सुविचार 3329

-जब हम किसी से कुछ उम्मीद करते हैं, तो अक्सर हम निराश होने की संभावना में होते हैं. इसलिए किसी से कुछ भी उम्मीद न करें, जो कुछ भी मिला है उसके लिए आभारी रहें।

-प्रकृति से जुड़ी हर चीज और चीज उसका सम्मान करती है और उसकी सबसे ज्यादा परवाह करती है।

– जो कुछ भी प्यार, देखभाल और करुणा के साथ किया जाता है, वह बहुत आगे तक जाता है और यह कई गुना और परिमाण में आता है।

– अगर कोई आपको कुछ नहीं देता है और आपको किसी चीज की सख्त जरूरत है, तो उसकी मदद करें और वह आपके बिना पूछे ही आपकी मदद करेगा।

-अपने आप पर विश्वास करें जैसे कि आप केवल खुद पर विश्वास नहीं करते हैं कि कौन करेगा। हर कोई अपने आयाम में अद्वितीय है, उनके मार्ग में व्यापक अनुभव है। इसपर विश्वास करो। एक इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं, मनुष्यों के पास लाखों और करोड़ों रंग होते हैं जो विभिन्न प्रकार के लोगों के विभिन्न रंगों से भरे रंगीन जीवन जीने के लिए वास्तव में आवश्यक हैं।

– समाज को कुछ देना शुरू करें जैसे कि जब हम कमजोर होने के लिए पैदा हुए हैं और खुद से पूछें कि क्या आप कपड़े का एक टुकड़ा या एक कील भी लाए हैं। नहीं, यह परोक्ष रूप से आपको प्रकृति द्वारा दिया गया है और आप कुछ भी वापस भुगतान नहीं कर सकते हैं बस आप उत्पादन कम कर सकते हैं।

– प्रोत्साहित करने की तुलना में हंसना आसान है और हां मानवता का द्रव्यमान भी ऐसा ही करता है। यदि आप मदद नहीं कर सकते हैं तो उस व्यक्ति और उसके विचारों को अवमानना ​​में न डालें, क्योंकि यह आपके प्रोग्राम किए गए दिमाग के अनुरूप नहीं है, सरल !

– अंत में, चीजों को आसान बनाएं, जीवन आसान है हम इंसान इसे जितना जटिल बना रहे हैं उतना ही जटिल बना रहे हैं। नौकरी के लिए डिग्री की आवश्यकता हो सकती है लेकिन जीवन में पास होने के लिए अनुभवों से सीखने के अलावा कोई डिग्री नहीं है.

  • रोहन अग्रवाल [ Hiker ]
  • One question always have popped out in my head and have wondered why if a not so famous or a poor person does something is called wrong and when the same thing did by a rich or a popular person is right.
    I believe it’s not the problem of others, it’s starts with us ! Yes, because we are not investing in individuals or institution which does good work as they can be the change makers but they aren’t given enough support to raise a voice or do something good.
    it’s a fundamental problem and is deep rooted in our system.
    Hard to say when it would change but let’s hope one day it will !!
    We have to start investing in individuals because that individuals will grow and make institutions.
    एक सवाल हमेशा मेरे दिमाग में कौंधता है और सोचता है _ अगर कोई व्यक्ति जो इतना प्रसिद्ध नहीं है या गरीब व्यक्ति कुछ करता है, तो उसे गलत क्यों कहा जाता है और जब वही काम किसी अमीर या लोकप्रिय व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो वह सही होता है।
    मेरा मानना ​​है कि यह दूसरों की समस्या नहीं है, यह हमसे शुरू होती है ! क्योंकि हम ऐसे व्यक्तियों या संस्थानों में निवेश नहीं कर रहे हैं जो अच्छा काम करते हैं क्योंकि वे बदलाव लाने वाले हो सकते हैं लेकिन उन्हें आवाज उठाने या कुछ अच्छा करने के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं दिया जाता है।
    यह एक मूलभूत समस्या है और हमारे सिस्टम में इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं।
    यह कब बदलेगा कहना मुश्किल है लेकिन उम्मीद करते हैं कि एक दिन ऐसा होगा !!
    हमें व्यक्तियों में निवेश करना शुरू करना होगा क्योंकि वह व्यक्ति विकसित होंगे और संस्थान बनाएंगे।
  • My Favourites – ” सोचें ” आपके लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं ? – 2022

    जिंदगी में ऐसे मौके भी आते हैं, जब आप लोगों की मदद के मोहताज होते हैं, और लोग मदद भी करना चाहते हैं,

    लेकिन आपके स्वभाव और खराब आदतें देखकर, आपकी मदद नहीं कर पाते.

    अपने भीतर करुणा रखिए आवेश नहीं, _ क्योंकि बादलों की वर्षा से ही पुष्प खिलते हैं उसकी गर्जना से नहीं …

    _ जिदंगी जीने का सही तरीका उन्हीं को आया है, _ जिन्होंने जिदंगी में हर जगह * बादाम * नहीं बल्कि * धक्का * खाया है ..

    जिस तरह समुद्र में लहरे शांत हो जाये यह कल्पना गलत है, _ इसकी बजाय हम अच्छी तरह से तैरना सीखें, नाव चलाना सीखें _वो जरुरी और उपयोगी है,

    _ उसी प्रकार संसार के झमेले कभी ख़त्म नहीं होते, हमे अपनी कुशलता और क्षमता में वृद्धि करना चाहिए, _ ताकि हम आराम से जीवन यापन कर सकें !!!

    आज रास्ता बना लिया है तो, कल मंजिल भी मिल जाएगी._

    _ हौसलों से भरी यह कोशिश एक दिन जरूर रंग लाएगी.

    जब ज़िन्दगी आपको दोबारा मौका दे, _

    _ तो पुरानी गलतियों को दोहराने की गलती कभी मत करना…

    परिस्थिति बदलना जब मुमकिन ना हो तो मन की स्थिति बदल लीजिए, _

    _ सब कुछ अपने आप ही बदल जाएगा ..

    लोग आप को तब ज्यादा पसंद करने लगते हैं, जब आप अपने खुद के विचार लोगों के सामने रखते हैं, _

    _ बजाए दूसरों के विचारों पर हां करने के ..

    आपका कर्तव्य क्या है ? _खुश लोगों की वजह से यह विश्व चल रहा है _ और हम

    इस विश्व का हिस्सा हैं, ” इसलिए खुश रहना हमारा कर्तव्य भी है और अधिकार भी “

    जो भी करें, मन से करें,

    कर्म जब आनंद देने लगता है, _ तब मिलकर ही रहती है सफलता..

    अवसरों को हाथ से जाने न दें और अपने भविष्य को आगे बढ़ाएं _

    क्योंकि जब आप उन्हें लेना बंद कर देंगे तो जीवन आपको अवसर देना बंद कर देगा.

    जब आप अपने जीवन के उज्ज्वल पक्ष को देखते हैं,_

    _ तो आपके जीवन का अंधेरा अपने आप गायब हो जाता है..

    जो छोटे कामों के पीछे बहुत ज्यादा पड़े रहते हैं, _

    _ वे अकसर बड़े कामों के लिए नाकाबिल बन जाते हैं..

    आजाद कर दो उन परिन्दों को, _ जो आपके साथ रहना खुद की तौहीन समझें,

    _ सबको समेटने की जबरदस्ती, हमें मिटा देती है !

    Confidence यह नहीं है कि लोग आपको पसंद करेंगे ही,

    _ confidence यह है कि _ जब वो पसंद ना भी करें _ तब भी आप ठीक हो..

    ज़िन्दगी में एक बात सीख लो मेरे यार, किसी के लिए अगर आप जरुरी हो तो,_

    _ कल भी उतने ही जरुरी होंगे, इसका भरोसा नहीं..

    जरूरत से अधिक आत्मग्लानि भी आपको पुनः उठ खड़े होने से रोकती है…

    _ इसीलिए स्वयं के साथ नरमी से पेश आएं और अपने आप को माफ़ करना सीखें…!!!

    सृजन कर्ता हर परिस्थिति को झेलते हुए आगे निकल जाते हैं_ और बुजदिल_

    _ दुसरो को ब्लेम करने में, खुद की सफाई देने में अपना दुर्भाग्य गा रहे होते हैं.

    कोई दूसरा आपको चोट नहीं पहुंचा सकता, _ यह आप ही हैं

    _  जो खुद को चोट पहुँचा रहे हैं और हथियार आपके अपने विचार हैं..

    आप जैसे हैं, यह आपके साथ हुई घटना का परिणाम नहीं है,_

    _ यह इस बात का परिणाम है कि आपने अपने अंदर क्या रखने का फैसला किया है.

    ” आपको वह मिलता है जिस पर आप ध्यान केंद्रित करते हैं, _

    _  इसलिए उस पर ध्यान केंद्रित करें जो आप प्राप्त करना चाहते हैं “

    जिस इंसान की हर बात आप को सोचने पर मजबूर कर दे, _

    _ उस इंसान के साथ कभी दुश्मनी मत करना !!

    ” लोग आपके बारे में बहुत सी चीजों को नकारते हैं _

    _ यह आपको तय करना है कि आपके लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं “

    तुम जिस बात को समझ लेते हो, वो बात तुम्हें कभी परेशान नहीं कर सकती, _ यदि फिर भी

    वो बात तुम्हें परेशान करे, तो समझ लेना कि तुम्हें समझ नहीं आई _ सिर्फ तुमने सिर हिला दिया है..

    कुछ समस्याएं जो हमारे पास है, उनके बारे में सोचकर दुःखी होने से अच्छा है _

    _ हम ये सोचकर खुश रहें कि बहुत ऐसी समस्याएं हैं _ जो हमारे पास नहीं है.

    उन चीजों के बारे में चिंता क्यों करें जिन्हें आप नियंत्रित नहीं कर सकते _

    _ जब आप उन चीजों को नियंत्रित करने में खुद को व्यस्त रख सकते हैं जो आप पर निर्भर हैं ?

    ” कौन, किसकी मदद करता है “? आपसे कम ज्ञानी इंसान, आपसे मदद लेकर वास्तव में आपकी ही मदद करता है.

    _ क्योंकि वह निम्न स्तर पर रहकर भी आपको ऊपर उठाता है.

    बिना किसी स्वार्थ के न कोई बात करता है न कोई मिलना चाहता…

    _ दुनिया इतनी काम्प्लेक्स हो गई है कि_ कौन भीतर से कैसा है…उसका पता लगाना भी मुश्किल है….!!!

    कुछ क्षणिक लोग ज़ीवन को स्थाई रूप से नरक बना कर चले जाते हैं _ और हम

    _  उन बुरे अतीत से लड़ने में ही अपना वर्तमान, भविष्य सब कुछ नष्ट कर लेते हैं..

    यह दुनिया है जनाब, यहां मुफ्त में मशवरे मिल जायेंगे हज़ार _

    _ पर जब बात जिम्मेवारी की आएगी, _ तो कोई नही होगा तैयार ..

    जो तुम्हे धोखा दे, समझना की बड़ा गरीब है, तुमसे ज्यादा गरीब है, तुमसे ज्यादा बड़ा भिखारी है, उस पर दया करना, _

    _ इसलिए नहीं की तुम्हारी दया से वो बदल जायेगा _ वो बदले ना बदले लेकिन तुम बदल जाओगे.

    जब कोई धोखा दे जाए तो शांत रहिएगा, क्यूँकि जिन्हें हम जवाब नहीं देते _

    _ उन्हें वक़्त जवाब देता है, _ और वक़्त के फेर से कोई बच नहीं पाया है.

    जिंदगी में कोई भी चीज इसलिए हासिल करने की कोशिश करें _ _ क्योंकि उससे

    आपको ख़ुशी मिलेगी, इसलिए नहीं कि वो आपके दोस्त, रिश्तेदार या पड़ोसी के पास है.

    उन लोगों से बचें जो आपकी आवश्यकता होने पर आपका सम्मान करते हैं और _

    _ जब आपकी आवश्यकता नहीं तो आपका अनादर करते हैं..

    अगर आप की बहस बदतमीज इंसान से हो तो, हार मान लेनी चाहिए ; _

    _ क्योंकि आपकी आवाज कितनी ही दमदार हो, आप अच्छे से भौंक नहीं सकते ..

    अब वो समय आ गया है _ जब आप ऐसे लोगों को इग्नोर करेंगे _

    _ जैसे उन्होंने कभी आपको गंदे तरीके से इग्नोर किया था.

    यदि आप उदास हैं तो आप अतीत में जी रहे हैं, _

    _ बीती बातों को भूलकर जीवन में आगे बढ़ें..

    सच बड़ी काबिलियत से छुपाने लगे हैँ हम, _

    _ हाल पूछने पर बढीया बताने लगे हैँ हम !!

    जिंदगी की ठोकर बहुत निराली है, _ जब भी लगती है,

    किसी की असलियत दिखा ही जाती है, या फिर कुछ ना कुछ, जरूर सिखा जाती है.

    कठिन समय की सबसे अच्छी बात यह है कि _

    _ आपको हर किसी के असली रंग देखने को मिलते हैं…

    जरुरी नहीं कि इंसान बदला हो, क्या पता जीवन की किसी उलझन में फंसा हो _

    _थोड़ा वक्त दो उसे,,!!

    जिसके साथ जीवन गुज़ारना हो,

    उसकी निंदा करके आप कभी भी आनंद को उपलब्ध नहीं हो सकते.

    जो लोग आपको अच्छे लगते हैं,

    कोशिश करें कि उनसे आपको कभी कोई काम ना पड़े..

    बदल गई है रंगत जमाने की साहब,

    आजकल वही अनजान बनते हैं, जो सब कुछ जानते हों..

