं क्योंकि, धोखा खाया कभी दिया नहीं ..
मज़बूत किरदार के लोग, शिकायतें नहीं फैसला करते हैं..
अच्छा जरूर बनें मगर, साबित करने की कोशिश ना करें.
जिनकी सबसे बनती है.. वो भरोसे लायक नहीं होते !!
गलत लोगों से नजदीकी….कम ही रखनी चाहिए..
मतलबी लोगों से फासले ही ठीक रहते हैं ..!!
जो हम सोच सकते हैं, वह हम कर भी सकते हैं.
दूसरों को महंगा करोगे तो खुद सस्ते हो जाओगे…
दुनिया चुप रहती कब है, कहने दो जो कहती है !
ज्यादा बात करने वाले कुछ नहीं कर पाते _ और कुछ कर दिखाने वाले ज्यादा बात नहीं करते !!
बातें मैं बहुत करता हूँ, _ मगर बहुत कम लोगों से..
लोगो से कम बात करो और सुखी रहो.
कुछ चीजें पैसो से नहीं मिलती और मुझे उन्हीं चीजों का शौक है..
” शौक पूरे होने चाहिए लेकिन खुद के पैसे से “
कर्म वो करो जो करना ही फल लगे..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Quotes by आचार्य प्रशांत

अध्यात्म सबसे ऊँची कामना की बात है: _ “चाहेंगे, मगर जो उच्चतम है सिर्फ़ उसको !”

औसत इच्छाओं में ही जीवन लगाना हो तो _ अध्यात्म में समय व्यर्थ न करें.

” अध्यात्म पलायन नहीं ” केवल अँधेरे और अज्ञान को त्यागना है, और कुछ नहीं..
आध्यात्मिकता, अनावश्यक को ख़त्म करने का अनुशासन है.
तुम दुनिया को समझने लगो और दुनिया को तुम समझ में आना बंद हो जाओ ;

_ तो जान लेना कि _ ज़िन्दगी सही दिशा में जा रही है..!

जिसकी ख़ातिर दुनिया की हज़ार ठोकरें सहीं,

आँख बंद करी तो पाया मुझे उसकी ज़रूरत नहीं.

जब आप ही वो नहीं रहेंगे, जो आप हुआ करते थे,

_ तो संसार आपके साथ _ वो कैसे कर लेगा _ जो किया करता था ?

जिस दिन अपना कद शरीर की ऊंचाई से नहीं, बल्कि मन की गहराई से नापने लगो –

– उस दिन समझ लेना – बड़े हो गए.

तुम जितने ऊँचे उठते जाओगे _ दुनिया को देखने का _ तुम्हारा नजरिया _ उतना ही साफ़ होता जाएगा.
जो स्वयं शांत हो जाता है, वो बिलकुल समझ जाता है कि, _ बाहर क्या- क्या अशांति चल रही है.
जीवन तुम्हारा ऐसा हो कि _ दूसरों के मन में तुम पर हावी होने का ख़्याल ही ना आए.
” ख़ुद जानो ख़ुद समझो ” – और फ़िर उससे एक सुंदर व्यवस्था निकलेगी _ उस पर जियो !
दुनिया को भी अगर बारीकी से देख लिया तो, अपने आप को भी समझ जाओगे.
सही चुनाव कर लो, उसके बाद _ ताक़त जहाँ से आनी होगी, आएगी..
आपकी तकलीफें आपसे दूर नहीं हो सकती _ आप अपनी तकलीफों से दूर हो सकते हैं.
दुनिया की समझ इसलिये होनी चाहिये ताकि तुम दुनिया में ही फंस कर न रह जाओ.
खुद जग जाओ, नहीं तो ज़िन्दगी पीट कर जगाती है.
वाकई दुखी होते हम, तो दुख छोड़ न देते ?
बातें आज़ादी की और मोह कटघरे से ?
आज़ादी उनके लिए है _ जिनमे ज़िद है.
न अच्छा है न बुरा है संसार, समझ गए तो रास्ता न समझे तो दीवार.
चाँद की तरह शीतल होना हो तो _ पहले सूरज की तरह जलना सीखो..
ख़ुद जितना साफ़ रहोगे _ दूसरे को भी उतना _ कम गन्दा करोगे.
जग को साफ़ जानने के लिए _ मन साफ़ करो.
साधना माने सफाई __ जीवन से कचरा बाहर करो.
साहसी मन समस्या को नहीं, स्वयं को सुलझाता है.
समाधान समस्या में ही छुपा होता है.
इतना गंभीर मत बनो, कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है.
ज्ञान बहुतों को मिलता है, काम किसी – किसी के आता है.
ज्ञान आजादी देता है.
जब सच्चाई कभी हार नहीं सकती _ तो तुम्हारी आँखों में इतनी मजबूरी क्यों है ?
तुम सच की परवाह कर लो _ सच तुम्हारी परवाह कर लेगा

अगर जीवन तुम्हारा साथ नहीं दे रहा है _ तो तुमने ज़रूर कहीं सच का साथ छोड़ा है

तुम सच के हो जाओ _ जीवन तुम्हारा हो जाएगा

सच में जीना हल्की बात नहीं होती, कीमत तो अदा करनी ही पड़ती है.

” सच सस्ता होता तो सभी सच में जी रहे होते “

सच और इंसान का वही नाता है जो पानी और मछली का।

वो तुम्हें ललचाएँगे, पर तुम बाहर मत आना।

मछली तो पानी बिन जान दे देती है।

कैसा है इंसान जो सच बिना जिए जाता है !

जिस चीज को भूलना चाहोगे, वो और याद आएगी.

जिसे भूलना हो, _ उससे बड़ी किसी चीज़ को लगातार याद रखो..

छोटी चीज अपनेआप भूल जाओगे…

कभी रंग_ कभी धूप_ कभी धूमिल_ मैदान है,

बदलते मौसमों में भी_ आसमान तो आसमान है..

दूर, _ जितनी भी दूर तुम देख सकते हो,

हमेशा याद रखना __ उसके आगे भी मंज़िलें हैं..

जितनी बार उचित दिशा में क़दम उठाओगे, आगे की राह और आसान हो जाएगी.

तुम्हारा हर क़दम निर्धारित कर रहा है कि अगला क़दम आसान पड़ेगा या मुश्किल.

हर कदम तुम्हें बदल देता है _ अगले कदम पर तुम तुम नहीं रहोगे., इसीलिए आगे के क़दमों की कल्पना या चिंता करना व्यर्थ है

_ तुम बस अभी जहाँ हो वहाँ से उठते एक कदम की सुध लो.

अगर रोशनी की तरफ चल रहे हो तो, हर कदम के साथ उजाला बढता जायेगा,

तो हर कदम से अगले कदम की हिम्मत मिलेगी, तुम कदम तो बढाओ.

तुम्हें एक क्षण नहीं लगेगा नकली को नकली जान लेने में, _ अगर तुम असली हो गए.

जिसने अपने आपको धोखा देना बंद कर दिया, _ अब संसार उसे धोखा नहीं दे पाएगा.

जो दूसरों से धोखा खाना न चाहते हों, _ वो सबसे पहले अपने आपको धोखा देना बंद करें.

सच जानना है यदि दुनिया का _ तो सीधा तरीका है, ” तुम सच्चे हो जाओ ”

जो सच्चा है वो तुम्हारे साथ चल देगा _ जो झूठा है, वो अपने आप बिदक जाएगा.

” शरीर की उम्र नहीं, चेतना का स्तर देखो “_ और इससे निर्णय करो कि

कौन है _ जिसकी बात सुननी है, _कौन है _ जिसकी बात नहीं सुननी है.

साथ चलने वाला राह दिखा भी सकता है, और राह भटका भी सकता है ;

साथी संभल के चुनना, भाई !

अपने स्वयं के जीवन का निरीछण करें, फिर आप सत्य को पहचान पाएंगे.
जीवन को ऊँचे से ऊँचा लछ्य दीजिए, मन को सार्थक काम से भर दीजिए,

मन में कचरे के लिए जगह बचेगी ही नहीं.

छोटे काम पर तो छोटी निराशा भी हावी हो जाती है,

बड़े काम पर कोई छोटी निराशा हावी नहीं हो सकती.

जो छोटी बातों में खो गया, वो छोटा ही हो गया,

बड़ा याद हो जिसको, छोटे की चिंता नहीं उसको.

जिसको चाहिए होती है उसको ऊँचाई मिल जाती है,

तुम्हें मिली नहीं क्योंकि तुम्हें चाहिए नहीं थी.

जिसके पास कुछ बड़ा नहीं होगा, ये उसकी सज़ा है_

_ वो हर छोटी चीज़ को बहुत बड़ी समस्या बना लेगा.

तुम्हारी समस्या ये नहीं है कि कुछ सुलझता नहीं, सुलझ तो सौ बार जाता है.

तुम मुझे ये बताओ, सुलझी चीजों को _ उलझाते क्यों हो सौ बार ?

क्यों उठे हो आज सुबह –

पिछला दिन दोहराने के लिए, _ या नया दिन लाने के लिए ?

यही कर्तव्य है आपका – कि जब दस लोग मूर्खता कर रहे हों, तो उनके साथ आप मूर्खता न करें.

आप उनके दबाव में उनके जैसे न बन जाऍं, तो उनके सुधरने की भी संभावना बढ़ जाती है.