    डिप्रेशन में जाना ओवर थिंकिंग का नतीजा है, इस समय हमारा दिमाग _

    _ उन प्रॉब्लम्स को क्रिएट करने लग जाता है, जिन का कोई अस्तित्व ही नहीं होता है..

    अत्यधिक सोचना एक नकारात्मक कला है,

    ये ऐसी समस्या को भी निर्माण करती है, _ जो वास्तविकता में नहीं है.

    “बहुत सी समस्याये हैं, बहुत सी उलझने हैं लेकिन ऐसी एक भी उलझन नहीं _

    _ जो मनुष्य हल करना चाहे और हल ना कर सके..

    किसी भी तरह की समस्या होने पर घबराएं नहीं _

    _बल्कि बिना शांति खोए उसका समाधान करने का प्रयास करें.

    ” गज़ब का चमत्कार होगा,” सिर्फ कुछ दिनों के लिए,

    अपने – आप को “होश” में पूरी तरह से महसूस करने की कोशिश करो..

    कभी किसी को उसके बीते हुए कल से मत परखिए,

    लोग सीखते हैं, बदलते हैं और आगे बढ़ते हैं..

    ” वजह ” ही तय करती है, कामयाबी का सफ़र..

    वरना ज़िन्दगी का क्या है, आए – बैठे और रवाना हो गए…

    जब परिस्तिथियां बदल जाये तो, _

    _ रणनीति बदल देने में भी कोई बुराई नहीं है ..

    आपको आगे बढ़ते रहने के लिए पिछली बातों को भूलते रहना होगा,

    ये सोच कर कि बीता हुआ कल वापस नहीं आएगा.

    बिता हुआ कल अगर वर्तमान पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगे,

    तो बीते हुए कल को ज़हर समझकर त्याग देना चाहिए.

    दिखावे के लिए बड़े लोगों में बैठकर ख़ुद को जलील मत किया करो,

    बस रहो अपनों में नवाबों की तरह…

    लोगों की निंदा से परेशान होकर अपना रास्ता मत बदलना,

    क्योंकि सफलता शर्म से नहीं साहस से मिलती है..

    जो लोग बेहतर उपायों का विरोध करने लगें,

    तो इसका मतलब है कि वो हमारे हितैषी नहीं हैं.

    दिल तो रोज कहता हैं कि मुझे कोई सहारा चाहिए..

    फिर दिमाग कहता है क्यों तुम्हे धोखा दोबारा चाहिए…

    दुनिया में आधे लोगों को आप की मुसीबत सुनने में कोई रस नहीं,

    और बाकी आधे लोगों का खयाल है कि आप इसी लायक हो.

    कभी उस इंसान के लिए मत रोओ जो तुम्हे दुख दे, बस मुस्कुराओ और कहो,

    “शुक्रिया” तुमसे से बेहतर किसी को खोजने का मौका देने के लिए..

    कोई फायदा नहीं किसी के पीछे पीछे जाने का, हँसते हँसते खुद की Life Enjoy करो

    और भूल जाओ उसे, जो तुम्हे भूल गया हो.

    बात बनाने वाले अक्सर बात बनाया करते हैं,

    जो खुद होते हैं झूठे यारों _ औरों को झूठा बताया करते हैं.

    ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है, क्योंकि लोगों की तो आदत होती है,

    सामने सलाम और पीठ पीछे बदनाम करने की..

    “-बदनामी का डर तो सिर्फ उसे होता है _ जिसमें नाम कमाने की हिम्मत नहीं होती !!”

    आप स्वयं को तब तक स्वतंत्र नहीं कह सकते ;

    जब तक आप दूसरों को प्रभावित करने के लिए खुद में बदलाव लाते रहेंगे.

    अगर लोग आप की तारीफ़ अचानक से शुरू कर रहे हैं, तो समझ जाइए की उनको कुछ काम लेना है ..
    ऐसे लोगों से अवश्य संभल कर रहें, जो आप के सामने आप के साथ हैँ, _ और आप के पीछे आप के खिलाफ..
    नफरत जलन होती है, असल में जब एक इंसान दूसरे इंसान से नफरत कर रहा होता है तो__ वास्तविकता में या तो वह उसे पा नहीं पाता, या वह उसके जैसा बन नहीं पाता है..
    जब बराबरी की हर कोशिश नाकाम हो जाती है, _

    _ तब आप से जलने वाले नफ़रत पर उतर आते हैं ..

    फिक्र मत करो उनकी, वो तुम्हारी बुराई इसलिए कर रहे हैं, _ क्योंकि वो तुम्हारी बराबरी नहीं कर सकते,,,!!

    ” कोई दवा नहीं है उसके रोगों की, जो जलता है तरक्की देखकर लोगों की “

    करने दो जो आपकी बुराई करते हैं,__

    _ ऐसी छोटी – छोटी हरकतें छोटे लोग ही करते हैं.

    कान के कच्चे लोग आपकी उन गलतियों के लिए नाराज़ रहते हैं, _

    _ जो आपने कभी की ही नहीं…

    मुर्ख होते हैं वो लोग, जो साधारण से काम को भी जबरदस्ती जटिल बना लेते हैं,

    समझदार तो वो हैं, जो बड़े बड़े काम भी सरलता से कर लेते हैं.

    जिंदगी के कुछ चैप्टर ऐसे होते हैं, जिन्हें आज नहीं तो कल बंद होना ही है…

    इसलिए जो चीज़ें आपके लिए हैं ही नहीं, उन्हें ज़बरदस्ती पकड़ने से कोई फायदा नहीं है.

    लोग इसलिए आपको रास्ते बदलने को कहते हैं, _ क्योंकि वो नहीं चाहते कि,

    जो वो नहीं हासिल कर पाए, वो लछ्य आप हासिल कर लो.

    कभी कभी आप बिना कुछ किए भी दुनिया को गलत लगते हैं, बुरे बन जाते हैं,

    क्योंकि आप वो नहीं करते, जैसा लोग चाहते हैं कि आप करें.

    उन लोगों के बारे में सोचना बंद कर दें _ जिनके लिए आप बिलकुल भी मायने नहीं रखते,

    यकीन मानिए आप हर पल खुश रहेंगे..

    दूसरों से प्रशंसा के कुछ शब्दों के लिए आपको कोई काम नहीं करना चाहिए, _

    _ इसे हमेशा अपनी संतुष्टि के लिए करें..

    जो लोग आपसे नफरत करते हैं, उनसे कभी बहस ना करें ; वे परजीवी की तरह हैं _

    _ जो आप में से सभी सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर सकते हैं.

    जब लोग बराबरी करने की स्थिति में नहीं होते तो जल कर और बुराई करके,

    अपनी व्याकुलता कम करने की कोशिश करते हैँ.

    जब कोई आपसे नफरत करने लग जाए, तो समझ लेना _

    _ वो आपका मुकाबला नहीं कर सकता..

    अगर आप किसी को बुरे लगते हैं तो उस से आप को दूर हो जाना चाहिए ;

    आप की पचासों अच्छाइयां भी उस पर आप के लिए प्यार का काम नहीं कर सकती..

    नफरत ही करते हैं ना लोग, _ और हमारा कर भी क्या सकते हैं..
    जो लोग दूसरों को निचा दिखाने में उलझे रहते हैं,

    वो कभी ऊंचाइयों पर नहीं पहुंच पाते हैं..

    अब इतनी ज्यादा समझ आ गयी है कि…

    ना तो किसी के साथ बहस करने का मन करता है और ना ही ” समझाने का “

    जैसे जैसे आयु बढ़ती है ; आपको ये आभास होने लगता है कि आपने

    व्यर्थ ही उन लोगों को महत्व दिया, जिनका आपके जीवन में कोई योगदान था ही नहीं.

    नही मन करता अब किसी से बहस करने का, _ जो है जैसा है बस ठीक है..
    खुद का ख्याल रखना सीख लो, नहीं तो जब कोई धोखा देगा, तो कुछ करने लायक नहीं बचोगे.
    बहुत कुछ है कहने को _ पर ना जाने क्यों _

    _ अब कुछ ना कहना ही बेहतर होगा..

    जितने दुख आपकाे मिल रहे हैं…

    उसमें से निन्यानबे प्रतिशत आपके आविष्कार हैं.

    बढ़ती उम्र आपको यह अवश्य बताएगी की _ कुछ लोगों को खो देना

    _ वास्तव में _ बहुत कुछ पा लेने जैसा था.

    ह्रदय से अच्छे लोग बुद्धिमान होने के बाद भी धोखा खा जाते हैं, _

    _ क्योंकि ये लोग दूसरों को भी,,,,, ह्रदय से अच्छे होने का विश्वास कर बैठते हैं ..

    प्रायः शांत व्यक्ति विवाद से बचना चाहते हैं, इसलिए निर्णय भी नहीं लेना चाहते हैं,

    _ जबकि वे सबसे अच्छा निर्णय ले सकते हैं..

    जीवन में हम अपना काफी समय उनके लिए नष्ट कर देते हैं,

    जिन्हें हमारी चिन्ता नहीं होती.

    ” कुछ लोगों के लिए आप महत्वपूर्ण नहीं हैं “

    इस बात को स्वीकारिये और जीवन में आगे बढ़ते रहिए..

    लोगों और परिस्थितियों से परेशान न हों,

    क्योंकि आपकी प्रतिक्रिया के बिना दोनों ही शक्तिहीन हैं.

    जब तक आप बुरे समय का अनुभव नहीं करते,

    तब तक आप अपने जीवन के गौरवशाली दिनों को संजो नहीं सकते हैं.

    ज़िन्दगी को खुली किताब ना बनाओ क्योंकि..

    लोगों को पढ़ने में नहीं पन्ने फाड़ने में ज्यादा मजा आता है.

    सफर में कहीं तो दगा खा गए हम..

    जहां से चले थे फिर वहीँ आ गए हम…

    पहचान बड़े लोगों से नहीं,

    #समय पर #साथ देने वालों से होनी चाहिए !!

    जरूरी नही गुनाहों की सज़ा में ही दर्द मिले,

    कुछ ज्यादा अच्छाइयों के सिला भी दर्द में मिल जाया करता हैं.

    उजालो में मिल ही जायेगा.. कोई ना कोई,

    तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे..!!

    कुछ लोगों से चाहे, कितनी ही बार मिल लीजिए, _

    _ कितनी ही बातें कर लीजिए, कम ही लगती हैं !!

    बताकर कुछ न कुछ कमियाँ निगाहों से गिराता है.

    ज़माना नेक नीयत पर भी अब उंगली उठाता है….

    कुछ बनना ही है तो समंदर बनो,

    लोगों के पसीने छूट जायें, तुम्हारी औकात नापते- नापते..

    छीनता हो जब तुम्हारा हक़ कोई उस वक़्त तो _

    _ आंख से आंसू नहीं शोला निकलना चाहिए.

    जितना दिखाते हो, उससे अधिक आपके पास होना चाहिए,

    जितना जानते हो, उससे कम आपको बोलना चाहिए.

    ” शख़्सियत अच्छी होगी _ तभी लोग उस में बुराइयाँ खोजेंगे,

    वरना बुरे की तरफ़ _ देखता ही कौन है “

    आपकी बदनामी का धुंआ, वहीँ से उठता है ;

    जहाँ आपके नाम से आग लग जाती है..

    जिसे गुण की पहचान नहीं है, उसकी प्रशंसा से डरो ;

    और जो गुण का जानकार है, उसके मौन से डरो..

    निकले हैं वह लोग मेरी शख्सियत बिगाड़ने,

    किरदार जिनके खुद के मरम्मत मांग रहे है.

    वो ख़ुश हैं तुम्हारे बिना तो उन्हें ख़ुश रहने दो, _

    _ तुम याद करोगे उन्हें, उन्हें इस भ्र्म में रहने दो ..

    ख़ुद को दर्द दे कर भी _ तुमने बोलो क्या पाया !

    जो भी देखता है, _ वो तुमको ही सुनाता है !!

    एक गलती रोज़ कर रहे हैं हम,

    जो मिल नहीं सकता, _ उसी पे मर रहे हैं हम !!

    बिना फल वाले सूखे पेड़ पर_ कभी कोई पत्थर नहीं फैंकता.

    पत्थर तो लोग उसी पेड़ पर मारते हैं _ जो फलों से लदा लदा होता है..

    पेड़ों जैसी जिंदगी गुजर रही है,

    फल भी खाते हैं लोग, हमसे तोड़ कर, और पत्थर भी मार देते हैं..

    कभी उस चीज़ को मत छोड़ो,_ जो आप वास्तव मेँ चाहते हैं _

    _ प्रतीछा करना कठिन है, लेकिन पछतावा करना अधिक कठिन है.

    मनुष्य की आदत है जो सहज प्राप्त होता है उसकी कीमत नहीं समझता, _

    _ जब जरा दूर हो जाए तब उसकी कीमत समझ में आती है.

    ” कोई भी चीज जब होती है तब उसकी कीमत पता नहीं चलती, _

    _ खो जाने के बाद ढूंढते हैं, जो फिर कीमत देने पर भी नहीं मिलती “

    यदि आप पर मुसीबत आती नहीं है, तो उस से सावधान रहें, _

    _ लेकिन यदि मुसीबत आ जाती है तो, किसी भी तरह उस से छुटकारा पाएं..

    सुख के लम्हों तक पहुंचते पहुंचते हम उन लोगों से जुदा हो जाते हैं ;_

    _ जिनके साथ हमनें दुख झेल कर सुख का स्वप्न देखा था !!

    सौम्य बातचीत, pleasing fragrance [मनभावन सुगंध], धुला हुआ चेहरा, व्यवस्थित बाल, acceptable standard के साफ कपड़े और चेहरे पर मासूमियत भरी प्यारी सी मुस्कान all – time hit होते हैं, _

    _ निजी जीवन मे यही व्यवहार रखिए, __ पक्का सफल होंगे, _ कोई काम आपके मुताबिक न भी हो तब भी अपना प्यारा व्यवहार न बदलें ..

    दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि _ अगर हम किसी एक ही नजरिए का दामन थामे रहेंगे,

    _ तो आगे नहीं बढ़ सकते..

    ” गुणवत्ता की कसौटी बनें ” कुछ लोंग ऐसे वातावरण के

    _ अभ्यस्त नहीं होते जहां उत्कृष्टता अपेक्षित होती है ..

    आप अलग तरह से चमकते हैं _ जब आपका आत्मविश्वास दूसरों से मान्यता के बजाय _ खुद पर विश्वास से भर जाता है.

    You glow differently when your confidence is fuelled by belief in yourself instead of validation from others.

    My Favourites – ज्ञान कि बूंदें – 2021

    ज्ञान कि बूंदें हमारे ऊपर अभी गिरनी चाहिए – अभी मतलब जब हम जवान हैं, स्वस्थ हैं और एक लम्बा जीवन हमारे सामने पड़ा है,

    और यह ज्ञान बूँदों के तौर पर नहीं, बल्कि हमारे ऊपर बारिश के रूप में गिरना चाहिए.

    ज्ञान की जड़े कड़वी होती हैं _ लेकिन इसके फल बहुत मीठे होते हैं..

    ” बिना ज्ञान के जीवन _ _ एक बीमार व्यक्ति के भांति होता है..

    यदि आपके पास ज्ञान है तो उससे आप अपने पास की व्याख्या मत करिये, _

    _ इससे अपना भविष्य और भी बेहतर बनाइये ..

    ज्ञान के बाद _ मौन, मेहनत दोनों ही आते हैं,,, _ किसी को समझाने से कहीं अच्छा है अपने काम पर लगो,,,वक़्त आने पर सब समझ जाते हैं.
    ” सच्चा ज्ञान ” – जिन विचारों से आपका अन्तःकरण और आपकी बुद्धि, आपका ह्रदय पूरी तरह समर्थन देता हुआ आनन्दित होता हो.
    हमारा ज्ञान इतना तो अवश्य ही होना चाहिए कि उस ज्ञान से हम एक स्वस्थ जीवन को जी सकें.
    ज्ञान एक ऐसा निवेश है, _ इसका मुनाफा हमारे जीवन के अंत तक भी मिलता रहता है.
    ” हमारा ज्ञान अज्ञान के एक महान महासागर में एक छोटा सा द्वीप है “
    ज्ञान में निवेश _ हमेशा सबसे अच्छा ब्याज देता है..
    ज्ञान जानने में नहीं, _ वैसा बनने में है..
    लिखी हुई बातें आवाज नहीं करती _ पर असर बहुत करती हैं !!
    अच्छा लिखना ही शानदार नहीं होता साहब, पढ़ने वाले भी समझदार होने चाहिए …!!
    प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने आत्महित एवमं स्वार्थ के बारे में ही सोचता है, इसीलिए स्वयं बलवान बनें, कोई साथ नहीं देगा…!!!
    जिंदगी बहुत छोटी है, _ इसलिए अपना समय उन लोगों के साथ बर्बाद न करें जो आपकी सराहना या महत्व नहीं देते हैं..
    ” मधुमक्खी मक्खियों को यह समझाने में अपना समय बर्बाद नहीं करती हैं कि शहद गंदगी से बेहतर है “
    हमेशा नैतिकता से बात करें _ क्योंकि इंसान पर ज्यादातर मुसीबतें उसकी जुबान की वजह से आती हैं.
    दिमाग में हो रही उथल पुथल _ आप के साथ भविष्य में होने वाले नुकसान का एक संकेत है.
    कोशिश करो और असफल हो जाओ _ लेकिन कोशिश करने से मत चूको..
    अपनी कामयाबी को इससे मापो कि उसे पाने के लिए तुमने क्या खोया है !
    अपने अतीत को लेकर शांत रहें _ जो हो गया सो हो गया _ अब ऐसा करें कि ” वर्तमान खराब न हो “
    अगर आपके बेवजह दुश्मन हैं तो आप के पास या तो सम्पत्ति ज़्यादा है या आपका किरदार ख़ूबसूरत है.
    अपनी सुविधाओं का दुरुपयोग न करें, _ क्योंकि इसका परिणाम आपको खुद भुगतना पड़ सकता है.
    कुछ वक़्त अच्छा गुज़ारने के लिए _ अपनी ज़िन्दगी को दांव पर मत लगाइये..!!
    जिस चीज़ को आप कमा सकते हैं, उसे मांग कर _ अपनी वैल्यू _ कम करने की _ कोई जरुरत नहीं..
    व्यक्ति में इतनी ताकत हमेशा होनी चाहिए, _ कि अपने दुःख, अपने संघर्षों से अकेले जूझ सके..
    “लम्बी छलांगों से कहीं बेहतर है निरन्तर कदम, _ जो एक दिन आपको मंज़िल तक ले जाएगा”
    आप आज जिसकी कदर नहीं कर रहे हो,_ यकीन मानो कुछ लोग उसको दुआओं में मांग रहे हैं..
    बस एक मोड़ ग़लत मुड़ गया था _ फिर ना मंज़िल मिली और ना वापिस घर आया !!
    लोग पहले ___ अच्छे हुआ करते थे ; लेकिन अब लोग अच्छे बनते हैं : फर्क है ना,, जनाब..
    अगर आप अपने मन के जाल में ही खोए रहेंगे तो _ इस जीवन की सुंदरता से चूक जाएंगे.
    ज़रूरत से ज़्यादा सोच कर हम ऐसी समस्याएं खड़ी कर लेते हैं _ जो असल में है भी नहीं..
    हारने वालों का भी अपना रुतबा होता है _ मलाल वो करे जो दौड़ में शामिल नहीं !!
    ज़िंदगी में कोई न कोई हार ऐसी होती है, _ जिस के बाद कुछ भी हारने को नहीं बचता..
    ज़िन्दगी की हकीकत बस इतनी सी है, _ कि इंसान पल भर में याद बन जाता है..
    खुद यकीन नहीं होता जिनको अपनी मंजिल का, _ उनको राह के पत्थर रास्ते नहीं देते..
    उस सुख का क्या महत्व, जो थोड़ी- बहुत वेदना का अनुभव किए बिना ही मिला हो ?
    तराशने वाले पत्थरों को भी तराश देते हैं, और नासमझ हीरे को भी पत्थर करार देते हैं.
    पहाड़ पर चढ़ो ताकि तुम दुनिया देख सको, इसलिए नहीं कि दुनिया तुम्हें देख सके.
    लोग जो कहते हैं उस पर कम ध्यान दें _ और जो वे करते हैं उस पर अधिक ध्यान दें.
    नासमझी और उतावलेपन में, उठाये कदम, कलम और कसम, तकलीफ ही देते हैं.
    पहाड़ रुका रहा और नदी बह चली, _ दोनों ने कभी _ एक दूसरे की शिकायत नहीं की..
    इरादे इतने भी कमजोर नहीं होने चाहिए कि _ लोगों की बातों में आ कर टूट जाए !!
    दर्द को भी ताक़त बनाना पड़ता है, जब भी ज़िंदगी में कुछ हासिल करना पड़ता है.
    दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद, वो ज़ख्म कैसे दिखाएं जो दिखते नहीं..
    शरीफ़ व्यक्ति जब बदमाशी पर उतर जाता है ; तो फिर वो किसी से नहीं हारता..
    सम्भवतः कोई नहीं देख सकेगा _ लेकिन दुःख तुम्हें _ भीतर से सुंदर कर देता है…
    न अमीर खुश है न गरीब खुश है, जो रिलैक्स रहने का हुनर जानता है वही खुश है.
    जब हकीकतों की हवा चलती है, तो ख़्वाबों के चिराग अक्सर बुझ जाया करते हैं.
    जो आपके सुख में सुखी नहीं हुआ, वह आपके दुख में दुखी कैसे हो सकता है ?
    यदि आप कुछ भी जोखिम नहीं लेते हैं, _ आप सब कुछ जोखिम में डालते हैं..
    काटने जाओ तो जिंदगी बहुत लंबी है, और जो जीने जाओ तो बहुत छोटी है..
    बोलने से पहले यह देख लें कि आप सिक्के के दोनों पहलू देख रहे हैं या नहीं.
    सही दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम भी बहुत बड़ा साबित होता है.!
    लोगों की बातें सुनें, _ लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें !
    अपने लक्ष्यों पर ध्यान दें, _ दूसरों के जीवन पर नहीं …
    मिलती नहीं मेरी तबियत किसी से, कुसूर मेरा है…शख्स कोई बुरा नहीं..
    जीवन खेल है ! जिसे समझना मुश्किल है ,,,,? और समझाना नामुमकिन !
    सिर्फ़ कुछ खोकर ही _ बहुत कुछ खोने के दुःख से बचा जा सकता है.
    कोई चीज अजीब तब तक है जब तक हम उसे अजीब समझें… नही तो !
    बुद्धिमान के पास परेशानी नही प्लान होता है जिससे वह सफल होता है.
    आप जिसे बल से नहीं हरा सकते, उसे बुद्धि से अवश्य हरा सकते हो !!
    शांत मन से लिया गया हर निर्णय,_ आप को सही परिणाम देता है !
    बात बस नज़रिये की है ; काफी अकेला हूँ, _ या अकेला काफी हूँ..
    जिसका उदय होना निश्चित है, उसके लिए प्रकृति भी रास्ता बना देती है.
    *हमारे बारे में वो लोग ज्यादा जानते हैं*, *जिने हम खुद भी नही जानते*
    देर लगती है मगर समझ आ जाता है, _ कौन कैसा है नज़र आ जाता है ..
    समस्याओं पर मानसिक बहस करने की बजाय समाधान पर जोर दीजिए.
    अगर आप सदैव दुःखी रहते हैं तो _ वह दुःख आपका चुना हुआ होता है.
    खोई हुई चीज़ को याद मत करो और जो मिला है ” उसे बर्बाद मत करो “
    अगर आपके ख्वाब बड़े हैं तो _ आपके संघर्ष कैसे छोटे हो सकते हैं.
    मनुष्य को अपने ऊपर ही विश्वास नहीं है कि वह सुखी जीवन जी लेगा.
    दूसरों पर निर्भर रहना बंद करें, _ आत्म – विश्वसनीय होना शुरू करें !
    अपने बीते हुए कल को_ _ अपने आज का ज्यादा समय न लेने दें.
    लोगों को अपनी योजना न बताएं, _ उन्हें अपने परिणाम दिखाएं.
    लोग जलते रहेंगे आग की तरह, _ तुम खिलते रहो गुलाब की तरह..
    ” मूर्ख बुद्धिमान व्यक्ति की बंधी हुई गांठ को नहीं खोल सकता “
    भविष्य उनका है _ जो अपने सपनों की सुंदरता में विश्वास करते हैं.
    ग़म ख़ुशी साथ साथ रहते हैं, _ हमको हर हाल ये समझना है !
    वे अड़े रहे नफरत करने में, _ हम ध्यान दे रहे हैं आसमान छूने में !
    लहजे कितनी देर तक मीठे रखने हैं, _ ये जरुरत तय करती है .!!
    ढूंढो तो सुकून सिर्फ खुद में है, _ दूसरों में सिर्फ उलझने मिलेंगी …
    रास्ता एक बार भूलने की बजाए, _ दो बार पूछकर चलना बेहतर है..
    अन्तरदृष्टि रखने वाले व्यक्ति को, _ अपनी कीमत मालूम होती है.
    अपनी औकात हम खुद तय करते हैं, _ लोग तो सिर्फ़ हमें बताते हैं.
    किसी को बर्बाद करने की सोच _ आप की बर्बादी के लिए काफी है..
    बुरे से बुरा क्या हो जायेगा _ चलो जो भी होगा _ देखा जायेगा..
    किसी व्यक्ति को उसके उत्तरों के बजाय उसके प्रश्नों से आंकें..
    साथ ठहरना भी आना चाहिए, चलने के लिए तो सब तैयार हैं.
    संघर्ष जितना बड़ा होगा, _ समझदारी उतनी ही बेहतर होगी.
    जिंदगी चैन से गुज़र जाए, अगर कुछ बातें ज़हन से उतर जाए..
    खफा हैं सब मेरे लहजे से, पर मेरे हाल से वाकिफ़ कोई नहीं !
    जीत कर हम वो नहीं सीख सकते, जो हार कर सिख जाते हैं..
    मंज़िल को ख़बर ही नहीं, सफ़र ने क्या क्या छीना है हमसे…
    जिसे हम स्वीकार कर लेते हैं, उसके हम ” पार ” हो जाते हैं.
    लोगों के मुंह बंद करने से अच्छा है, अपने कान बंद कर लो.
    “बल का प्रयोग करने वाला व्यक्ति तर्क करने से डरता है” !!
    सकून में इसलिए हूं क्योंकि, धोखा खाया कभी दिया नहीं ..
    मज़बूत किरदार के लोग, शिकायतें नहीं फैसला करते हैं..
    अच्छा जरूर बनें मगर, साबित करने की कोशिश ना करें.
    परेशानी हालात से कम _ ख्यालात से ज्यादा होती है !
    जिनकी सबसे बनती है.. वो भरोसे लायक नहीं होते !!!
    गलत लोगों से नजदीकी….कम ही रखनी चाहिए..
    मतलबी लोगों से फासले ही ठीक रहते हैं ..!!
    दुनिया की सबसे बड़ी संपत्ति आपकी मानसिकता है.
    जो हम सोच सकते हैं, _ वह हम कर भी सकते हैं.
    बड़ी मंज़िल के राहगीर, _ छोटे दिल नहीं रखते .!
    दूसरों को महंगा करोगे तो खुद सस्ते हो जाओगे…
    दुनिया चुप रहती कब है, कहने दो जो कहती है !
    ज्यादा बात करने वाले कुछ नहीं कर पाते _ और कुछ कर दिखाने वाले ज्यादा बात नहीं करते !!
    अपने आप कुछ नहीं होगा, _ जीतने के लिए आपको थोड़ा तो लड़ना पड़ेगा..
    कुछ चीजें पैसो से नहीं मिलती और मुझे उन्हीं चीजों का शौक है..
    बातें मैं बहुत करता हूँ, _ मगर बहुत कम लोगों से..