जो अपनी जिंदगी में संतुष्ट नहीं है, _ वही दूसरों की जिंदगी में ताक झाँक करता है.
जीने का मजा तब आता है, जब एक बहुत उंचा मकसद तुम्हारी जिंदगी पर छा जाता है.
ज़िंदगी की सबसे बड़ी बर्बादी है, _ छोटी – छोटी बातों में फँस जाना.
शून्यता का मतलब है खुद से मुक्त होना, और जहां शून्यता है वहां परमात्मा है.
कितना कुछ बोलती हैं ये चुप्पियाँ !

पर किसी की चुप सुनने के लिए _ तुम चुप होने को तैयार भी हो ?

बोलने लायक हो कुछ तो ही बोलो, _ नहीं तो मौन बहुत सुंदर है.
त्याग की यही परिभाषा है : जो बैचैन करता हो ” छोड़ो “
तड़पते हुए मन को शान्ति मिले _ _ यही एकमात्र धर्म है.
तुम्हारा हर काम कैसा होता है ?_  जैसे तुम होते हो.
हमारे कष्ट ही प्रमाण हैं _ हमारे भ्रमित होने का.
ज़रा सीधा होकर जीना है, ज़रा सरल, ज़रा भोला रहकर जीना है, _ होशियारी थोड़ी कम !
सीधे रहो, सरल रहो __ सिर्फ़ चालाक आदमी ही चालाकी का शिकार बनता है.
तुम्हारी चालाकी ही तुम्हारा बंधन है ; जो सरल है वो स्वतंत्र है.
चालाकी का जवाब, चालाकी नहीं, _ समझदारी है.
उसने कहा तो कहा, तुमने सुना क्यों ! दूसरों से प्रभावित क्यों हो जाते हो ?
” जीवन एक रंगमंच है ” इसमें अपना किरदार समझदारी से निभायें.
जिन्हें आगे बढ़ना हो, वो वापस लौटने के रास्ते बंद करें.
जो उचित है वो करो, अंजाम की परवाह छोड़ो.
मंज़िल से अगर प्यार हो, तो अनजाने रास्ते भी अपने हो जाते हैं.
मंज़िल से प्यार हो तो_ रास्ता प्यारा हो जाता है.
सही मार्ग जाना है तो खतरा उठाना है.
एक जिंदगी है__ दबे- दबे जीने मे क्या मजा है.
न चिंता न चाहत, तुम्हारा स्वभाव है ” बादशाहत “
जिसे पाने का लालच नहीं, उसे छिनने का डर भी नहीं.
जब भीतर गहराई रहती है, तो मन में लहरें कम उठती हैं.
चोट शब्दो से नहीं, उम्मीदों से लगती है.
उम्मीद छोड़ो, काबिलियत बढाओ.
सही काम चुनिये, डूब के करिये.
आकर्षक तो बहुत चीजें लगती हैं, बात आकर्षण की नहीं _ अंजाम की है.
सही काम के लिए जो भी युक्ति करनी पड़े, जितना भी श्रम करना पड़े कम है.
इतनी मेहनत से लड़ो, इतनी मेहनत से खेलो, कि नतीजे से फ़र्क ही न पड़े.
ढलान पर तो पत्थर भी लुढ़क लेता है, _ ऊंचाई पर जाने के लिए मेहनत चाहिए.
तुम्हारी दिशा ठीक होनी चाहिये, लोग साथ दें तो ठीक, ना दें तो ठीक.
करिए, कर डालिये ! काम यदि सही है तो हिचक कैसी ?

समझ कर भी सोचते रहना ईमानदारी नहीं..

जब सीने मे सच्चाई रहती है तो छाती खुद ही चौड़ी रहती है.
किसी को मत बताओ तुम्हे करना क्या है, उसे कर के दिखाओ.
अभी को साधो, कल अपने आप ठीक हो जायेगा.
पुराने रास्तो पर चलते हुए, नयी मंजिल पर कैसे पहुंच जाओगे !
कुछ सफर ऐसे होते हैं, जिनमे सिर्फ रास्ता ही हमसफर हो सकता है.
जब दूसरे का हित, अपने सुख से अधिक कीमती लगे, _ तब सुख शुद्ध होकर आनंद कहलाता है.
दुख के न होने में आनंद नहीं है, _ दुख से न हारने में आनंद है.
आनंद है _ दुख और सुख – दोनों के तनाव से मुक्ति..
तुम्हारे साथ हो वही रहा है, जो तुमने तय किया है.
कोई भी कीमती चीज़ मुफ़्त नहीं मिलती, पात्रता दर्शानी पड़ती है.
हार हो जाये कोइ बात नहीं, हौशला नहीं टूटना चाहिए.
हार के भी जिसका कुछ न बिगड़े, _ सिर्फ़ उसी की जीत है.
खेल तो चलता रहेगा, लेकिन खेल कौन रहा, जीवन तुमसे या तुम जीवन से.
बहुत सारी बातो से डरते हो, लेकिन जीवन के बेकार चले जाने से क्यू नही डरते हो.
समय डर कर बीता दिया, तुमने अपना क्या बचा लिया.
कायर, तुम मरने के लिए तैयार हो, लेकिन जीने के लिए नहीं..
मनुष्य जीना ही तब शुरु करता है, जब वो डरा हुआ नही होता है.
हम डरे हुये है की हमारा कुछ बुरा न हो जाये, पर डर से बुरा और क्या होगा.
न डरना है _ न डूबना है _ नदिया बीच गुज़रकर _ नदिया पार उतरना है.
अगर परेशान रहते हो तो पक्का है कि, जीवन जीने के तरीके में कोइ भूल है.
दुख हमे संसार ने नही दिये है, हमारे दुख हमारे अज्ञान का अंजाम है.
दुख से बचने के लिये जिसकी तरफ भाग रहे हो, वो और भी बड़ा दुख है.
मन की चंचलता कोइ समस्या नही है, तुम स्थिर नही हो ये समस्या है.
अगर अपने मर्जी से ही चल रहे हो, तो रुक कर दिखाओ.
जब दुख परेशान करे तो दुख से कहो, सुख तो टिका नही, तु क्या टिकेगा.
मुझे मत बताओ की तुम्हे पता क्या है, मुझे दिखाओ तुम जी कैसे रहे हो.
देने वाला तो दे ही रहा है, जिन्हें न मिल रहा हो_ वो पुछे,_मेरी नियत है क्या..
जिसने आफतो मे मजा लेना सीख लिया है, वही इस जन्म का आनंद उठा पाता है.
प्रेम मे वादों की कोइ किमत नहीं, प्रेम में वे वादे भी निभ जाते हैं, जो किये ही नहीं.
प्रेम का नियम है : चाहे मिला हो, न मिला हो, बाँटना पड़ेगा.
मन की बैचेनी का चैन के प्रति खिंचाव ही प्रेम है.
प्रेम का अर्थ ये नहीं होता कि मेरे तुम्हारे विचार मिलते हैं,

प्रेम का अर्थ होता है कि मैं तुम्हारे हित के लिए उत्सुक हूँ, आतुर हूँ !

लोग कहते हैं, सच्चा प्यार मिलता नहीं ;

मैं कहता हूँ, सच्चा प्यार तुमसे बर्दाश्त होता नहीं.

आज मौका है जग जाओ, एक दिन ऐसा आएगा, जब आप चाह कर भी नही जग पायेंगे.
भटकना तुम्हारी नियति नही, तुम्हारा चुनाव है.
जब कोइ गलती करो तो उसे स्वीकारो ” गलती से तो आजाद हो जाओगे ”

नही तो वही गलती फिर दोहराओगे.

जब मन में लालच और डर होता है, तो वो चीज़ें जिनकी कोई कीमत नहीं, कोई हैसियत नहीं,

वो भी तुम पर हावी हो जाती है.

अपने लिए क्या जीना ? अपने लिए क्या लिखना ?

तुम्हारे लिए लिखता हूँ, तुम पढ़ोगे या नहीं – न जानता हूँ _ न जानना है.

किसको तुम ना कहते हो, किसको तुम हाँ कहते हो,

इसी से तुम्हारी जिंदगी तय होती है.

जिगर चाहिए, हौसला चाहिए, भीतर ज़रा आग चाहिए

किसी की हिम्मत नहीं होनी चाहिए ” तुमसे फालतू बात करने की “

तुम्हारे अलावा कौन है जो तुम्हें हरा सके ?

किसी और से कभी कहाँ हारे हो तुम !

मन जहाँ जाता हो उसे जाने दो, क्योंकि

मन से लडाई करके आजतक, ना तो कोई जीता है ना जीत सकता है.

वो दूसरा नहीं, वो तुम हो, जब दूसरों सी ज़िन्दगी बिता रहे हो, तो अंजाम भी तुम्हारा दूसरों सा ही होगा.

जिन्हें अपना अंजाम बदलना हो, वो अपनी ज़िन्दगी बदलें..

पानी को मथ कर घी निकालने की कोशिश कर रहे हो ?

प्रयास न करने से भी घातक है _ गलत जगह पर बार बार प्रयास करना.

हम कीचड़ में लोटने का लुत्फ़ उठाते हैं, और फिर अपनी भद्दी शक्ल का इल्ज़ाम

रो कर, चिल्ला कर औरों पर लगाते हैं ” अजीब हैं हम ! “

घोर संघर्ष के बीच यदि चैन नहीं, तो कहीं नहीं ; _ संघर्षों के खत्म होने की प्रतीछा मत करो,

संघर्ष कभी खत्म नहीं होते – – संघर्षों के मध्य ही चैन सीखो

ज़िन्दगी का तो मतलब ही है कठिनाई _ सही कठिनाई चुनो, सही कष्ट चुनो.
परिपक्व आदमी का पहला लछण है – – अकेले चल पाने से डर ना लगना.
किसी की मदद करने में जितना प्रेम चाहिए, उतनी ही सावधानी भी। आपका दायित्व है कि उसे शीघ्रतिशीघ्र इस क़ाबिल बना दें कि उसे आपकी मदद की ज़रूरत रहे ही नहीं।

मददगार की तरह किसी के जीवन में बने ही न रहें। देखें कि कितनी जल्दी आप स्वयं को अनावश्यक बना सकते हैं। यही असली मदद है।

जितना ज़रूरी है कमज़ोर को सुरक्षा देना, _ उतना ही ज़रूरी है उसको सुरक्षा न देना जो कमज़ोर नहीं है।

क्योंकि जो कमज़ोर नहीं है अगर तुमने उसे सुरक्षा दे दी, _ तो वो कमज़ोर हो जाएगा।

तुम जहाँ भी समय लगा रहे हो, _ चलो लगा दो. _ हम तो बस एक ही सवाल पूछेंगे,

_ वो समय जहाँ लगाया, _ वहाँ शांति मिली या नहीं मिली ?

कोई भी चीज़ इस संसार की _ इतनी कीमती नहीं _ कि उसके लिए _ अपनी आत्यंतिक शांति को _ दाँव पर लगा दें.
दुःख का असर तुम पर होता है, लेकिन तुम्हारा एक कोना ऐसा है _ जहाँ दुःख नहीं पहुँच सकता.

” उस कोने को याद रखो बस “

न रुतबे न ताकत न महलो – मकान के लिए, _ तुम्हारे भीतर है कोई तड़पता _

_ पंख और उड़ान के लिए _ मुट्ठी भर आसमान के लिए..

” ऊँचे लोगों की संगति हमेशा नहीं मिलती ” अगर उनके सामने नहीं बैठ सकते,

तो उनके शब्दों के साथ बैठ लो ” संगति ही सबकुछ है “

सारी ज़िंदगी, सारी किस्मत, तुम्हारी इसी बात से तय हो जाती है कि

तुमने किसको अपना आदर्श बना लिया और किसकी संगति स्वीकार कर ली.

” जितने अँधेरे में तुम जीओगे, उतने तुम्हारे पास सपने होंगे ” ज़रा प्रकाश तो जलाओ, हक़ीक़त देखो_

फिर बताना मुझे कि _ क्या मन अभी – भी इधर- उधर भटकता है.

व्यक्ति भी वही भला है, जिसकी संगति में तुम मौन हो सको। जान लो कि कौन तुम्हारा मित्र है, कौन नहीं ।

जिसकी संगति में तुम मौन हो सको, वो तुम्हारा दोस्त । और जिसकी संगति में तुम अशांत हो जाओ, वो तुम्हारा दुश्मन है।

—— सावधानी से चाहना, क्योंकि जिसे चाहोगे वैसे ही हो जाओगे. ——

मुझसे अगर कुछ सीखना चाहते हो, तो यही सीखो कि जीवन में बड़े विवेक से और बड़ी निष्कामना से सही लक्ष्य बनाना है, और फिर उसमें आकंठ डूब जाना है।

मेहनत अपने-आप हो जाती है, गिननी नहीं पड़ती.

ठीक वैसे ही जैसे बैडमिंटन खेलो तो स्कोर गिनते हो, कैलोरी तो नहीं न ? कैलोरी अपने-आप घट जाती है. इधर स्कोर बढ़ रहा है, उधर कैलोरी घट रही है.

पीछे-पीछे जो होना है वो चुपचाप हो रहा है, वैसा ही जीवन होना चाहिए.

तुम वो करो जो आवश्यक है, उससे तुम्हारा जो लाभ होना है वो पीछे-पीछे चुपचाप हो जाएगा; तुम्हें वो लाभ गिनना नहीं पड़ेगा.

” ऐसे जियो कि जैसे खेल हो, जान लो की खेल है, फिर जान लगाकर खेलो ? “

सही निर्णय ही सही जीवन का आधार होते हैं.

निरन्तर सत्य को चुनने का कोई विकल्प नहीं होता.

अगर जीवन को सरल, सहज, शांत बनाना है, _ तो हर कदम, जो सही है उसे चुनना होगा.

मन डरेगा . . . आलस रोकेगा, _ लेकिन हिम्मत कर, सही निर्णय लेना होगा..

जो पाने पर जितना खुश होता है वो छिनने पर उतना दुखी होगा.

मिलना हो कि बिछड़ना, पाना हो कि गँवाना, एक से रहो.

मानो खेल हो, _ जीते तो बस हल्के से मुस्कुरा दिए और हारे तो भी बस मुस्कुरा दिए, बात खत्म !

जो उत्तेजित बहुत होते हैं वही फिर अवसाद में जाते हैं.

हम उतने ज़रूरी नहीं हैं जितना हमने अपने – आपको बना रखा है,

आपसे पहले भी दुनिया थी, आपके बाद भी दुनिया रहेगी _ ” किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ना है “

सही काम के लिए मौका मिलता नहीं, जीवन से छीनना पड़ता है.

छीनने का बल दिखाएं _ ” यही शक्ति है “

मन में, या जीवन में, जो कुछ भी चल रहा है, उसे समझने पर ज़ोर दो ;

पसंद – नापसंद बाद में देखी जाएगी.

कुछ नया लाना है, कुछ बेहतर बनाना है,

कल अच्छा था या बुरा था, उस पर नहीं रुक जाना है,

यात्रा को ही जन्म लेते हैं, यात्री को चलते जाना है

मेहनत से कल बनाया था, मेहनत से आज बनाना है,

मंज़िल आई बीत गयी, अब आगे कदम बढ़ाना है.

आचार्य जी, मन का माहौल बढ़िया कैसे रखें ?

➖✨➖✨➖✨➖

मन का माहौल बढ़िया रखने का एक ही तरीका है

मन को किसी ऊँचे-से-ऊँचे कार्य में लगा दीजिए।

मन का मौसम उतना ही सुहाना रहेगा,

जितना सुहाना मन का लक्ष्य।

मन का लक्ष्य ही अगर सुंदर नहीं है,

तो मन की हालत सुंदर नहीं हो सकती।

मन का लक्ष्य अगर होगा—नोट और सिक्के।

तो मन भी वैसा ही होगा सिक्के जैसा, नोट जैसा।

फाड़ो तो फट जाए और गिराओ तो टन-टन-टन-टन करे !

मन का लक्ष्य होगा अगर बड़ी-बड़ी इमारतें

और घर और फैक्ट्रियाँ,

तो मन भी फिर ईंट-पत्थर जैसा होगा।

खुरदुरा, शुष्क, रुखा और टूटने को तैयार

कि ईंट पटक दी और टूट गई।

मन भी ऐसा ही होगा खट से टूट गया।

मन का जैसा लक्ष्य मन की वैसी हालत।

मन कमज़ोर लगता हो अगर, तो जान लीजिए

मन ने लक्ष्य ही कमज़ोर बना रखे हैं।

जीवन में, जो भी आप की परिस्थितियों में,

उच्चतम लक्ष्य संभव हो उसको रखिए

और आगे, और आगे बढ़ते जाइए,

जीवन इसीलिए है।

छोटी-छोटी चीज़ों में उलझे रहेंगे,

तो ‘मन’ भी छोटा हो जाएगा। ➖➖➖➖

मन चंगा रखिए, जीवन अपनेआप चंगा रहेगा !

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

My Favourites – 2020

जिस तरह आप किसी मामूली चीज़ को हासिल करने के लिए कोई कीमती चीज़ जाया नहीं करते,

उसी तरह दुनिया के पीछे अपनी अहमियत को ज़ाया न करो…

” यदि आप निराश है तो आप अतीत में रह रहे हैं,

अगर आप चिंतित है तो आप भविष्य में रह रहे हैं, _ यदि आप शांतचित है तो ही आप वर्तमान में रह रहे हैं !”

हर वह चीज जो आप से किसी भी रूप में जुडती है वह आपको कुछ न कुछ सिख अवश्य देती है,

यह आपके ऊपर है कि आप किस चीज से क्या सीखते एवं समझते हैं.

ज़िन्दगी के 3 आसान नियम- 1. जो आप चाहते हो उसके पीछे नहीं भागोगे तो मंज़िल नहीं मिलेगी.

2. अगर आप कभी पूछोगे नहीं तो जवाब हमेशा “ना” ही रहेगा.

3. अगर आगे नहीं बढ़ोगे तो जहाँ थे, वहीँ रह जाओगे !!

हमारे जीवन में, एक समय ऐसा भी आता है _ जब हमे ये तय करना बहुत जरूरी हो जाता है कि…

अब पन्ने पलटना है या किताब बन्द करना है.

मुझमें और किस्मत में हर बार बस यही जंग रही,

मैं उसके फैसलों से तंग वो मेरे हौसले से दंग रही.

थोड़ी फ़िकर … थोड़ी कदर _ कभी – कभी खेऱो – ख़बर,

इन दवाओं में होता है, बड़ा असर..

सोच कर करने वाला शोभता है, _ करने के पहले सोचने वाला बुद्धिमान है,

करने के समय सोचने वाला सतर्क है, _ करने के बाद सोचने वाला मूर्ख है.

*गप से बचना* – लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए,

जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे

और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा.

कहते हैं कुछ पाने के लिए, बहुत कुछ खोना पड़ता है…

…मैंने तो बहुत कुछ पाया है ; इसलिए शायद मैंने बहुत कुछ नहीं ” सब कुछ खोया है “

माना की औरों के मुकाबले कुछ ज्यादा पाया नहीं मैंने,

पर ख़ुद गिरता – संभलता रहा, किसी को गिराया नहीं मैंने..