    • ” लोगो से कम बात करो और सुखी रहो. “
    जिंदगी काटने को निकले थे, _ जिंदगी काट खा गई हमको ..
    शरारत करो साजिशें नहीं, _ हम शरीफ हैँ पर उतने नहीं .!
    बहुत कुछ हासिल करने में, _ कितना कुछ छूट जाता है..
    मजबूरी की स्थिति आने से पहले परिवर्तन कर लो ..
    ” शौक पूरे होने चाहिए लेकिन खुद के पैसे से “
    जल्दबाज़ी बंद करो, _ धैर्य रखना शुरू करें !
    कर्म वो करो जो करना ही फल लगे..

    Quotes by आचार्य प्रशांत

    अध्यात्म सबसे ऊँची कामना की बात है: _ “चाहेंगे, मगर जो उच्चतम है सिर्फ़ उसको !”

    औसत इच्छाओं में ही जीवन लगाना हो तो _ अध्यात्म में समय व्यर्थ न करें.

    जिसे प्यास लगती है, पानी उसे उपलब्ध होना शुरू हो जाता है ;

    _ भौतिक जीवन में भले ऐसा न होता हो, पर अध्यात्म में ये जादू सदा होता है.

    ” अध्यात्म पलायन नहीं ” केवल अँधेरे और अज्ञान को त्यागना है, और कुछ नहीं..
    आध्यात्मिकता, अनावश्यक को ख़त्म करने का अनुशासन है.
    तुम दुनिया को समझने लगो और दुनिया को तुम समझ में आना बंद हो जाओ ;

    _ तो जान लेना कि _ ज़िन्दगी सही दिशा में जा रही है..!

    दुनिया कितनी भी रंगीन हो, उसका इस्तेमाल पुल की तरह ही करना _

    _ पुल से गुजर जाते हैं, पुल पर घर नहीं बनाते..

    जिसकी ख़ातिर दुनिया की हज़ार ठोकरें सहीं,

    आँख बंद करी तो पाया मुझे उसकी ज़रूरत नहीं.

    जब आप ही वो नहीं रहेंगे, जो आप हुआ करते थे,

    _ तो संसार आपके साथ _ वो कैसे कर लेगा _ जो किया करता था ?

    जिस दिन अपना कद शरीर की ऊंचाई से नहीं, बल्कि मन की गहराई से नापने लगो –

    – उस दिन समझ लेना – बड़े हो गए.

    दुःख जीवन में अनिवार्य नहीं है, तुम बेवकूफ़ बन रहे हो, और तुम बेवकूफ़ इसलिए बन रहे हो,

    क्योंकि तुम्हारे चारों ओर लोग ऐसे हैं, जिन्होंने जीवन व्यर्थ जगहों पर ही बिताया है.

    दिन ऐसा बिताओ कि रात को बिलकुल पड़ो और सो जाओ.

    _ खाली करो अपने आपको, _ हर दृष्टि से स्वस्थ रहोगे – शारीरिक दृष्टि से भी, क्योंकि श्रम किया,

    और मानसिक दृष्टि से भी, क्योंकि कोई बोझ नहीं बचाया अपने ऊपर.

    जब भी कभी कोई बहुत हावी हो रहा हो आपके ऊपर,

    कोई परिस्थिति, कोई व्यक्ति, कोई विचार, या कुछ भी, तो उससे लड़िए मत.

    _ अपने मन को तलाशिए, उसमें ऐसा क्या है ; जिसका उपयोग करके वो व्यक्ति आपको नचा रहा है ?

    तुम जितने ऊँचे उठते जाओगे _ दुनिया को देखने का _ तुम्हारा नजरिया _ उतना ही साफ़ होता जाएगा.
    जो स्वयं शांत हो जाता है, वो बिलकुल समझ जाता है कि, _ बाहर क्या- क्या अशांति चल रही है.
    जब तुम्हें कुछ पता ही ना हो, और तुम्हारे साथ बहुत कुछ हो रहा हो _ वही बेहोशी है.
    शांति बहुत बड़ी चीज़ होती है, _ उसके लिए जितना झुकना पड़े _ झुक जाना.
    जीवन तुम्हारा ऐसा हो कि _ दूसरों के मन में तुम पर हावी होने का ख़्याल ही ना आए.
    ” ख़ुद जानो ख़ुद समझो ” – और फ़िर उससे एक सुंदर व्यवस्था निकलेगी _ उस पर जियो !
    दुनिया को भी अगर बारीकी से देख लिया तो, अपने आप को भी समझ जाओगे.
    कहीं हमारे पहुँचने से पहले देर न हो जाये, _ और हम पूरी जिंदगी पछतायें..
    सही चुनाव कर लो, उसके बाद _ ताक़त जहाँ से आनी होगी, आएगी..
    ‘दूर बैठ कर ताली बजाना आसान है, _ पास आकर साथ देना मुश्किल !
    आपकी तकलीफें आपसे दूर नहीं हो सकती _ आप अपनी तकलीफों से दूर हो सकते हैं.
    दुनिया की समझ इसलिये होनी चाहिये ताकि तुम दुनिया में ही फंस कर न रह जाओ.
    कुछ चीजें छोड़ी इसलिए जाती हैं, _ ताकि उससे बेहतर कुछ पाया जा सके.
    चीजों को कीमत देते- देते हम ज़िंदगी को कीमत देना भूल जाते हैं.
    नया जानकर _ तुम पुरानी ज़िंदगी में वापस कैसे चले जाते हो ?
    न सुख की आशा, न दुख का डर _ जो सही है वो चुपचाप कर..
    जिसने अपने खर्चे बढ़ा लिए, _ उसे तो ग़ुलाम होना ही पड़ेगा…
    खुद जग जाओ, _ नहीं तो ज़िन्दगी पीट कर जगाती है.
    मज़े के ख़िलाफ़ नहीं हूँ मैं, _ छोटे मज़े के ख़िलाफ़ हूँ..
    जागे हुए आदमी का जिंदगी स्वयं साथ देती है.
    वाकई दुखी होते हम, _ तो दुख छोड़ न देते ?
    ” तुम गलत राहों को ठुकरा कर तो देखो “
    बातें आज़ादी की और मोह कटघरे से ?
    आज़ादी उनके लिए है _ जिनमे ज़िद है.
    संसार नहीं किसी को हराने आता है, तुम्हारी आंतरिक दुर्बलताएँ हराती हैं तुमको.
    दुख हमे संसार ने नही दिये है, हमारे दुख हमारे अज्ञान का अंजाम है.
    न अच्छा है न बुरा है संसार, समझ गए तो रास्ता न समझे तो दीवार.
    चाँद की तरह शीतल होना हो तो _ पहले सूरज की तरह जलना सीखो..
    ख़ुद जितना साफ़ रहोगे _ दूसरे को भी उतना _ कम गन्दा करोगे.
    जग को साफ़ जानने के लिए _ मन साफ़ करो.
    साधना माने सफाई __ जीवन से कचरा बाहर करो.
    साहसी मन समस्या को नहीं, स्वयं को सुलझाता है.
    समाधान समस्या में ही छुपा होता है.
    इतना गंभीर मत बनो, कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है.
    ज्ञान बहुतों को मिलता है, काम किसी – किसी के आता है.
    ज्ञान आजादी देता है.
    जब सच्चाई कभी हार नहीं सकती _ तो तुम्हारी आँखों में इतनी मजबूरी क्यों है ?
    संसार जो दुःख देता है, तुम उसको चुनोगे, तो वो दुःख क्रमशः बढ़ता ही जाएगा, _ _ और वो तुम्हें अपनी गिरफ़्त में और लेता जाएगा।

    सच्चाई तुम्हें जो दुःख देती है, उसको चुनोगे, तो धीरे-धीरे दुःख कम होता जाएगा, _ _ दुःख से मुक्त होते जाओगे।

    तुम सच की परवाह कर लो _ सच तुम्हारी परवाह कर लेगा

    अगर जीवन तुम्हारा साथ नहीं दे रहा है _ तो तुमने ज़रूर कहीं सच का साथ छोड़ा है

    तुम सच के हो जाओ _ जीवन तुम्हारा हो जाएगा

    सत्य से प्रेम है तो सत्य खुद बता देता है, __ उस तक कैसे पहुंचना है.
    सच में जीना हल्की बात नहीं होती, कीमत तो अदा करनी ही पड़ती है.

    ” सच सस्ता होता तो सभी सच में जी रहे होते “

    तुम्हारा जन्म दूसरों से अपनी तुलना करने के लिए नहीं हुआ है,

    _ तुम्हारा जन्म अपनी सच्चाई को अभिव्यक्ति देने के लिए हुआ है.

    सच और इंसान का वही नाता है जो पानी और मछली का।

    वो तुम्हें ललचाएँगे, पर तुम बाहर मत आना।

    मछली तो पानी बिन जान दे देती है।

    कैसा है इंसान जो सच बिना जिए जाता है !

    जिस चीज को भूलना चाहोगे, वो और याद आएगी.

    जिसे भूलना हो, _ उससे बड़ी किसी चीज़ को लगातार याद रखो..

    छोटी चीज अपने आप भूल जाओगे…

    कभी रंग_ कभी धूप_ कभी धूमिल_ मैदान है,

    बदलते मौसमों में भी_ आसमान तो आसमान है..

    दूर, _ जितनी भी दूर तुम देख सकते हो,

    हमेशा याद रखना __ उसके आगे भी मंज़िलें हैं..

    तैरना आता है तो यही पानी पार लगा देगा _

    तैरना नहीं आता तो यही पानी जान ले लेगा,

    पानी न अच्छा है न बुरा _ ज़िन्दगी की धारा को दोष मत दो – ” तैरना सीखो “

    जितनी बार उचित दिशा में क़दम उठाओगे, आगे की राह और आसान हो जाएगी.

    तुम्हारा हर क़दम निर्धारित कर रहा है कि अगला क़दम आसान पड़ेगा या मुश्किल.

    हर कदम तुम्हें बदल देता है _ अगले कदम पर तुम तुम नहीं रहोगे., इसीलिए आगे के क़दमों की कल्पना या चिंता करना व्यर्थ है

    _ तुम बस अभी जहाँ हो वहाँ से उठते एक कदम की सुध लो.

    अगर रोशनी की तरफ चल रहे हो तो, हर कदम के साथ उजाला बढता जायेगा,

    तो हर कदम से अगले कदम की हिम्मत मिलेगी, तुम कदम तो बढाओ.

    तुम्हें एक क्षण नहीं लगेगा नकली को नकली जान लेने में, _ अगर तुम असली हो गए.

    जिसने अपने आपको धोखा देना बंद कर दिया, _ अब संसार उसे धोखा नहीं दे पाएगा.

    जो दूसरों से धोखा खाना न चाहते हों, _ वो सबसे पहले अपने आपको धोखा देना बंद करें.

    सच जानना है यदि दुनिया का _ तो सीधा तरीका है, ” तुम सच्चे हो जाओ “

    जो सच्चा है वो तुम्हारे साथ चल देगा _ जो झूठा है, वो अपने आप बिदक जाएगा.

    ” शरीर की उम्र नहीं, चेतना का स्तर देखो “_ और इससे निर्णय करो कि

    कौन है _ जिसकी बात सुननी है, _कौन है _ जिसकी बात नहीं सुननी है.

    सच्चा दोस्त तुम्हें तुम्हारे करीब ले आता है,

    नकली दोस्त तुम्हें तुमसे दूर ले जाता है.

    साथ चलने वाला राह दिखा भी सकता है, और राह भटका भी सकता है ;

    साथी संभल के चुनना, भाई !

    अपने स्वयं के जीवन का निरीछण करें, फिर आप सत्य को पहचान पाएंगे.
    जीवन को ऊँचे से ऊँचा लछ्य दीजिए, मन को सार्थक काम से भर दीजिए,

    मन में कचरे के लिए जगह बचेगी ही नहीं.

    छोटे काम पर तो छोटी निराशा भी हावी हो जाती है,

    बड़े काम पर कोई छोटी निराशा हावी नहीं हो सकती.

    जो छोटी बातों में खो गया, वो छोटा ही हो गया,

    बड़ा याद हो जिसको, छोटे की चिंता नहीं उसको.

    जिसको चाहिए होती है उसको ऊँचाई मिल जाती है,

    तुम्हें मिली नहीं क्योंकि तुम्हें चाहिए नहीं थी.

    जिन्हें ऊपर उठना है, वो ऊपर उठने का बहाना ढूँढ लेते हैं,

    जिन्हें ऊपर नहीं उठना _ उन्हें हिमालय की ऊँचाइयों पर भी गन्दगी दिख जाती है.

    जिसके पास कुछ बड़ा नहीं होगा, ये उसकी सज़ा है_

    _ वो हर छोटी चीज़ को बहुत बड़ी समस्या बना लेगा.

    तुम्हारी समस्या ये नहीं है कि कुछ सुलझता नहीं, सुलझ तो सौ बार जाता है.

    तुम मुझे ये बताओ, सुलझी चीजों को _ उलझाते क्यों हो सौ बार ?

    क्यों उठे हो आज सुबह –

    पिछला दिन दोहराने के लिए, _ या नया दिन लाने के लिए ?

    यही कर्तव्य है आपका – कि जब दस लोग मूर्खता कर रहे हों, तो उनके साथ आप मूर्खता न करें.

    आप उनके दबाव में उनके जैसे न बन जाऍं, तो उनके सुधरने की भी संभावना बढ़ जाती है.

    जो अपनी जिंदगी में संतुष्ट नहीं है, _ वही दूसरों की जिंदगी में ताक झाँक करता है.
    जीने का मजा तब आता है, जब एक बहुत उंचा मकसद तुम्हारी जिंदगी पर छा जाता है.
    ज़िंदगी की सबसे बड़ी बर्बादी है, _ छोटी – छोटी बातों में फँस जाना.
    शून्यता का मतलब है खुद से मुक्त होना, और जहां शून्यता है वहां परमात्मा है.
    कितना कुछ बोलती हैं ये चुप्पियाँ !

    पर किसी की चुप सुनने के लिए _ तुम चुप होने को तैयार भी हो ?

    बोलने लायक हो कुछ तो ही बोलो, _ नहीं तो मौन बहुत सुंदर है.
    त्याग की यही परिभाषा है : जो बैचैन करता हो ” छोड़ो “
    तड़पते हुए मन को शान्ति मिले _ _ यही एकमात्र धर्म है.
    तुम्हारा हर काम कैसा होता है ?_  जैसे तुम होते हो.
    हमारे कष्ट ही प्रमाण हैं _ हमारे भ्रमित होने का.
    ज़रा सीधा होकर जीना है, ज़रा सरल, ज़रा भोला रहकर जीना है, _ होशियारी थोड़ी कम !
    सीधे रहो, सरल रहो __ सिर्फ़ चालाक आदमी ही चालाकी का शिकार बनता है.
    तुम्हारी चालाकी ही तुम्हारा बंधन है ; जो सरल है वो स्वतंत्र है.
    चालाकी का जवाब, चालाकी नहीं, _ समझदारी है.
    उसने कहा तो कहा, तुमने सुना क्यों ! दूसरों से प्रभावित क्यों हो जाते हो ?
    ” जीवन एक रंगमंच है ” इसमें अपना किरदार समझदारी से निभायें.
    जिन्हें आगे बढ़ना हो, वो वापस लौटने के रास्ते बंद करें.
    जो उचित है वो करो, अंजाम की परवाह छोड़ो.
    मंज़िल से अगर प्यार हो, तो अनजाने रास्ते भी अपने हो जाते हैं.
    मंज़िल से प्यार हो तो_ रास्ता प्यारा हो जाता है.
    सही मार्ग जाना है तो खतरा उठाना है.
    एक जिंदगी है__ दबे- दबे जीने मे क्या मजा है.
    न चिंता न चाहत, तुम्हारा स्वभाव है ” बादशाहत “
    जिसे पाने का लालच नहीं, उसे छिनने का डर भी नहीं.
    जब भीतर गहराई रहती है, तो मन में लहरें कम उठती हैं.
    चोट शब्दो से नहीं, उम्मीदों से लगती है.
    उम्मीद छोड़ो, काबिलियत बढाओ.
    सही काम चुनिये, डूब के करिये.
    आकर्षक तो बहुत चीजें लगती हैं, बात आकर्षण की नहीं _ अंजाम की है.
    सही काम के लिए जो भी युक्ति करनी पड़े, जितना भी श्रम करना पड़े कम है.
    इतनी मेहनत से लड़ो, इतनी मेहनत से खेलो, कि नतीजे से फ़र्क ही न पड़े.
    ढलान पर तो पत्थर भी लुढ़क लेता है, _ ऊंचाई पर जाने के लिए मेहनत चाहिए.
    तुम्हारी दिशा ठीक होनी चाहिये, लोग साथ दें तो ठीक, ना दें तो ठीक.
    करिए, कर डालिये ! काम यदि सही है तो हिचक कैसी ? समझ कर भी सोचते रहना ईमानदारी नहीं..
    जब सीने मे सच्चाई रहती है तो छाती खुद ही चौड़ी रहती है.
    किसी को मत बताओ तुम्हे करना क्या है, उसे कर के दिखाओ.
    अभी को साधो, कल अपने आप ठीक हो जायेगा.
    पुराने रास्तो पर चलते हुए, नयी मंजिल पर कैसे पहुंच जाओगे !
    कुछ सफर ऐसे होते हैं, जिनमे सिर्फ रास्ता ही हमसफर हो सकता है.
    जब दूसरे का हित, अपने सुख से अधिक कीमती लगे, _ तब सुख शुद्ध होकर आनंद कहलाता है.
    दुख के न होने में आनंद नहीं है, _ दुख से न हारने में आनंद है.
    आनंद है _ दुख और सुख – दोनों के तनाव से मुक्ति..
    तुम्हारे साथ हो वही रहा है, जो तुमने तय किया है.
    कोई भी कीमती चीज़ मुफ़्त नहीं मिलती, पात्रता दर्शानी पड़ती है.
    हार हो जाये कोइ बात नहीं, हौशला नहीं टूटना चाहिए.
    हार के भी जिसका कुछ न बिगड़े, _ सिर्फ़ उसी की जीत है.
    खेल तो चलता रहेगा, लेकिन खेल कौन रहा, जीवन तुमसे या तुम जीवन से.
    बहुत सारी बातो से डरते हो, लेकिन जीवन के बेकार चले जाने से क्यू नही डरते हो.
    समय डर कर बीता दिया, तुमने अपना क्या बचा लिया.
    कायर, तुम मरने के लिए तैयार हो, लेकिन जीने के लिए नहीं..
    मनुष्य जीना ही तब शुरु करता है, जब वो डरा हुआ नही होता है.
    हम डरे हुये है की हमारा कुछ बुरा न हो जाये, पर डर से बुरा और क्या होगा.
    न डरना है _ न डूबना है _ नदिया बीच गुज़रकर _ नदिया पार उतरना है.
    अगर परेशान रहते हो तो पक्का है कि, जीवन जीने के तरीके में कोइ भूल है.
    दुख से बचने के लिये जिसकी तरफ भाग रहे हो, वो और भी बड़ा दुख है.
    मन की चंचलता कोइ समस्या नही है, तुम स्थिर नही हो ये समस्या है.
    अगर अपने मर्जी से ही चल रहे हो, तो रुक कर दिखाओ.
    जब दुख परेशान करे तो दुख से कहो, सुख तो टिका नही, तु क्या टिकेगा.
    मुझे मत बताओ की तुम्हे पता क्या है, मुझे दिखाओ तुम जी कैसे रहे हो.
    देने वाला तो दे ही रहा है, जिन्हें न मिल रहा हो_ वो पुछे,_मेरी नियत है क्या..
    जिसने आफतो मे मजा लेना सीख लिया है, वही इस जन्म का आनंद उठा पाता है.
    प्रेम मे वादों की कोइ किमत नहीं, प्रेम में वे वादे भी निभ जाते हैं, जो किये ही नहीं.
    दूसरों की ओर देखना बंद करो, प्रेम तुम्हारी आन्तरिक पूर्णता है.
    प्रेम का नियम है : चाहे मिला हो, न मिला हो, बाँटना पड़ेगा.
    मन की बैचेनी का चैन के प्रति खिंचाव ही प्रेम है.
    प्रेम का अर्थ ये नहीं होता कि मेरे तुम्हारे विचार मिलते हैं,

    प्रेम का अर्थ होता है कि मैं तुम्हारे हित के लिए उत्सुक हूँ, आतुर हूँ !

    लोग कहते हैं, सच्चा प्यार मिलता नहीं ;

    मैं कहता हूँ, सच्चा प्यार तुमसे बर्दाश्त होता नहीं.

    आज मौका है जग जाओ, एक दिन ऐसा आएगा, जब आप चाह कर भी नही जग पायेंगे.
    भटकना तुम्हारी नियति नही, तुम्हारा चुनाव है.
    जब कोइ गलती करो तो उसे स्वीकारो ” गलती से तो आजाद हो जाओगे “

    नही तो वही गलती फिर दोहराओगे.

    उन गलतियों की कोई माफ़ी नहीं है जहाँ आप जानते हैं कि क्या सही है और क्या गलत लेकिन जानते – बूझते गलत को चुनें.

    फैसले की घड़ी कुछ देर की चुनौती होती है, _ लालच-डर-वासना ये उस समय ज़ोरदार हमला करते हैं, _

    _ इनका वार बस उस एक घड़ी बर्दाश्त कर जाओ तो लंबे समय चैन से जियोगे.

    जब मन में लालच और डर होता है, तो वो चीज़ें जिनकी कोई कीमत नहीं, कोई हैसियत नहीं,

    वो भी तुम पर हावी हो जाती है.

    अपने लिए क्या जीना ? अपने लिए क्या लिखना ?

    तुम्हारे लिए लिखता हूँ, तुम पढ़ोगे या नहीं – न जानता हूँ _ न जानना है.

    किसको तुम ना कहते हो, किसको तुम हाँ कहते हो,

    इसी से तुम्हारी जिंदगी तय होती है.

    जिगर चाहिए, हौसला चाहिए, भीतर ज़रा आग चाहिए

    किसी की हिम्मत नहीं होनी चाहिए ” तुमसे फालतू बात करने की “

    तुम्हारे अलावा कौन है जो तुम्हें हरा सके ?

    किसी और से कभी कहाँ हारे हो तुम !

    मन जहाँ जाता हो उसे जाने दो, क्योंकि

    मन से लडाई करके आजतक, ना तो कोई जीता है ना जीत सकता है.

    वो दूसरा नहीं, वो तुम हो, जब दूसरों सी ज़िन्दगी बिता रहे हो, तो अंजाम भी तुम्हारा दूसरों सा ही होगा.

    जिन्हें अपना अंजाम बदलना हो, वो अपनी ज़िन्दगी बदलें..

    निंदा के लायक शायद बहुत लोग हैं, पर निंदा करना अपना ही समय ख़राब करना है न ?

    जितनी देर बुराई करी उतनी देर में कुछ सार्थक ही कर लिया होता,

    कुछ सुंदर ही कर लिया होता, तो तुम्हारा दिन कितना अलग होता _ कभी सोचना !

    पानी को मथ कर घी निकालने की कोशिश कर रहे हो ?

    प्रयास न करने से भी घातक है _ गलत जगह पर बार बार प्रयास करना.

    हम कीचड़ में लोटने का लुत्फ़ उठाते हैं, और फिर अपनी भद्दी शक्ल का इल्ज़ाम

    रो कर, चिल्ला कर औरों पर लगाते हैं ” अजीब हैं हम ! “

    घोर संघर्ष के बीच यदि चैन नहीं, तो कहीं नहीं ; _ संघर्षों के खत्म होने की प्रतीछा मत करो,

    संघर्ष कभी खत्म नहीं होते – – संघर्षों के मध्य ही चैन सीखो

    ज़िन्दगी का तो मतलब ही है कठिनाई _ सही कठिनाई चुनो, सही कष्ट चुनो.
    परिपक्व आदमी का पहला लछण है – – अकेले चल पाने से डर ना लगना.
    किसी की मदद करने में जितना प्रेम चाहिए, उतनी ही सावधानी भी। आपका दायित्व है कि उसे शीघ्रतिशीघ्र इस क़ाबिल बना दें कि उसे आपकी मदद की ज़रूरत रहे ही नहीं।

    मददगार की तरह किसी के जीवन में बने ही न रहें। देखें कि कितनी जल्दी आप स्वयं को अनावश्यक बना सकते हैं। यही असली मदद है।

    जितना ज़रूरी है कमज़ोर को सुरक्षा देना, _ उतना ही ज़रूरी है उसको सुरक्षा न देना जो कमज़ोर नहीं है।

    क्योंकि जो कमज़ोर नहीं है अगर तुमने उसे सुरक्षा दे दी, _ तो वो कमज़ोर हो जाएगा।

    सही जगह पर जितना समय गुज़ारोगे, अशांत जगह पर वक़्त गुज़ारना उतना मुश्किल होने लगेगा _ तुम्हारे लिए ..
    तुम जहाँ भी समय लगा रहे हो, _ चलो लगा दो. _ हम तो बस एक ही सवाल पूछेंगे,

    _ वो समय जहाँ लगाया, _ वहाँ शांति मिली या नहीं मिली ?

    कोई भी चीज़ इस संसार की _ इतनी कीमती नहीं _ कि उसके लिए _ अपनी आत्यंतिक शांति को _ दाँव पर लगा दें.
    दुःख का असर तुम पर होता है, लेकिन तुम्हारा एक कोना ऐसा है _ जहाँ दुःख नहीं पहुँच सकता.

    ” उस कोने को याद रखो बस “

    न रुतबे न ताकत न महलो – मकान के लिए, _ तुम्हारे भीतर है कोई तड़पता _

    _ पंख और उड़ान के लिए _ मुट्ठी भर आसमान के लिए..

    ” ऊँचे लोगों की संगति हमेशा नहीं मिलती ” अगर उनके सामने नहीं बैठ सकते,

    तो उनके शब्दों के साथ बैठ लो ” संगति ही सबकुछ है “

    सारी ज़िंदगी, सारी किस्मत, तुम्हारी इसी बात से तय हो जाती है कि

    तुमने किसको अपना आदर्श बना लिया और किसकी संगति स्वीकार कर ली.

    ” जितने अँधेरे में तुम जीओगे, उतने तुम्हारे पास सपने होंगे ” ज़रा प्रकाश तो जलाओ, हक़ीक़त देखो_

    फिर बताना मुझे कि _ क्या मन अभी – भी इधर- उधर भटकता है.