मायने ये नहीं कि आपके पीछे कितनी भीड़ है,

मायने तो ये है कि आप भीड़ से कितने अलग हैं…!!

जिस किसी वृछ को आकाश छुना हो,

उसकी जड़ों को पाताल छुना होता है..

जो जहाँ है, जैसा है, अगर वहीँ सुखी नहीं है तो, तो फिर वो कहीं भी, सुखी नहीं हो सकता.

और जो जहाँ है, जैसा है, वहीँ सुखी है तो, वो कहीं भी सुखी हो सकता है.

क्या कहूं क्या- क्या मुझे कुछ सहना पड़ा है,

रहना नहीं था साथ जिसके रहना पड़ा है..

शब्द गिरा देते हैं एहसासों की क़ीमत,

एहसासों को शब्दों में न ढाला करे कोई.

बुरे इंसान को अच्छी बातें बताने से _ आप उसकी नजर में बुरे बन जायेंगे,

इससे अच्छा है कि _ उससे बेकार बातें ही करें.

न शिकायत किसी से…..ना किसी से अनबन है,

बस अब जिंदगी में थोड़ा…… अकेले चलने का मन है !!

कभी कभी हमें पता नहीं होता कि दांव पर क्या लगा है,

हारने के बाद एहसास होता है कि बहुत कुछ हार गए.

कोशिश आखिरी सांस तक करनी चाहिए, क्योंकि

मंजिल मिले या तजुर्बा दोनों ही नायाब हैं.

कुछ उलझनों के हल, वक़्त पे छोड़ देने चाहिए…!!

बेशक जवाब देर से मिलेंगे, लेकिन बेहतरीन होंगे…!!

धूप बहुत काम आई कामयाबी के सफर में,

छाँव में अगर होते… तो सो गए होते.

अकेले ही तय करने होते हैं कुछ सफ़र,

ज़िन्दगी के हर सफ़र में हमसफ़र नहीं होते.

जितना ही लोगों के बारे में जानोगे,

उतना ही ” एकांत ” तुम्हे प्रिय लगने लगेगा.

जब आप किसी को तकलीफ़ से निकालने का प्रयास करते हैं

तो कुदरत आपकी तकलीफ़ें दूर कर देती है.

बदला मत लिया करो…

सब रब पर छोड़ दिया करो….. ज़नाब;

ये दुनिया जादू का अजब खिलौना है,

मिल जाए तो मिटटी है, खो जाए तो सोना है…

सादगी से महंगा कोई गहना नहीं शायद,

इसलिए हर किसी ने इसे पहना नहीं..

मुकद्दर को भी बड़े हल्के में लिया है लोगों ने यहां,

थकते पैर हैं लकीरें हाथों की दिखाई जाती है.

क्यों चाहते हो बनना मुक़द्दर का सिकंदर,

क्या तुमने सिकंदर का मुक़द्दर नहीं देखा..

निकले थे घर से मंज़िलो का शौक लेकर ।

ए जिन्दगी तूने तो हमे मुसाफ़िर बना दिया ।।

तहज़ीब, अदब और सलीका भी तो कुछ है..!

झुकता हुआ हर शख्स _ बेचारा नहीं होता..!!

 

 

My Favourites – 2019

हमारा ज्ञान इतना तो अवश्य ही होना चाहिए कि उस ज्ञान से हम एक स्वस्थ जीवन को जी सकें.
कम उम्र में मिला हुआ सुख इंसान को कभी समझदार नहीं बनने देता.!!

और कम उम्र में मिला हुआ दुःख इंसान को समझदारी का उस्ताद बना देता है..!!

ज़िंदगी गुज़ारने का यह ढंग ज़्यादातर लोग अपनाया करते हैं,

पहले ज़िंदगी को खुद ही उलझाते हैं, फिर खुद की ही पीठ थपथपाते हैं, _ सुलझाते हुए..

खुद को सँभालने की जिमेदारी भी अब तुम्हारी है मित्र, हौंसला रख,

दुनियां बस मजे लेती है सहयोग नहीं करती.

सच बोलने वाले कम ही रहे हैं _ समस्या ये है कि _

_ सिर्फ मर्ज़ी का सच सुनने वालों की तादाद बढ़ गयी है..

जो लोग भविष्य में आने वाले संकटों की तैयारी पहले से नहीं करते ;

समझ लो _ वो लोग अपने लिए और संकट खड़े कर रहे हैं..

चिंता करके अपनी ऊर्जा को खत्म करने से अच्छा है,_

_ समस्या का समाधान करके _ ” चिंता को समाप्त करना “

रोना मत कभी दोस्त, तुम इस दुनिया के सामने…_ ये हँसाते नहीं हैं, पर हँसते बहुत हैं..।
जो सच में बुद्धिमान है, वह दूसरों को विवाद करके हराने में उत्सुक नहीं होता,

जो बुद्धिहीन है, वह किसी को भी हराने में उत्सुक होता है.

अपने आप को नकारात्मक लोगों के साथ घेरना बंद करें, हम लोगों को नहीं बदल सकते हैं _

_ लेकिन हम उन लोगों को बदल सकते हैं _ जिनसे हम खुद को घेरते हैं.

नकारात्मक लोगों से बचें, ये लोग आपके दिमाग की असली पॉवर को आपको महसूस ही नहीं होने देंगे !
ऐसे लोगो से सदैव दूर रहें _ जो आपके साथ भी रहता हो और आपके दुश्मनों के साथ भी….!!!
कोशिश करें कि आप एक हफ्ते, एक महीने, एक साल _ किसी के बारे में नेगेटिव ना बोलें ;

और देखें _ आपका जीवन दूसरों से सौ गुना जल्दी बदलता है ” आप ज्यादा स्मार्ट और ज्यादा बुद्धिमान हो जायेंगे “

बुद्धिमान व्यक्ति का मन चालाकी से नहीं जीता जा सकता,

सिर्फ सच्चाई और ईमानदारी से जीता जा सकता है.

अपनी खुशियाँ संभाल के रखिये, ये उस कांच के सामान होती हैं _ जो लोगों को _ चुभती बहुत हैं.
आपके कथित चाहने वाले ही _ आपकी सफलता से _ सबसे ज्यादा जलते हैं..
असल में साथ था ही नही कोई _ बेकार में गुमान होता था अपनो पर..!!
लोगों के लिए आप तब तक अच्छे हो _ जब तक आप उनकी उम्मीदों को पूरा करते हो,

और आपके लिए उस समय तक सभी लोग अच्छे हैं _ जब तक आप उनसे कोई उम्मीद न रखो..

मदद करने की सबसे बड़ी बुराई ये है कि फिर ये हमेशा करनी होती है,

जब भी बंद करो _ उसी दिन _ पिछली सारी अच्छाइयां _ बुराई में बदल जाती है..

कभी – कभी अपने ही अपनों का ऐसा तमाशा बनाते हैं, _ कि वो अपना कहलाने के लायक ही नहीं रहते ,,,!
जो रिश्ता आपसे आपका स्वाभिमान छीन ले, वो रिश्ता _ रिश्ता नहीं, घुटन है..
“जो दूसरों पर आश्रित होते हैं _ वो हमेशा ही पराजित होते हैं “
तुममें और मुझमें बस इतना सा ही फर्क है, तुमने वो कमाया जिसे दिखाया जा सकता है,

मैंने वो कमाया जिसे दिखाया नहीं जा सकता, मेहनत दोनों में ही है.

जब हम किसी समस्या पर बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं तो उसे और उलझा देते हैं.

सोचना जरुरी है, लेकिन बहुत ज्यादा सोचने से बचना चाहिए.

हमारा जीवन उस दिन से समाप्त होना शुरू हो जाता है,

जिस दिन हम उन मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं _ जो मायने रखते हैं.

हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या अपने और अपने परिवार के जीवनयापन की ही होती है ;

बाकी सब तो खड़ा किया गया समस्याओं का पहाड़ है _

अपने मन को दुविधा जनक स्थिति में नहीं पहुँचने देना ही, जीवन की कामयाबी की दास्ताँ है.

दुनिया मेँ रहते हुए दुनिया से अलग रहने की कला सीखेँ,

कमल के फूल और हर भूल से सीखेँ.

जीवन में हर तूफान नुकसान करने ही नहीं आता,

कुछ तूफान _ रास्ता साफ करने भी आते हैं..

” सलाह, साथ और समय ” यह बिना मांगे देने पर अक्सर लोग इनका मूल्य _ सस्ता ही लगा लेते हैं.
अगर कोई आपको अपनी तकलीफ बताये तो उससे अच्छे से पेश आओ,

क्यूंकि आप सिर्फ सुन रहे हो और वो महसूस कर रहा है..

“कोई साथ दे ना दे, तू चलना सीख ले;

हर आग से हो जा वाकिफ तू जलना सीख ले;

कोई रोक नहीं पायेगा बढ़ने से तुझे मंज़िल की तरफ;

हर मुश्किल का सामना करना तू सीख ले “

परेशाँ होने वाले तो राहत पा भी लेते हैं,

परेशाँ करने वालों की मगर परेशानी नही जाती..!!

किसी को छमा कर देने पर भी _ उसके व्यवहार में बदलाव न आना _

_ आपको मिलने वाले एक और धोखे का प्रमुख संदेश है..

इन्सान सख़्त मिज़ाज कब बनता है ?

जब बहुत सारे लोग उसकी नरमी का ग़लत फ़ायदा उठा चुके होते हैं.