    व्यक्ति भी वही भला है, जिसकी संगति में तुम मौन हो सको। जान लो कि कौन तुम्हारा मित्र है, कौन नहीं ।

    जिसकी संगति में तुम मौन हो सको, वो तुम्हारा दोस्त । और जिसकी संगति में तुम अशांत हो जाओ, वो तुम्हारा दुश्मन है।

    —— सावधानी से चाहना, क्योंकि जिसे चाहोगे वैसे ही हो जाओगे. ——

    मुझसे अगर कुछ सीखना चाहते हो, तो यही सीखो कि जीवन में बड़े विवेक से और बड़ी निष्कामना से सही लक्ष्य बनाना है, और फिर उसमें आकंठ डूब जाना है।

    मेहनत अपने-आप हो जाती है, गिननी नहीं पड़ती.

    ठीक वैसे ही जैसे बैडमिंटन खेलो तो स्कोर गिनते हो, कैलोरी तो नहीं न ? कैलोरी अपने-आप घट जाती है. इधर स्कोर बढ़ रहा है, उधर कैलोरी घट रही है.

    पीछे-पीछे जो होना है वो चुपचाप हो रहा है, वैसा ही जीवन होना चाहिए.

    तुम वो करो जो आवश्यक है, उससे तुम्हारा जो लाभ होना है वो पीछे-पीछे चुपचाप हो जाएगा; तुम्हें वो लाभ गिनना नहीं पड़ेगा.

    ” ऐसे जियो कि जैसे खेल हो, जान लो की खेल है, फिर जान लगाकर खेलो ? “

    उम्मीद मत रखो, सिर झुका कर चुपचाप काम करो, _

    _ अच्छा परिणाम आ जाए, बहुत अच्छी बात है ..

    सही निर्णय ही सही जीवन का आधार होते हैं.

    निरन्तर सत्य को चुनने का कोई विकल्प नहीं होता.

    अगर जीवन को सरल, सहज, शांत बनाना है, _ तो हर कदम, जो सही है उसे चुनना होगा.

    मन डरेगा . . . आलस रोकेगा, _ लेकिन हिम्मत कर, सही निर्णय लेना होगा..

    जो पाने पर जितना खुश होता है वो छिनने पर उतना दुखी होगा.

    मिलना हो कि बिछड़ना, पाना हो कि गँवाना, एक से रहो.

    मानो खेल हो, _ जीते तो बस हल्के से मुस्कुरा दिए और हारे तो भी बस मुस्कुरा दिए, बात खत्म !

    जो उत्तेजित बहुत होते हैं वही फिर अवसाद में जाते हैं.

    हम उतने ज़रूरी नहीं हैं जितना हमने अपने – आपको बना रखा है,

    आपसे पहले भी दुनिया थी, आपके बाद भी दुनिया रहेगी _

    _ ” किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ना है “

    सही काम के लिए मौका मिलता नहीं, जीवन से छीनना पड़ता है.

    छीनने का बल दिखाएं _ ” यही शक्ति है “

    मन में, या जीवन में, जो कुछ भी चल रहा है, उसे समझने पर ज़ोर दो ;

    पसंद – नापसंद बाद में देखी जाएगी.

    कुछ नया लाना है, कुछ बेहतर बनाना है,

    कल अच्छा था या बुरा था, उस पर नहीं रुक जाना है,

    यात्रा को ही जन्म लेते हैं, यात्री को चलते जाना है

    मेहनत से कल बनाया था, मेहनत से आज बनाना है,

    मंज़िल आई बीत गयी, अब आगे कदम बढ़ाना है.

    उदास होते हो तो _ दूसरों की वजह से,

    उत्तेजित होते हो तो _ दूसरों की वजह से,

    ऊबते हो तो _ दूसरों की वजह से,

    आकांछा है तो _ दूसरों की,

    और डर है तो _ दूसरों से,

    ” सब कुछ तो दूसरों का ही है “

    नज़र साफ़ होने लगी हो, बेहतर दिखाई देने लगा हो, तो जान लो कि रोशनी की तरफ बढ़ रहे हो.

    जो बातें पहले उलझी-उलझी थीं, अगर वो अब सरल और सुलझी हुई हो गई हैं, तो जान लो कि रोशनी की तरफ़ बढ़ रहे हो.

    और उलझनें यदि यथावत हैं, तो जान लो कि अँधेरा कायम है.

    आचार्य जी, मन का माहौल बढ़िया कैसे रखें ?

    ➖✨➖✨➖✨➖

    मन का माहौल बढ़िया रखने का एक ही तरीका है

    मन को किसी ऊँचे-से-ऊँचे कार्य में लगा दीजिए।

    मन का मौसम उतना ही सुहाना रहेगा,

    जितना सुहाना मन का लक्ष्य।

    मन का लक्ष्य ही अगर सुंदर नहीं है,

    तो मन की हालत सुंदर नहीं हो सकती।

    मन का लक्ष्य अगर होगा—नोट और सिक्के।

    तो मन भी वैसा ही होगा सिक्के जैसा, नोट जैसा।

    फाड़ो तो फट जाए और गिराओ तो टन-टन-टन-टन करे !

    मन का लक्ष्य होगा अगर बड़ी-बड़ी इमारतें

    और घर और फैक्ट्रियाँ,

    तो मन भी फिर ईंट-पत्थर जैसा होगा।

    खुरदुरा, शुष्क, रुखा और टूटने को तैयार

    कि ईंट पटक दी और टूट गई।

    मन भी ऐसा ही होगा खट से टूट गया।

    मन का जैसा लक्ष्य मन की वैसी हालत।

    मन कमज़ोर लगता हो अगर, तो जान लीजिए

    मन ने लक्ष्य ही कमज़ोर बना रखे हैं।

    जीवन में, जो भी आप की परिस्थितियों में,

    उच्चतम लक्ष्य संभव हो उसको रखिए

    और आगे, और आगे बढ़ते जाइए,

    जीवन इसीलिए है।

    छोटी-छोटी चीज़ों में उलझे रहेंगे,

    तो ‘मन’ भी छोटा हो जाएगा। ➖➖➖➖

    मन चंगा रखिए, जीवन अपनेआप चंगा रहेगा !

    सीखा बहुत कम है, तालीम है अधूरी _ इस घने जंगल में आदमजात चाहता हूँ ||
    मुझे बात करने से रोकते हो तुम, _ तुम बात कर सको यही बात चाहता हूँ ||

    My Favourites – मुझे जिंदा रहने दिया जाए ! – 2020

    जिस तरह आप किसी मामूली चीज़ को हासिल करने के लिए कोई कीमती चीज़ जाया नहीं करते,

    उसी तरह दुनिया के पीछे अपनी अहमियत को ज़ाया न करो…

    ” यदि आप निराश है तो आप अतीत में रह रहे हैं,

    अगर आप चिंतित है तो आप भविष्य में रह रहे हैं, _ यदि आप शांतचित है तो ही आप वर्तमान में रह रहे हैं !”

    हर वह चीज जो आप से किसी भी रूप में जुडती है वह आपको कुछ न कुछ सिख अवश्य देती है,

    यह आपके ऊपर है कि आप किस चीज से क्या सीखते एवं समझते हैं.

    ज़िन्दगी के 3 आसान नियम- 1. जो आप चाहते हो उसके पीछे नहीं भागोगे तो मंज़िल नहीं मिलेगी.

    2. अगर आप कभी पूछोगे नहीं तो जवाब हमेशा “ना” ही रहेगा.

    3. अगर आगे नहीं बढ़ोगे तो जहाँ थे, वहीँ रह जाओगे !!

    हमारे जीवन में, एक समय ऐसा भी आता है _ जब हमे ये तय करना बहुत जरूरी हो जाता है कि…

    अब पन्ने पलटना है या किताब बन्द करना है.

    मुझमें और किस्मत में हर बार बस यही जंग रही,

    मैं उसके फैसलों से तंग _ वो मेरे हौसले से दंग रही.

    रास्ता कठिन होगा _ देखने से लगता है, _

    गर करोगे हिम्मत _ तो मंज़िलें पुकारेंगी !!

    थोड़ी फ़िकर … थोड़ी कदर _ कभी – कभी खेऱो – ख़बर,

    इन दवाओं में होता है, बड़ा असर..

    छोटी सी वार्तालाप भी एक बुद्धिमान व्यक्ति के साथ _

    _ आप की कई सालों की पढ़ाई के बराबर होती है.

    ख़ून जिसका भी हो रंग सबका एक ही है,_

    _ कैसे पता लगाया जाये _ बेगाना कौन है और अपना कौन है…!!

    सोच कर करने वाला शोभता है, _ करने के पहले सोचने वाला बुद्धिमान है,

    करने के समय सोचने वाला सतर्क है, _ करने के बाद सोचने वाला मूर्ख है.

    *गप से बचना* – लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए,

    जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे

    और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा.

    निंदा के लायक शायद बहुत लोग हैं, पर निंदा करना अपना ही समय ख़राब करना है न ?

    जितनी देर बुराई करी उतनी देर में कुछ सार्थक ही कर लिया होता,

    कुछ सुंदर ही कर लिया होता, तो तुम्हारा दिन कितना अलग होता _ कभी सोचना !

    कहते हैं कुछ पाने के लिए, बहुत कुछ खोना पड़ता है…

    …मैंने तो बहुत कुछ पाया है ; इसलिए शायद मैंने बहुत कुछ नहीं ” सब कुछ खोया है “

    माना की औरों के मुकाबले कुछ ज्यादा पाया नहीं मैंने,

    पर ख़ुद गिरता – संभलता रहा, किसी को गिराया नहीं मैंने..

    मायने ये नहीं कि आपके पीछे कितनी भीड़ है,

    मायने तो ये है कि आप भीड़ से कितने अलग हैं…!!

    जिस किसी वृछ को आकाश छुना हो,

    उसकी जड़ों को पाताल छुना होता है..

    कोई बेहतरीन की तलाश में है _ और कोई बेहतर पा कर भी

    _ और बेहतर की तलाश में है !!

    जो जहाँ है, जैसा है, अगर वहीँ सुखी नहीं है तो, तो फिर वो कहीं भी, सुखी नहीं हो सकता.

    और जो जहाँ है, जैसा है, वहीँ सुखी है तो, वो कहीं भी सुखी हो सकता है.

    क्या कहूं क्या- क्या मुझे कुछ सहना पड़ा है,

    रहना नहीं था साथ जिसके रहना पड़ा है..

    शब्द गिरा देते हैं एहसासों की क़ीमत,

    एहसासों को शब्दों में न ढाला करे कोई.

    बुरे इंसान को अच्छी बातें बताने से _ आप उसकी नजर में बुरे बन जायेंगे,

    इससे अच्छा है कि _ उससे बेकार बातें ही करें.

    गलत सही मे बहुत मत उलझा कीजिये …

    जो अच्छा लगे वही किया कीजिये…!

    न शिकायत किसी से…..ना किसी से अनबन है,

    बस अब जिंदगी में थोड़ा…… अकेले चलने का मन है !!

    कभी कभी हमें पता नहीं होता कि दांव पर क्या लगा है,

    हारने के बाद एहसास होता है कि बहुत कुछ हार गए.

    कोई तो होगा इस जहां में _ जो मेरी सुने और अपनी सुनाए _

    _ बीच में वो और किसी को ना लाए..

    कोशिश आखिरी सांस तक करनी चाहिए, क्योंकि

    मंजिल मिले या तजुर्बा दोनों ही नायाब हैं.

    कुछ उलझनों के हल, वक़्त पे छोड़ देने चाहिए…!!

    बेशक जवाब देर से मिलेंगे, लेकिन बेहतरीन होंगे…!!

    नहीं ज़रूरत है किसी के झूठे दिलासे की जनाब, _

    _ कामयाबी पाने वाले खुद और खुदा पे विश्वास रखते हैं..

    इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी, _

    _ चलने का न सही सम्भलने का हुनर तो आ ही गया..

    धूप बहुत काम आई कामयाबी के सफर में,

    छाँव में अगर होते… तो सो गए होते.

    अकेले ही तय करने होते हैं कुछ सफ़र,

    ज़िन्दगी के हर सफ़र में हमसफ़र नहीं होते.

    जितना ही लोगों के बारे में जानोगे,

    उतना ही ” एकांत ” तुम्हे प्रिय लगने लगेगा.

    जब आप किसी को तकलीफ़ से निकालने का प्रयास करते हैं

    तो कुदरत आपकी तकलीफ़ें दूर कर देती है.

    बदला मत लिया करो…

    सब रब पर छोड़ दिया करो….. ज़नाब;

    ये दुनिया जादू का अजब खिलौना है,

    मिल जाए तो मिटटी है, खो जाए तो सोना है…

    सादगी से महंगा कोई गहना नहीं शायद,

    इसलिए हर किसी ने इसे पहना नहीं..

    मुकद्दर को भी बड़े हल्के में लिया है लोगों ने यहां,

    थकते पैर हैं लकीरें हाथों की दिखाई जाती है.

    क्यों चाहते हो बनना मुक़द्दर का सिकंदर,

    क्या तुमने सिकंदर का मुक़द्दर नहीं देखा..

    निकले थे घर से मंज़िलो का शौक लेकर ।

    ए जिन्दगी तूने तो हमे मुसाफ़िर बना दिया ।।

    तहज़ीब, अदब और सलीका भी तो कुछ है..!

    झुकता हुआ हर शख्स _ बेचारा नहीं होता..!!

    जिस राह पर मुश्किलों का बहाव होगा _

    _ उसी राह पर चलकर _ आपकी ज़िंदगी में बदलाव होगा.