लोगों ने….. आपके साथ छल किया, और उन्हीं कष्टों ने आपको बदल दिया..
‘दुनिया में जितनी अच्छी बातें व संदेश हैं, वे दिये जा चुके हैं, अब नया कुछ कहने व देने को बाकी नहीं रहा है. अब जरुरत है, तो केवल उस पर अमल करने की.’

“All the good thoughts and advice has already been given out in the world and there is nothing really new to say. Now the only thing we need to do is to “FOLLOW” it. ”

Nature के साथ हो लिया हूँ मैं, पहाड़ों में, मैदानों में, हवाओं, सूरज- चाँद- तारों के साथ.

सोचता हूँ ये सब मेरा है. मेरे लिए ही बना है, ये मुझे नुकसान नहीं पहुँचा सकते यानि Nature.

सांस के प्रति सजग रहता हूँ, ताजी सांस लेता हूँ और Nature की Silence सुनता हूँ.

सब कुछ छोड़ कर कहीं जाना चाहता हूँ. जहाँ केवल हवा, पानी, पेड़-पौधे, सूरज और कुछ खाद्य सामग्री हो और प्रकृति अपनी जलवे बिखेरती हो.

ख़ुद को निखारना चाहता हूँ.. गुमनामी में जीना चाहता हूँ… कुछ अनोखा सीखना चाहता हूँ…

फ़िर से उड़ जाना चाहता हूँ,,,ये सब चाहतों के साथ जीना चाहता हूँ..

अक्सर लोग मिलते हैं, जिन्होंने मेरी पिछली ज़िंदगी देखी

तो बोलते हैं,_ यार _ तुम बहुत सुकून में हो _ लाइफ़ हो तो तुम्हारे जैसी

वो सच बोलते हैं _ वाक़ई मेरी लाइफ़ मस्त है _ लेकिन यदि मैं

उन लोगों को बोलूँ कि मेरी राह पर चलो _ तो चलते नही..

Happiness को बाहर ढूढेंगे तो ना जाने कितना समय लग जायेगा खुशियाँ हासिल करने में,

इसे अपने अन्दर तलाशिये, जब खुशियाँ अन्दर से बाहर आएँगी तो स्थायी होंगी.

मैं अपनी मानसिक शांति को पुनः प्राप्त करना चाहता हूँ… मैं फिर से अपनी पुरानी जिंदगी में वापस जाना चाहता हूँ जहाँ खुशियाँ थी, धैर्य था, मस्ती थी, नादानी थी…जिंदगी की कोई खोज ख़बर नहीं थी बस अपने और दोस्तों में मौज थी…अब कहाँ मैं खुद की खोज और जिंदगी की तलाश में भटक गया…!!
दूसरो की फिक्र लेने से कुछ नही होगा, दूसरो की चिंता लेने की आवश्यकता नही है, कि वे क्या कहते है, फिक्र ही लेनी है, तो बस स्वयं की, किसी और की नहीं। दूसरे तो हर काम मे बाधा बनेंगे, उन्हें क्या पता है कि मुझे क्या अच्छा लगता है, क्या मुझे सुन्दर लगता है, उन्हें क्या पता है कि मेरा आनन्द क्या है। जो मेरे लिए सुन्दर है, जो मेरी प्रसन्नता है, जो मेरी ख़ुशी है, जो मेरा आनन्द है, वही मेरे लिए सत्य है, इसके अतिरिक्त कोई सत्य नही। दूसरो के अपने अनुभव है, वे मेरे अनुभव नही हो सकते। मेरा अनुभव, मेरा अनुभव है, शुद्ध प्रमाणिक, वही मेरे लिए सत्य है। दूसरों की राय की फिक्र करी कि भटके।

जिसको भीतर का स्वाद आने लगा, और भीतर की गंध आने लगी, फिर बाहर के मूल्यो का कोई अर्थ नही रह जाता।
व्यक्ति अपने आनन्द मे जीता है, व्यक्ति जीवन के महोत्सव मे जीता है। फिर बाहर के लोग क्या कहते हैं ? कौन फिक्र करता है।अच्छा कहे तो अच्छा, बुरा कहे तो अच्छा। सम्मान दे तो ठीक, अपमान दे तो ठीक।

आनन्द, न धन में है, न बडे मकान में है, न बड़ी बड़ी कारों में है, न उच्चे पदों में है, जब तक आदमी नशे में है, बेहोश है, तब तक किसी भी चीज़ से आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता । ध्यानी व्यक्ति ही, यानी होशपूर्ण जागृत व्यक्ति ही आनन्दित हो सकता है, ध्यानी व्यक्ति को ही धन में, बड़े मकान में या कारों में, पदों में आनन्द आता है, जो ध्यानी नहीं, उसे कभी आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता, उसे पूरे विश्व की सत्ता भी मिल जाए तो भी उसे आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता है । आनन्द तो अन्तस की स्थिति पर निर्भर करता है, अन्तस शान्त है तो आनन्द ।- ओशो

शुभचिंतकों को मेरे नाकाम होने, फ़कीर हो जाने का डर है. आगे का मालूम नहीं फिलहाल कुछ ना होने और चिंता मुक्त जीवन का आनंद ले रहा हूं.

अंजाम जो भी हो उसका ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ मैं होऊँगा, ये एहसास ही मुझे आज़ादी की अनुभूति करवाता है…

मुझे अकेला रहना अच्छा लगता है_

इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि_ मैं दुनिया की ख़बर नहीं रखता…!!

इंसान को अकेले रहने में उतनी मुश्किल नहीं होती, जितनी मुश्किल उस व्यक्ति के साथ रहने में होती है,

जिससे उसकी बनती नहीं है..

एक उम्र पर आकर हम समझने लगते हैं,, __ कि लोग अकेले रहना _ क्यों पसंद करते हैं !!
अकेले चलने वाले घमंडी नहीं होते, वो वास्तव में हर काम में अकेले काफी होते हैं..
मैं अकेला हूँ और मैं सबकुछ नहीं कर सकता,

इसका मतलब ये थोड़ी की मैं कुछ भी नहीं कर सकता.

जब से सुना वो हर जगह साथ है,

न जाने क्यूँ मुझे अकेलेपन से मोहब्बत हो गई..

अकेले रहने वाले लोग अपने आप में ही सम्पूर्ण महसूस करते हैं,

ये लोग खुद को ही अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं.

#एकांत अकेलापन नहीं है,

यह एक ऐसा एहसास है जिसकी कीमत हर किसी को नहीं पता है..

मनुष्य अपने एकांत में सबसे अधिक सुंदर है और सबसे अधिक सुखी भी..

.. किंतु साधारण मनुष्य यह देख नहीं पाता…. और यदि देखता है तो सह नहीं पाता…..

इंसान जब खुद का हो जाता है, उसे तन्हाई में सबसे ज्यादा मज़ा आता है .!
जो लोग तन्हाई पसंद करते हैं, _ उन्हें समझना आसान नहीं होता.
थोड़ा वक़्त लगेगा, पर यकीन मानो, अकेले बहुत सुकून मिलेगा.
अकेले रहने का आनंद लेना सीखें, क्योंकि कोई भी आपके साथ हमेशा के लिए नहीं रहेगा !
मरहम के लालच में अपनी दुखती रग का पता लोगों को देना…….बेवकूफ़ी की आखिरी हद है..
अगर सभी लोग एक ही इंसान के खिलाफ हैं तो समझ जाना चाहिए, वो इंसान बहुत काम का है.
तैरने के लिए नदी का गहरा होना भी जरुरी है,

जिससे बात करो उसका, कुछ तल होना भी जरुरी है,

हम समय बर्बाद नहीं करते, हर एक से बात नहीं करते,

कुछ तो दम हो कहने वाले में, सब से संवाद नहीं करते..

एक बार वर्तमान में जीने की कला तो सीखो; भूत, भविष्य, जीवन से चिंता, दुःख, तनाव सब गायब हो जाएंगे,

आप ऐसे आनंद में डूब जाएंगे जो अनमोल है, यही जीवन का परम सुख है..

मैंने जीवन में कुछ गलतियाँ की है जिनमे से है –

1. नकारात्मक व्यक्तियों पर अत्यधिक वक्त न्योछावर करना.

2. गलत लोगों के बीच रहक़र उन्हें खुश रखना.

3. प्रमुख कार्यो को छोड़ अनावश्यक कार्यो में संलग्न रहना.

” अब बस उसे ही याद करता हूँ, जो मुझे याद करता है.”

मोह, दर्द, तकलीफ, उम्मीद, बेबसी, सम्मान, अपमान, प्यार, मोहब्बत, डर, मृत्यु, जीवन एवमं रिश्तों से ऊपर उठ चुका हूँ.

मुझे रत्ती भर परवाह नही की दुनिया मुझसे क्या उम्मीद करती है और मैं उसके उम्मीदों पर कितना खरा उतरता हूँ.

_ अनगिनत चाहने वालों से, ” एक निभाने वाला बेहतर होता है ”

जब से मैंने अपने जीवन में ‘नो फर्स्ट कॉल’ की नीति अपनाई है, तब से मैं बहुत खुश रहने लगा हूँ.

पहले मैं किसी सगे संबंधियों से मिलने के लिए भी वक्त की भिक्षा माँगता था.

परन्तु अब न उनका कॉल आता है न मैं करता हूँ.

अब समझ आता है कि उन्हें कोई जरूरत नहीं थी मेरी, मैं ही उनके पीछे था.

न पूछा मैंने _ न उन्होंने ख़बर ली..

कुछ यूं _ अपनी जिम्मेदारियों में _ उलझे रहे हम…

मुश्किल और दुःख में फ़र्क करना सीखिए…

कुछ लोग रोने के इतने आदी होते हैं कि सिर्फ़ मुश्किलों को दुःख बताकर आँसू बहाने बैठ जाते हैं,

उन्हें ये समझाया जाना चाहिए कि रास्ते में पड़े भारी भरकम पत्थर को धक्का देकर हटाना मुश्किल मात्र है,

वो दुःख तब है जब धक्का देने के लिए तुम्हारे पास हाथ ही ना हो.

कई बार परिस्थितिओं को ये सोचकर accept कर लेना अच्छा होता है कि जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है,

अगर हम इस एक बात को दिल से accept कर लें तो, ज़िन्दगी के बहुत सारे तूफ़ान थम जायेंगे और धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर आने लगेगा.

हम जिंदगी में कड़े फैसले लेने में डरते हैं. हम ऐसा इसलिए नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि हम दूसरों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते हैं.

इस तरह के डर की वजह से निजी और प्रोफेशनल दोनों लाइफ प्रभावित हो सकती है. कड़े फैसले नहीं लेकर हम समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, उन्हें बढ़ाते हैं.

हमारी इस प्रवृत्ति से छोटी समस्या भी बड़ी हो सकती है. इसलिए जहां जरुरत हो, वहां हमें कड़े फैसले लेने से हिचकना नहीं चाहिए.

कोई चाहे आप पर जितना भी दबाव क्यों न बनाएं, पर निर्णय हमेशा खुद का लो ;

क्योंकि कल कुछ गलत होता है तो जान लो, वही लोग ये जिम्मेवारी नहीं लेंगे आप की ;

आप की अहित का कारण वो लोग हैं, वो अपना पल्ला झाड़ेंगे और बोलेंगे

उस वक़्त तुम ने क्यों नहीं विरोध किया.

यदि कोई आपसे भावनात्मक चोचले करके अपनी बेतुकी या गलत बात मनवाने की कोशिश करे तो उसकी बात कभी न मानें ;

क्योंकि ऐसे लोग आपको अपना गुलाम बनाना चाहते हैं _ और इनकी बातों में आकर इमोशनली ब्लैकमेल हो कर आपके द्वारा लिया गया निर्णय _

आगे चल कर _  आपको बरबाद कर सकता है.

लोगो की जिंदगी में जबरदस्ती घुस जाने से क्या होगा.? और मिलेगा क्या.?

सिवाय तिरस्कार, आत्मग्लानि एवंम नजरअंदाजी के…

कभी कभी हम किसी के बारे में अत्यधिक सोच लेते हैं और बाद में मिलता है

हमे अनोखा दर्द एवंम बेपनाह बुरा तजुर्बा….

” आप सही रहे ” उसके बाद भी लोग आपको न समझ पाएं, तो उनके लिए रोने की कोई जरुरत नहीं,

ऐसे लोगों से कहो – पतली गली पकड़ और निकल ; कोई जरुरत नहीं अब तेरी.

” अपने आप को दुःख देना बंद करो “

अगर आप खुद को दुखी करना चाहते हैं, तो आपको अंतहीन मौके मिलेंगे,

क्योंकि हमेशा कोई न कोई कुछ ऐसा करेगा, जो आपको पसंद नहीं आएगा..

किसको किसको समझाते फिरोगे, सोचने दो जिसे जो सोचना है ;

लोग उतना ही सोचेंगे, जितना उनका मानसिक विस्तार है !!

किसी पर ज्यादा नाराज होने से बेहतर है,

की अपने जीवन में उसकी अहमियत को कम कर दो..

कोई मेरा दिल दुखाता है तो मैं चुप रहना ही पसंद करता हूँ,

क्योंकि मेरे जवाब से बेहतर वक़्त का जवाब होता है..

जिंदगी भी उसका भरपूर साथ देती है जो अपने विचारों को दूषित नहीं होने देता

और संघर्ष के दम पर दुनिया जीत लेता है.

जितने राजदार कम बनाओगे, उतने ही धोखे कम खाओगे,

क्योंकि हमारी कमजोरियां ही दुश्मनों को ताकतवर बनाती हैं..

जब कोई करीबी इंसान अपनी औकात दिखा जाता है न, तो मुझे दुख नही होता

बल्कि खुशी होती है कि, चलो अच्छा हुआ ” छुटकारा मिला “

कुछ रिश्तों का टूटना ही बेहतर था, छूटने वाले का छूटना ही बेहतर था.

एक ही बात उसको कब तक समझाते, रुठने वाले का रूठना ही बेहतर था.

फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की,

जैसे ये जिन्दगी, जिन्दगी नहीं, कोई इल्जाम है..

एक हद के बाद इंसान, सब कुछ छोड़ देता है ;

शिकायत करना, मिन्नते करना, मनाना और फिर दिल ऐसा हो जाता है,

कि कोई बात करें तो ठीक, कि ना करें तो भी ठीक ;

क्योंकि पता लग चुका होता है, कि दुनिया बहुत झूठी और मतलबी है.

हम जितना दुःख के बारे में सोचते हैं, लिखते हैं..उतनी ही मानसिक बेचैनी और अस्थिरता महसूस करते हैं। अब इसीलिए मैं अब खुशियाँ चुनता हूँ। हर छोटी-छोटी चीजों में सकारात्मक कोण ढूँढता हूँ..मुझे अब दुःख से लगाव नहीं रहा क्योंकि दुःख समय द्वारा रचित क्षणिक परीक्षा है जो हमे देनी होती है !
सहारे इंसान को खोखला कर देते हैं और उम्मीदें कमज़ोर कर देती हैं,

अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए,

आपका खुद से अच्छा साथी और हमदर्द कोई ओर नहीं हो सकता..!!

मन को खुश करने के लिए जीने वाले लोग, जानवर से भी गए गुजरे होते हैं. _ ये लोग

अपने मन के गुलाम बने रहते हैं और मन, इनकी ज़िन्दगी बरबाद करता चला जाता है..

मन को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ ये देखो कि आप कुछ गलत तो नहीं कर रहे,

गलत है तो मत करो और सही है तो मन भर के करो.

जितना आदर्शवादी और संस्कारी होकर अपने रिश्ते में हम प्यार करते हैं और सबको खुश रखना चाहते हैं उतना ही दुख मिलता है और कोई भी दिल की फीलिंग्स को नहीं समझता है. फिर एक तरफा त्याग क्यों करते रहना ??

“जिंदगी अपनी भी होती है और अपनी खुशी को भी जीना चाहिए जैसे भी”, बाकी कोई अपना नहीं होता है चाहे जितना करो.

आपका जीवन आपका अपना है, दूसरे लोग आपसे जो होने की उम्मीद करते हैं, वह बनने की कोशिश में इसे बर्बाद न करें;

हर किसी को खुश करने के लिए अपनी खुशियों का त्याग न करें, जो आप बनना चाहते हो वो बनो..

अगर किसी से आपको तकलीफ है या कोई कष्ट है, कोई आपको प्रेम नहीं कर रहा है तो इतनी भर बात को इतना बड़ा मत बनाओ कि आप अपने ही शरीर और मन को ख़राब करने लग जाओ.

जब हमारा मन दुःखी होगा, तब हमारे शरीर में विषैले तत्व पैदा होते हैं और ये विषैले तत्व हमारे शरीर को मारते हैं.

ज़िन्दगी में हर समस्या का निदान आगे बढ़ने में है.

यदि आप बैठ कर सोचेंगे कि आखिर यह मेरे साथ ही क्यों हुआ,

तो आप और अपने जीवन को स्वयं बर्बाद कर रहे हैं.

हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है,

सफल होने का सबसे निश्चित तरीका है _ एक बार और प्रयास करना..

जब तक आपका सामना आपकी सबसे बड़ी कमजोरी से नहीं हो जाता,

तब तक आपको अपनी सबसे बड़ी ताकत के बारे में पता नहीं चलता..

जिंदगी में कभी कभी ऐसा भी मोड़ आ जाता है, कि हम खुद के बिछाए हुए जाल में खुद ही फंस जाते हैं !

और लाख कोशिशों के बाद भी नहीं निकल पाते !!

किसी सही इंसान के साथ इतना भी ग़लत मत करना कि उसके साथ किए धोखे का पछतावा सारी ज़िन्दगी करना पड़े.
उम्र को दराज में रख दें, उम्रदराज न बनें..

एक दिन शिकायत तुम्हे वक़्त और जमाने से नहीं ….खुद से होगी,

कि ज़िंदगी सामने थी और तुम दुनिया में उलझे रहे…!!!

जीवन भर लोगों ने मुझे सदैव विकल्प बना कर ही अपने जीवन मे शामिल किया है.. जब मन किया मुझे याद किया..मन किया मुझे दरकिनार कर दिया…अब बस हुआ..कब तक दूसरों के मनानुसार चलूंगा..अब मैं अलगाव का दर्द सह लूँगा…अकेला रह लूँगा परन्तु ये ढोंगी लोगों से दूर रहना ही पसन्द करूँगा..!!!
यश लूटने में एक बुराई भी है, अगर हम इसे अपने पास रखना चाहते हैं तो हमें अपनी जिन्दगी

लोगों को खुश करने में और यह जानने में बिता देनी होगी कि _ उन्हें क्या पसन्द है और क्या नहीं.