    दर्द को झेलने के तरीके दिए जाएं,

    मैं अगर जिंदा हूँ तो _ मुझे जिंदा रहने दिया जाए,

    मैं कौन हूँ, मैं क्यूँ हूँ की लड़ाई में _ मैं हर रोज खुद से लड़ता हूँ,

    ऐ जिंदगी मुझे _ अब दो पल का सुकून दिया जाए..

    My Favourites – अपने को कैसे संभालें ? – 2019

    एक स्वतंत्र विचारक बनें और जो कुछ भी आप सुनते हैं उसे सत्य के रूप में स्वीकार न करें,_

    _ आलोचनात्मक बनें और मूल्यांकन करें कि आप किस पर विश्वास करते हैं…

    कम उम्र में मिला हुआ सुख इंसान को कभी समझदार नहीं बनने देता.!!

    और कम उम्र में मिला हुआ दुःख इंसान को समझदारी का उस्ताद बना देता है..!!

    ज़िंदगी गुज़ारने का यह ढंग ज़्यादातर लोग अपनाया करते हैं,

    पहले ज़िंदगी को खुद ही उलझाते हैं, फिर खुद की ही पीठ थपथपाते हैं, _ सुलझाते हुए..

    खुद को सँभालने की जिमेदारी भी अब तुम्हारी है मित्र, हौंसला रख,

    दुनियां बस मजे लेती है सहयोग नहीं करती.

    खुद को खोजिए _ नहीं तो _ आपको दूसरे लोगों की

    राय पर _ निर्भर रहना पड़ेगा. _ जो खुद़ को नहीं जानते..

    सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो..

    बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है..!!

    सच बोलने वाले कम ही रहे हैं _ समस्या ये है कि _

    _ सिर्फ मर्ज़ी का सच सुनने वालों की तादाद बढ़ गयी है..

    जो लोग भविष्य में आने वाले संकटों की तैयारी पहले से नहीं करते ;

    समझ लो _ वो लोग अपने लिए और संकट खड़े कर रहे हैं..

    चिंता करके अपनी ऊर्जा को खत्म करने से अच्छा है,_

    _ समस्या का समाधान करके _ ” चिंता को समाप्त करना “

    जो आप की भावनाओं को समझ कर भी आप को तकलीफ देता हो, _

    _ वो कभी भी आप का अपना नहीं हो सकता !!

    रोना मत कभी यार, तुम इस दुनिया के सामने…_ ये हँसाते नहीं हैं, पर हँसते बहुत हैं..।
    जो सच में बुद्धिमान है, वह दूसरों को विवाद करके हराने में उत्सुक नहीं होता,

    जो बुद्धिहीन है, वह किसी को भी हराने में उत्सुक होता है.

    किसी भी समस्या को इतना गंभीर न बनायें कि आप का जीवन उस समस्या के इर्द – गिर्द रह जाये..
    ” जो लोग कम जानते हैं वे आमतौर पर महान बात करने वाले होते हैं,_

    _ जबकि जो लोग ज्यादा जानते हैं वे कम बोलते हैं “

    अपने आप को नकारात्मक लोगों के साथ घेरना बंद करें, हम लोगों को नहीं बदल सकते हैं _

    _ लेकिन हम उन लोगों को बदल सकते हैं _ जिनसे हम खुद को घेरते हैं.

    मेरे अपने दिल दुखाते रहे हैं, ग़ैर हरदम फ़िक्र जताते रहे हैं _

    _ मेरे अपने मुझे परेशानियों में देख कर हँसते रहे हैं, _

    _ वो तो ग़ैर हैं जो मेरी मदद कर, दिल मेरा जीत जाते रहे हैं !!

    छोटी- छोटी लहरों की तरह समझते हैं मेरे अपने लोग मुझे, _

    _ उन्हें क्या मालूम शांत समंदर सा गहरा होता जा रहा हूँ मैं ..

    नकारात्मक लोगों से बचें, ये लोग आपके दिमाग की असली पॉवर को आपको महसूस ही नहीं होने देंगे !
    ऐसे लोगो से सदैव दूर रहें _ जो आपके साथ भी रहता हो और आपके दुश्मनों के साथ भी….!!!
    कोशिश करें कि आप एक हफ्ते, एक महीने, एक साल _ किसी के बारे में नेगेटिव ना बोलें ;

    और देखें _ आपका जीवन दूसरों से सौ गुना जल्दी बदलता है ” आप ज्यादा स्मार्ट और ज्यादा बुद्धिमान हो जायेंगे “

    बुद्धिमान व्यक्ति का मन चालाकी से नहीं जीता जा सकता,

    सिर्फ सच्चाई और ईमानदारी से जीता जा सकता है.

    अपनी खुशियाँ संभाल के रखिये, ये उस कांच के सामान होती हैं _ जो लोगों को _ चुभती बहुत हैं.
    आपके कथित चाहने वाले ही _ आपकी सफलता से _ सबसे ज्यादा जलते हैं..
    असल में साथ था ही नही कोई _ बेकार में गुमान होता था अपनो पर..!!
    लोगों के लिए आप तब तक अच्छे हो _ जब तक आप उनकी उम्मीदों को पूरा करते हो,

    और आपके लिए उस समय तक सभी लोग अच्छे हैं _ जब तक आप उनसे कोई उम्मीद न रखो..

    मदद करने की सबसे बड़ी बुराई ये है कि फिर ये हमेशा करनी होती है,

    जब भी बंद करो _ उसी दिन _ पिछली सारी अच्छाइयां _ बुराई में बदल जाती है..

    कभी – कभी अपने ही अपनों का ऐसा तमाशा बनाते हैं, _ कि वो अपना कहलाने के लायक ही नहीं रहते ,,,!

    • ” मैं अपनों का सोचता था…उन्होंने मुझे अपना सोचने पर मजबूर कर दिया.!!!”
    जो रिश्ता आपसे आपका स्वाभिमान छीन ले, वो रिश्ता _ रिश्ता नहीं, घुटन है..
    “जो दूसरों पर आश्रित होते हैं _ वो हमेशा ही पराजित होते हैं “
    तुममें और मुझमें बस इतना सा ही फर्क है, तुमने वो कमाया जिसे दिखाया जा सकता है,

    मैंने वो कमाया जिसे दिखाया नहीं जा सकता, मेहनत दोनों में ही है.

    जब हम किसी समस्या पर बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं तो उसे और उलझा देते हैं.

    सोचना जरुरी है, लेकिन बहुत ज्यादा सोचने से बचना चाहिए.

    हमारा जीवन उस दिन से समाप्त होना शुरू हो जाता है,

    जिस दिन हम उन मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं _ जो मायने रखते हैं.

    हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या अपने और अपने परिवार के जीवनयापन की ही होती है ;

    बाकी सब तो खड़ा किया गया समस्याओं का पहाड़ है _

    अपने मन को दुविधा जनक स्थिति में नहीं पहुँचने देना ही, जीवन की कामयाबी की दास्ताँ है.

    दुनिया मेँ रहते हुए दुनिया से अलग रहने की कला सीखेँ, _

    _ कमल के फूल और हर भूल से सीखेँ.

    अकेलेपन को बोझ समझने के बजाय, _ उसे अपनी रचनात्मकता व बौद्धिकता से जीवंत बनाएं.

    • “- जब आप अकेले में भी मुस्कुराने लगें तो, _ समझ लें कि आप वाकई बहुत खुश हैं -“
    जीवन में हर तूफान नुकसान करने ही नहीं आता,

    कुछ तूफान _ रास्ता साफ करने भी आते हैं..

    ” सलाह, साथ और समय ” यह बिना मांगे देने पर अक्सर लोग इनका मूल्य _ सस्ता ही लगा लेते हैं.
    अगर कोई आपको अपनी तकलीफ बताये तो उससे अच्छे से पेश आओ,

    क्यूंकि आप सिर्फ सुन रहे हो और वो महसूस कर रहा है..

    “कोई साथ दे ना दे, तू चलना सीख ले;

    हर आग से हो जा वाकिफ तू जलना सीख ले;

    कोई रोक नहीं पायेगा बढ़ने से तुझे मंज़िल की तरफ;

    हर मुश्किल का सामना करना तू सीख ले “

    परेशाँ होने वाले तो राहत पा भी लेते हैं,

    परेशाँ करने वालों की मगर परेशानी नही जाती..!!

    किसी को छमा कर देने पर भी _ उसके व्यवहार में बदलाव न आना _

    _ आपको मिलने वाले एक और धोखे का प्रमुख संदेश है..

    इन्सान सख़्त मिज़ाज कब बनता है ?

    जब बहुत सारे लोग उसकी नरमी का ग़लत फ़ायदा उठा चुके होते हैं.

    लोगों ने….. आपके साथ छल किया, और उन्हीं कष्टों ने आपको बदल दिया..
    ‘दुनिया में जितनी अच्छी बातें व संदेश हैं, वे दिये जा चुके हैं, अब नया कुछ कहने व देने को बाकी नहीं रहा है. अब जरुरत है, तो केवल उस पर अमल करने की.’

    “All the good thoughts and advice has already been given out in the world and there is nothing really new to say. Now the only thing we need to do is to “FOLLOW” it. ”

    मुझे अब बहुत ज्ञान नही चाहिए, _ जो मिल गया है उस पे चलने का अभ्यास चाहिए !!

    I don’t need much knowledge now,, I need practice to walk on what I have got.

    ” खाली बैठे रहना फायदेमंद हो सकता है ” :->

    हमारी ऐसी मान्यता हो गई है, की कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए,

    खाली बैठे रहने से अच्छा है, की कुछ पैसे कमा लो, किसी की सेवा कर लो, या कुछ पढ़ लो,

    पर किसी भी काम के बगैर खाली बैठे रहने पर हमारा मन शांत होता है.

    पता नहीं मैं अपनी ज़िंदगी में _ जीतूँगा या हारूँगा, _ पर मेरी ज़िंदगी की कहानी के _

    किसी भी पन्ने पे, _ ये नहीं लिखा होगा कि, _ ” मैंने कभी भी हार मानी ”

    Happiness को बाहर ढूढेंगे तो ना जाने कितना समय लग जायेगा खुशियाँ हासिल करने में,

    इसे अपने अन्दर तलाशिये, जब खुशियाँ अन्दर से बाहर आएँगी तो स्थायी होंगी.

    मैं अपनी मानसिक शांति को पुनः प्राप्त करना चाहता हूँ… मैं फिर से अपनी पुरानी जिंदगी में वापस जाना चाहता हूँ जहाँ खुशियाँ थी, धैर्य था, मस्ती थी, नादानी थी…जिंदगी की कोई खोज ख़बर नहीं थी बस अपने और दोस्तों में मौज थी…अब कहाँ मैं खुद की खोज और जिंदगी की तलाश में भटक गया…!!
    दूसरो की फिक्र लेने से कुछ नही होगा, दूसरो की चिंता लेने की आवश्यकता नही है, कि वे क्या कहते है, फिक्र ही लेनी है, तो बस स्वयं की, किसी और की नहीं। दूसरे तो हर काम मे बाधा बनेंगे, उन्हें क्या पता है कि मुझे क्या अच्छा लगता है, क्या मुझे सुन्दर लगता है, उन्हें क्या पता है कि मेरा आनन्द क्या है। जो मेरे लिए सुन्दर है, जो मेरी प्रसन्नता है, जो मेरी ख़ुशी है, जो मेरा आनन्द है, वही मेरे लिए सत्य है, इसके अतिरिक्त कोई सत्य नही। दूसरो के अपने अनुभव है, वे मेरे अनुभव नही हो सकते। मेरा अनुभव, मेरा अनुभव है, शुद्ध प्रमाणिक, वही मेरे लिए सत्य है। दूसरों की राय की फिक्र करी कि भटके।

    जिसको भीतर का स्वाद आने लगा, और भीतर की गंध आने लगी, फिर बाहर के मूल्यो का कोई अर्थ नही रह जाता।
    व्यक्ति अपने आनन्द मे जीता है, व्यक्ति जीवन के महोत्सव मे जीता है। फिर बाहर के लोग क्या कहते हैं ? कौन फिक्र करता है।अच्छा कहे तो अच्छा, बुरा कहे तो अच्छा। सम्मान दे तो ठीक, अपमान दे तो ठीक।

    आनन्द, न धन में है, न बडे मकान में है, न बड़ी बड़ी कारों में है, न उच्चे पदों में है, जब तक आदमी नशे में है, बेहोश है, तब तक किसी भी चीज़ से आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता । ध्यानी व्यक्ति ही, यानी होशपूर्ण जागृत व्यक्ति ही आनन्दित हो सकता है, ध्यानी व्यक्ति को ही धन में, बड़े मकान में या कारों में, पदों में आनन्द आता है, जो ध्यानी नहीं, उसे कभी आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता, उसे पूरे विश्व की सत्ता भी मिल जाए तो भी उसे आनन्द उपलब्ध नहीं हो सकता है । आनन्द तो अन्तस की स्थिति पर निर्भर करता है, अन्तस शान्त है तो आनन्द ।- ओशो

    शुभचिंतकों को मेरे नाकाम होने, फ़कीर हो जाने का डर है. आगे का मालूम नहीं फिलहाल कुछ ना होने और चिंता मुक्त जीवन का आनंद ले रहा हूं.