जो चीजें आपको तोड़ती है, कमजोर करती है… आपको जीवन मे आगे बढ़ने नही देती… उसका पीछा करना बंद करो…

वरना ये आपको जीवन मे कभी आगे बढ़ने नहीं देगी…

कई बार आप सही होते हैं, फिर भी लोग आपको सही नहीं समझते हैं.

उस वक्त सबसे जरुरी यह होता है कि आप सही रास्ते पर चलते रहें,

लोगों की गलतफहमियाँ वक्त के साथ खुद- ब – खुद दूर हो जाएँगी.

बहुत कोशिश करता हूँ अपनों को साथ लेकर चलूँ… बहुत हद तक सोचता हूँ ये अपने हैं… कहीं पीछे न छूट जाएं…परन्तु उल्टा वे मुझे ही डसने की कोशिश करते हैं। अब मैं केवल खुद के लिए जीता हूँ… मुझे अब किसी से वास्ता नहीं रखना…!! उन्हें मैं नहीं दिखता… मेरे उपकार नहीं दिखते… वक्त की नज़ाकत पर यक़ीन है मुझे… जब मेरे दिन लौटेंगे, तब सुख में भी मेरे साथ केवल मैं होऊंगा..!!!

” जब रिश्ते अपशब्दों का शोर मचाते हैं, बेहतर है,

कान ढ़क, गहरी चुप्पी ओढ़, दूर निकल लिया जाये…”

जिसने आपको रुलाया हो… आपको जीवन के सबसे न्यूनतम बिंदु पर ला दिया हो…जिसने आपके आँसुओ को महज़ पानी समझा हो…वे आपके अपने कदापि नहीं हो सकते…कभी नहीं…!!!

जहां दूसरों को समझाना कठिन हो जाए, वहां स्वयं के मन को समझाकर भावनाओं को खुद तक सीमित कर लेना बुद्धिमानी है.

यदि आपको अपने जीवन में सुकून एवं शांति चाहिए तो लोगों से अपेक्षा कम से कम ही रखिए, और बहुत ज़रूरत पड़ने पर ही उन्हें याद करें..

हद से ज्यादा अपेक्षा और बेवजह की आशाएं आपको जाने-अनजाने में दुःख ही पहुँचाते हैं, इसलिए अपने हिस्से का कर्म करके भूल जाइए और खुश रहें..

जरूरी तो नहीं कि जिससे रोज मिल रहे हों, बातें हो रही हो उनसे ये अपेक्षा भी रखी जाए कि वे हमारा सम्मान करें, हमारे मुताबिक़ हर काम करें, हर कार्य मे मेरा साथ दें या हमारे हिसाब से खुद को बदल दे,

ऐसी उम्मीद रखना मूर्खता भरी होगी, क्योंकि उम्मीद टूटने के बाद दुःखी भी केवल हम ही होंगे !

कुछ वर्ष पूव मुझे लगता था कि जीवन में कोई तो बात करने वाला होना चाहिए…जिससे अपनी खुशी, कार्य, दुःख साझा कर सकूँ..परन्तु जैसे जैसे वक्त बीता, लोगों की फितरत बदली..अब ऐसा लगता है कि इस जीवन युद्ध में खुद ही..स्वयं को ही स्वयं का पूरक बनाना होगा..!!
घाव गहरा था बहुत, पर दीखता न था ; दिल भी बहुत दुखता था, पर कोई समझता न था ;

बाद में सब कहते तो हैं कि हमसे कह सकते थे ; पर जब- जब कहना चाहा था ” कोई सुनता न था “

मैंने विगत सालों में एक बात महसूस करी कि जो खुद पर बीतती है, वो दर्द सिर्फ आप महसूस कर सकते हो, इसीलिए मैं अपने इमोशन अथवा दुःख किसी से साझा नहीं करता. क्योंकि ऐसा करने के पश्चात् लोग हमें कमजोर समझ लेते हैं, बेफिजूल का ज्ञान देने लगते हैं, इधर उधर कह डालते हैं, मजाक भी बनाते हैं.. जोकि बाद में काफी आहत करता है, इसलिए अपनी व्यक्तिगत समस्याएं अपने पास ही रखना सबसे बेहतर है..!!!

इसलिए मेरा ऐसा मानना है कि कोई और नहीं सिर्फ आप ही खुद को मोटिवेट करके ऐसी सिचुएशन से बाहर निकालने में हेल्प कर सकते हैं, अच्छे मित्र बनाकर, उन से बात करके, उनके साथ टाइम एक्सपेंड करके, यकीन से नहीं कह सकता कि, ये बहुत आसान होगा, क्यूंकि आपका भरोसा सबसे उठ चुका होता है, तो एक बार फिर किसी पर भरोसा करना बहोत मुश्किल होता है, फिर भी कोशिश करनी चाहिए..

” कुछ भी इंपॉसिबल नहीं है “

ज़िन्दगी में अब तक के मिले अनुभवों के आधार पर मैंने समझा कि एक निश्चित वक्त तक ही हम किसी के लिए अच्छे या मनोरंजक इंसान होते हैं, उसके बाद हम उनकी ज़िन्दगी में गलत या बोरिंग पर्सन बनकर मात्र उनकी आवश्यकता के घटक बनकर रह जाते हैं, जिसे वह अपनी इच्छानुसार ही इस्तेमाल करते हैं.
एक उम्र आता है जब इंसान को सब चीजें एक सी लगती है सही गलत में द्वेष करना भूल जाता हैं, हॉ ठीक है कोई बात नही, छोड़ो जाने दो, जैसी बातों का आदती हो जाता है, निरंतर कुछ खोते जाना है फिर भी आगे बढ़ते रहना है, इस बात से भलीभांति परिचित हो जाता है….हँसकर बातों को टाल देने की आदत विकसित कर लेता है,

ऐसा लगता है जिंदगी का बहाव किसी शांत जलाशय की तरह अपने वेग में चलते जा रहा है, वही शून्यवस्था जिंदगी की परिपक्वता है जहां आप दूसरो से बेहतर नजरिये से जिंदगी को देखते है !!

स्वयं की तलाश में मैं जीवन के उस पड़ाव पर आ गया हूँ जहाँ अपना-पराया में कोई भेद नहीं दिखता …

सभी समान लगने लगे हैं…इन सब में अहमीयत्ता केवल स्वयं की रह जाती है.

मौन ताकत बन जाता है और रब सबसे अच्छा मित्र…!!

जैसे-जैसे हम उम्र की सीढ़ी चढ़ते हैं..तब हमें एहसास हो जाता है कि यह दुनिया इमोशन से नही परन्तु प्रैक्टिकल आधार पर चलती है। यहां इमोशनल होकर फैसले नही लिए जाते..ये जिंदगी व्यवहारिक एवम समायोजित होकर जीने के लिए ही मिला है… भावों के सागर में हम केवल अश्रु रूपी मोती ही पाते हैं।

यदि आप जीवन में किसी को खुद से भी अधिक महत्व देना शुरू कर दिए हैं… तो सम्भल जाईए क्योंकि बदले में दर्द, नाउम्मीदी एवमं निराशा के सिवा कुछ नहीं मिलने वाला और अवसाद के गिरफ्त में जाएंगे सो अलग….!!!

उम्र के उस पड़ाव पर हूं कि…अब किसी का साथ नहीं भाता, दरअसल जब कोई साथ होता है तो..जिंदगी बहुत आसान लगने लगती है और जब वो छोड़ जाते हैं. तो हम जीवन की सबसे निचली पायदान पे पहुंच जाते हैं, जहां सिवाय दर्द, बेबसी, अवसाद के कुछ नहीं मिलता,

इसलिए अब मैं एकांत से नाता जोड़ लिया हूं.

कभी-कभी किसी का रवैया इतना बुरा लग जाता है कि हम उनसे दुबारा बात करना नहीं चाहते…

इसीलिए हम धीरे-धीरे उनके जीवन से निकल जाने का प्रयत्न करने लगते हैं..

फिर उन्हें भनक लगे बिना स्वतः किनारे हो जाते हैं.

कोई आप को एक बार – दो बार दुःखी कर सकता है. इसके बाद भी यदि

वह इंसान आपको तकलीफ दे रहा है तो, गलती शायद आपकी है.

आप उसे मौका दे रहे हैं, आपको हर्ट करने का ” उस से दूर न हो कर ”

“-जब रिश्ते रुलाने लगें _ तब इग्नोर करना सीखो _ जिंदगी आसान हो जाएगी “,,

अक्सर, हम जिन्हें अपना समझकर समर्पित रहते हैं ;

चालाकियां बताती हैं उनकी __ वे समर्पण के काबिल नहीं.

मैं हर पल अपने लोगों को _ खोने से डरता हूँ, लेकिन कभी कभी खुद से _

_ ये पूछ लेता हूँ कि _ कोई है तेरा _ जो तुझे खोने से डरता हो ?

ज़िन्दगी भर उन रिश्तों के, पीछे भागता रहा,_ जो कभी अपने थे ही नही,

जब होश आया तब देखा,_ जो रिश्ते सच मे अपने थे,_ उन्हें तो मैं_ संभाल पाया ही नही..

— हम ऐसे लोगों पर अधिक ध्यान देते हैं ” जो हमें नज़रअंदाज़ ” करते हैं,

और जो हम पर ध्यान देते हैं ” उन्हें हम नज़रअंदाज़ ” करते हैं..—

कोई भरोसा तोड़े तो _ उसका भी धन्यवाद करो _ क्योंकि

वो हमें सिखाते हैं कि _ भरोसा हमेशा _ सोच- समझ कर करना चाहिए..

कभी- कभी थोड़ी दूरी बनाने से लोगों को यह पहचानने में मदद मिलेगी,

कि आप वास्तव में उनके लिए कितना मायने रखते हैं..

यदि आपके निजी जीवन के द्वन्दों मे कोई दखल दे रहा है, मतलब उसने आपके कमजोरी को भांप लिया है__ यह वक्त है आपके मजबूत होने का और उन लूप होल्स को बन्द करने का जो आपको कमजोर कर रहा है.

यदि किसी भी व्यक्ति को आपकी कमजोरी, आपकी दुर्बलता के बारे में पता चला… तो कोई भी हो, वह आपका सगा-सम्बंधी भी क्यूँ न हो… उसका फायदा जरूर उठाएगा…!!!

बुद्धिमान आदमी मूर्ख बनता हुआ प्रतीत हो सकता है, लेकिन उसे कोई मूर्ख बना दे ये भूल है ;

मूर्ख लोग बनते हैं, जो उसके आगे के प्रोग्राम को समझ नहीं पाते ” बुद्धिमान को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता ”

अक्सर लोग इसलिए आप की खुशियां बर्बाद करेंगे, क्योंकि उनके पास कुछ अच्छा करने के लिए नहीं है, या वह अपनी जिन्दगी से नाखुश हैं. इसलिए अपने रुख पर अडिग रहो.
हर व्यक्ति को खुश रखने की कोशिश करने वाला व्यक्ति एक दिन सबसे अकेला हो जाता है. अतः हमें  एक सीमा के बाद अपने मन की ही बात सुननी चाहिए.

हम लाख किसी के लिए अच्छा करते रहें. लेकिन, हमारी एक गलती पिछली सभी अच्छाइयों को धो कर रख देती है. हम लाख किसी की फिक्र करें, लेकिन यदि किसी समय हम किसी एक मौके पर कुछ भूल गए, तो सारा पिछला किया कूड़े के ढेर का हिस्सा बन जाता है. इसलिए आप कुछ भी करके किसी को हमेशा खुश नहीं रख सकते या यह कहें कि आप कुछ भी करके सबको खुश भी नहीं रख सकते. क्योंकि, लोगों की आपसे अपेछाओं का कोई अंत नहीं है. जैसे ही आप उनकी एक अपेछा पर खरे उतरे, आपके लिए तुरंत एक नयी शर्त उनके मन में तैयार हो जायेगी. इसलिए, अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठां से करते रहें और आगे बढ़ते चलें,

क्योंकि हमेशा सबको खुश रख पाना पूरी तरह असंभव है.

अपने सपनों का पीछा करें और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें. अगर आप ऐसा करेंगे, तब आप बहुत अच्छा जीवन जिएंगे. जो लोग अपनी पसंद का काम करते हुए जीवन व्यतीत करते हैं, वह अपने लाइफ को इन्जॉय करते हैं और ऐसे लोग ही खतरा उठाने का साहस भी करते हैं.
अपने आप को अपने लिए समय दें. काम और आराम के बीच संतुलन खोजें. ” जाओ दुनिया की सैर करो,”

ऐसे लोगों को खोजें, जो आपको महत्व देते हैं. अतीत में मत जियो, तुम्हारे पास देखने के लिए और भी बहुत कुछ है.

वहां जाएं जहां आप सबसे ज्यादा जीवित महसूस करते हों.

जो व्यक्ति दूर दृष्टि रख कर चलता है अर्थात आगे की ओर सोच कर कदम रखता है, जिस व्यक्ति में योजनाबद्ध तरीके से चलने की आदत है, जिसने अपने आपको पूरी तरह व्यवस्थित किया हुआ है, अपने ह्रदय को आनन्द से भरने की आदत है, जो महापुरुषों की तरह जीवन जीता है, किसी के सामने जिसके हाथ नहीं फैलते, जो दूसरों को आदर देना जानता है लेकिन स्वयं आदर पाने की कामना नहीं करता, जिस व्यक्ति का ह्रदय विशाल है, जिसको प्रेम बाँटना आता है – ऎसी सारी परिभाषा को जोड़कर मनुष्य का स्वस्थ होना कहलाता है.
जिंदगी बहुत छोटी है. यह केवल उन लोगों के लिए लंबी है, जिनकी हालत दयनीय है. इंसान के पास जो विशाल संभावना है उसको देखते हुए हमें जो जिंदगी दी गयी है, वह बहुत ही छोटी है.

लेकिन, उसमें भी लोग बोर हो जाते हैं और इस जीवन की सरलता को जाने बिना ही अपने आप को खत्म कर लेते हैं.

क्योंकि लोगों के शारीरिक और मानसिक नाटक_ जीवन के अस्तित्व की वास्तविकता से_ कहीं ज्यादा बड़े हो जाते हैं.

जब आप अपने घर की सफाई को ले कर इतने ज्यादा सतर्क रहते हैं, तो फिर अपने दिमाग को ले कर क्यों नहीं ? क्यों आप किसी व्यक्ति को अपने दिमाग में कूड़ा भरने की इजाजत देते हैं ? …………….इस बारे में सोचें, ताकि आप का दिमाग बेहतर काम कर सके. कई लोग यह समझ नहीं पाते कि किसी की बुराई, गॉसिप, नकारात्मक विचार दरअसल दिमाग के लिए कूड़ा ही है. ये न केवल आपकी कार्यछमता कम करते हैं, बल्कि लोगों से आप को दूर भी करते हैं. ……………………….इसलिए दिमाग में न जमा होने दें, विचारों का कूड़ा. 
जिस दिन मैं दुनिया से चला जाऊंगा उस दिन लोग मुझे याद करेंगे, अगर आप ऐसा सोचते है तो ये आपकी गलतफहमी है, आपके आस पास बहुत से लोगो की मौत हुई है आप किसको याद करते हो ? लोग केवल इंसान के अच्छे कर्मों को याद करते है. इसलिए इस गलतफ़हमी में न रहे कि आपके चले जाने से किसी को कोई फर्क पड़ेगा.

इसलिए सिर्फ अच्छे कर्म करें और अपने लिए जीना शुरू करें। लोगों की ज्यादा परवाह न करें, या किसी बात के लिए दुःखी न होयें. एक दिन सबको चले जाना है. जीने पर ध्यान दें न की चिंता, तनाव, दुःख और काम चोरी पर.

ये जो अपने होने की आड़ में लोग हमारी जिंदगी में दखल देते हैं,_ इनके जीवन को

जरा गौर से देखना _ ये वही लोग हैं जो खुद बहुत ग्लानि में जी रहे होते हैं _

_ ये स्वयं के ही बहुत बड़े विरोधी हैं_ वो तुम्हारा समर्थन क्या करेंगे_

खैर मरने से पहले जग जाओ _ दोनों बाहें फैला के समेट लो अपनी जिन्दगी को_

_ बाद में वो भी खाक तुम भी खाक..

 

 

 

 

सुविचार – मन हो नया – 2205

” मन हो नया ”

नये वर्ष के नये दिन पर पहली बात तो यह कहना चाहूंगा कि दिन तो रोज ही नया होता है, लेकिन रोज नये दिन को न देख पाने के कारण हम वर्ष में कभी- कभी नये दिन को देखने की कोशिश करते हैं. हमने अपनी पूरी जिंदगी को पुराना कर डाला है. उसमें नये की तलाश मन में बनी रहती है, तो वर्ष में एकाध दिन को हम नया दिन मान कर अपनी इस तलाश को पूरा कर लेते हैं, सोचनेवाली बात है- जिसका पूरा वर्ष पुराना होता हो, उसका एक दिन कैसे नया हो सकता है ? जिसकी आदत एक वर्ष पुराना देखने की हो, वह एक दिन को नया कैसे देख पायेगा ? हमारा जो मन हर चीज को पुरानी कर लेता है, वह आज को भी पुराना कर लेगा. फिर नये का धोखा पैदा करने के लिए नये कपड़े हैं, उत्सव हैं, मिठाइयां हैं, गीत हैं. लेकिन न नये कपड़ों से कुछ नया हो सकता है, न नये गीतों से कुछ हो सकता है.

नया मन चाहिए ! और नया मन जिसके पास हो, उसे कोई दिन कभी पुराना नहीं होता. जिसके पास ताजा मन हो, फ्रेश माइंड हो, वह हर चीज को ताजी और नयी कर लेता है. लेकिन ताजा मन हमारे पास नहीं है. इसलिए हम चीजों को नयी करते हैं. मकान रंगते हैं. नयी कार लेते हैं. नये कपड़े लेते हैं. हम चीजों को नया करते हैं, क्योंकि नया मन हमारे पास नहीं है.

कभी सोचा है कि नये और पुराने होने के बीच में कितना फासला होता है ? चीजों को नया करने वाली इस वृत्ति ने जीवन को कठिनाई में डाल दिया है. भौतिकवादी और अध्यात्मवादी में यही फर्क है. अध्यात्मवादी रोज अपने को नया करने की चिंता में लगा है. क्योंकि उसका कहना है कि अगर मैं नया हो गया, तो इस जगत में मेरे लिए कुछ भी पुराना न रह जायेगा, और भौतिकवादी कहता है कि चीजें नयी करो, क्योंकि स्वयं के नये होने का तो कोई उपाय नहीं है. नया मकान बनाओ, नयी सड़कें, नये कारखाने, नयी व्यवस्था लाकर सब नया कर लो. लेकिन अगर आदमी पुराना है और चीजों को पुराना करने की तरकीब उसके भीतर है, तो वह सब चीजों को पुराना कर ही लेगा. हम इस तरह नयेपन का धोखा पैदा करते हैं.

 

– आचार्य रजनीश ओशो

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