    अंजाम जो भी हो उसका ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ मैं होऊँगा, ये एहसास ही मुझे आज़ादी की अनुभूति करवाता है…

    हमारे जीवन में संघर्ष निरंतर चलता रहता है, एक संघर्ष खत्म तो दूसरा शुरू हो जाता है…

    थक कर नहीं बैठा जा सकता… अनवरत चलना पड़ता है…फिर चाहे कुछ भी आए सामने…

    एक संघर्ष ऐसा भी है जो व्यर्थ ही चलता है बस मानसिक है…वो है घर और रिश्तों से…

    _ आपने नौकरी छोड़ कुछ अलग करना शुरू नहीं किया की लोग नाराज ही हो जाते हैं…_

    _ अरे भाई जो कर रहे हैं कर लेंगे और नहीं कर पाए तो कुछ और कर लेंगे…माथा काहे पीटना…भूखे नहीं मरेंगे…

    _ कुंठित रहकर पैसे कमाते रहने से अच्छा है कि जीवन में कुछ भूचाल ही आता रहे…

    _ इससे जिंदा रहने का एहसास तो बना रहेगा…नहीं तो मौत आ ही चुकी होती है…बस शरीर जिंदा रहता है…

    मुझे अकेला रहना अच्छा लगता है_

    इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि_ मैं दुनिया की ख़बर नहीं रखता…!!

    इंसान को अकेले रहने में उतनी मुश्किल नहीं होती, जितनी मुश्किल उस व्यक्ति के साथ रहने में होती है,

    जिससे उसकी बनती नहीं है..

    जीवन का ये मर्म है, ए मेरे दोस्त

    किसी के साथ होकर भी अकेले जीना है

    बड़े शहरों और बड़ी ईमारतों के बीच एक दिन काम और नाम तो बेइंतहा कर लोगे तुम

    लेकिन अकेलेपन की इन दीवारों को नकली मुस्कुराहटों से ना तोड़ पाओगे

    फिर एक वक़्त ऐसा भी आएगा

    उन दीवारों से मोहब्बत कर बैठोगे ….

    “- अकेले खड़े होने का साहस रखो, _ लोग ज्ञान देते हैं साथ नहीं..”

    एक समय तक ही आँसु देता हैं दुख, _ फिर परिपक्वता देता है और शब्द छिन लेता है

    _ कर देता है मौन…और सीखा देता है एकांत में जीना..

    एक उम्र पर आकर हम समझने लगते हैं,, __ कि लोग अकेले रहना _ क्यों पसंद करते हैं !!
    अकेले चलने वाले घमंडी नहीं होते, वो वास्तव में हर काम में अकेले काफी होते हैं..
    मैं अकेला हूँ और मैं सबकुछ नहीं कर सकता,

    इसका मतलब ये थोड़ी की मैं कुछ भी नहीं कर सकता.

    जब से सुना वो हर जगह साथ है,

    न जाने क्यूँ मुझे अकेलेपन से मोहब्बत हो गई..

    अकेले रहने वाले लोग अपने आप में ही सम्पूर्ण महसूस करते हैं,

    ये लोग खुद को ही अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं.

    #एकांत अकेलापन नहीं है,

    यह एक ऐसा एहसास है जिसकी कीमत हर किसी को नहीं पता है..

    मनुष्य अपने एकांत में सबसे अधिक सुंदर है और सबसे अधिक सुखी भी..

    .. किंतु साधारण मनुष्य यह देख नहीं पाता…. और यदि देखता है तो सह नहीं पाता…..

    इंसान जब खुद का हो जाता है, उसे तन्हाई में सबसे ज्यादा मज़ा आता है .!
    जो लोग तन्हाई पसंद करते हैं, _ उन्हें समझना आसान नहीं होता.
    थोड़ा वक़्त लगेगा, पर यकीन मानो, अकेले बहुत सुकून मिलेगा.
    अकेले रहने का आनंद लेना सीखें, क्योंकि कोई भी आपके साथ हमेशा के लिए नहीं रहेगा !
    मरहम के लालच में अपनी दुखती रग का पता लोगों को देना…….बेवकूफ़ी की आखिरी हद है..
    अगर सभी लोग एक ही इंसान के खिलाफ हैं तो समझ जाना चाहिए, वो इंसान बहुत काम का है.
    तैरने के लिए नदी का गहरा होना भी जरुरी है,

    जिससे बात करो उसका, कुछ तल होना भी जरुरी है,

    हम समय बर्बाद नहीं करते, हर एक से बात नहीं करते,

    कुछ तो दम हो कहने वाले में, सब से संवाद नहीं करते..

    एक बार वर्तमान में जीने की कला तो सीखो; भूत, भविष्य, जीवन से चिंता, दुःख, तनाव सब गायब हो जाएंगे,

    आप ऐसे आनंद में डूब जाएंगे जो अनमोल है, यही जीवन का परम सुख है..

    मैंने जीवन में कुछ गलतियाँ की है जिनमे से है –

    1. नकारात्मक व्यक्तियों पर अत्यधिक वक्त न्योछावर करना.

    2. गलत लोगों के बीच रहक़र उन्हें खुश रखना.

    3. प्रमुख कार्यो को छोड़ अनावश्यक कार्यो में संलग्न रहना.

    ” अब बस उसे ही याद करता हूँ, जो मुझे याद करता है.”

    मोह, दर्द, तकलीफ, उम्मीद, बेबसी, सम्मान, अपमान, प्यार, मोहब्बत, डर, मृत्यु, जीवन एवमं रिश्तों से ऊपर उठ चुका हूँ.

    मुझे रत्ती भर परवाह नही की दुनिया मुझसे क्या उम्मीद करती है और मैं उसके उम्मीदों पर कितना खरा उतरता हूँ.

    _ अनगिनत चाहने वालों से, ” एक निभाने वाला बेहतर होता है ”

    जब से मैंने अपने जीवन में ‘नो फर्स्ट कॉल’ की नीति अपनाई है, तब से मैं बहुत खुश रहने लगा हूँ.

    पहले मैं किसी सगे संबंधियों से मिलने के लिए भी वक्त की भिक्षा माँगता था.

    परन्तु अब न उनका कॉल आता है न मैं करता हूँ.

    अब समझ आता है कि उन्हें कोई जरूरत नहीं थी मेरी, मैं ही उनके पीछे था.

    न पूछा मैंने _ न उन्होंने ख़बर ली..

    कुछ यूं _ अपनी जिम्मेदारियों में _ उलझे रहे हम…

    मुश्किल और दुःख में फ़र्क करना सीखिए…

    कुछ लोग रोने के इतने आदी होते हैं कि सिर्फ़ मुश्किलों को दुःख बताकर आँसू बहाने बैठ जाते हैं,

    उन्हें ये समझाया जाना चाहिए कि रास्ते में पड़े भारी भरकम पत्थर को धक्का देकर हटाना मुश्किल मात्र है,

    वो दुःख तब है जब धक्का देने के लिए तुम्हारे पास हाथ ही ना हो.

    कई बार परिस्थितिओं को ये सोचकर accept कर लेना अच्छा होता है कि जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है,

    अगर हम इस एक बात को दिल से accept कर लें तो, ज़िन्दगी के बहुत सारे तूफ़ान थम जायेंगे और धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर आने लगेगा.

    हम जिंदगी में कड़े फैसले लेने में डरते हैं. हम ऐसा इसलिए नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि हम दूसरों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते हैं.

    इस तरह के डर की वजह से निजी और प्रोफेशनल दोनों लाइफ प्रभावित हो सकती है. कड़े फैसले नहीं लेकर हम समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, उन्हें बढ़ाते हैं.

    हमारी इस प्रवृत्ति से छोटी समस्या भी बड़ी हो सकती है. इसलिए जहां जरुरत हो, वहां हमें कड़े फैसले लेने से हिचकना नहीं चाहिए.

    कोई चाहे आप पर जितना भी दबाव क्यों न बनाएं, पर निर्णय हमेशा खुद का लो ;

    क्योंकि कल कुछ गलत होता है तो जान लो, वही लोग ये जिम्मेवारी नहीं लेंगे आप की ;

    आप की अहित का कारण वो लोग हैं, वो अपना पल्ला झाड़ेंगे और बोलेंगे

    उस वक़्त तुम ने क्यों नहीं विरोध किया.

    यदि कोई आपसे भावनात्मक चोचले करके अपनी बेतुकी या गलत बात मनवाने की कोशिश करे तो उसकी बात कभी न मानें ;

    क्योंकि ऐसे लोग आपको अपना गुलाम बनाना चाहते हैं _ और इनकी बातों में आकर इमोशनली ब्लैकमेल हो कर आपके द्वारा लिया गया निर्णय _

    आगे चल कर _  आपको बरबाद कर सकता है.

    लोगो की जिंदगी में जबरदस्ती घुस जाने से क्या होगा.? और मिलेगा क्या.?

    सिवाय तिरस्कार, आत्मग्लानि एवंम नजरअंदाजी के…

    कभी कभी हम किसी के बारे में अत्यधिक सोच लेते हैं और बाद में मिलता है

    हमे अनोखा दर्द एवंम बेपनाह बुरा तजुर्बा….

    ” आप सही रहे ” उसके बाद भी लोग आपको न समझ पाएं, तो उनके लिए रोने की कोई जरुरत नहीं,

    ऐसे लोगों से कहो – पतली गली पकड़ और निकल ; कोई जरुरत नहीं अब तेरी.

    ” अपने आप को दुःख देना बंद करो “

    अगर आप खुद को दुखी करना चाहते हैं, तो आपको अंतहीन मौके मिलेंगे,

    क्योंकि हमेशा कोई न कोई कुछ ऐसा करेगा, जो आपको पसंद नहीं आएगा..

    किसको किसको समझाते फिरोगे, सोचने दो जिसे जो सोचना है ;

    लोग उतना ही सोचेंगे, जितना उनका मानसिक विस्तार है !!

    किसी पर ज्यादा नाराज होने से बेहतर है,

    की अपने जीवन में उसकी अहमियत को कम कर दो..

    कोई मेरा दिल दुखाता है तो मैं चुप रहना ही पसंद करता हूँ,

    _ क्योंकि मेरे जवाब से बेहतर वक़्त का जवाब होता है..

    मरहम के लालच में अपनी दुखती रग का पता_

    _ लोगों को दे देना _ बेवकूफ़ी की आख़री हद है !

    हमारी बुज़दिली मशहूर है जमाने मेँ,_ कि

    _ हम बदला नहीं लेते, खुदा पे छोड़ देते हैं !!

    जिंदगी भी उसका भरपूर साथ देती है जो अपने विचारों को दूषित नहीं होने देता

    और संघर्ष के दम पर दुनिया जीत लेता है.

    जितने राजदार कम बनाओगे, उतने ही धोखे कम खाओगे,

    क्योंकि हमारी कमजोरियां ही दुश्मनों को ताकतवर बनाती हैं..

    जब कोई करीबी इंसान अपनी औकात दिखा जाता है न, तो मुझे दुख नही होता

    बल्कि खुशी होती है कि, चलो अच्छा हुआ ” छुटकारा मिला “

    कुछ रिश्तों का टूटना ही बेहतर था, छूटने वाले का छूटना ही बेहतर था.

    एक ही बात उसको कब तक समझाते, रुठने वाले का रूठना ही बेहतर था.

    फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की,

    जैसे ये जिन्दगी, जिन्दगी नहीं, कोई इल्जाम है..

    एक हद के बाद इंसान, सब कुछ छोड़ देता है ;

    शिकायत करना, मिन्नते करना, मनाना और फिर दिल ऐसा हो जाता है,

    कि कोई बात करें तो ठीक, कि ना करें तो भी ठीक ;

    क्योंकि पता लग चुका होता है, कि दुनिया बहुत झूठी और मतलबी है.

    हम जितना दुःख के बारे में सोचते हैं, लिखते हैं..उतनी ही मानसिक बेचैनी और अस्थिरता महसूस करते हैं। अब इसीलिए मैं अब खुशियाँ चुनता हूँ। हर छोटी-छोटी चीजों में सकारात्मक कोण ढूँढता हूँ..मुझे अब दुःख से लगाव नहीं रहा क्योंकि दुःख समय द्वारा रचित क्षणिक परीक्षा है जो हमे देनी होती है !
    सहारे इंसान को खोखला कर देते हैं और उम्मीदें कमज़ोर कर देती हैं,

    अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए,

    आपका खुद से अच्छा साथी और हमदर्द कोई ओर नहीं हो सकता..!!

    मन को खुश करने के लिए जीने वाले लोग, जानवर से भी गए गुजरे होते हैं. _ ये लोग

    अपने मन के गुलाम बने रहते हैं और मन, इनकी ज़िन्दगी बरबाद करता चला जाता है..

    कभी कभी लाख कोशिशों के बाद भी कुछ ना मिले या लाख जतन से सहेजते संभालते भी कुछ छिन जाए,_

    _ तो जीवन कुछ समय के लिए थोड़ा कम सुंदर ज़रूर हो सकता है, __ ” किंतु यह कुरूप कभी नहीं होता “

    मन को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ ये देखो कि आप कुछ गलत तो नहीं कर रहे,

    गलत है तो मत करो और सही है तो मन भर के करो.

    जितना आदर्शवादी और संस्कारी होकर अपने रिश्ते में हम प्यार करते हैं और सबको खुश रखना चाहते हैं उतना ही दुख मिलता है और कोई भी दिल की फीलिंग्स को नहीं समझता है. फिर एक तरफा त्याग क्यों करते रहना ??

    “जिंदगी अपनी भी होती है और अपनी खुशी को भी जीना चाहिए जैसे भी”, बाकी कोई अपना नहीं होता है चाहे जितना करो.

    आपका जीवन आपका अपना है, दूसरे लोग आपसे जो होने की उम्मीद करते हैं, वह बनने की कोशिश में इसे बर्बाद न करें;

    हर किसी को खुश करने के लिए अपनी खुशियों का त्याग न करें, जो आप बनना चाहते हो वो बनो..

    अगर किसी से आपको तकलीफ है या कोई कष्ट है, कोई आपको प्रेम नहीं कर रहा है तो इतनी भर बात को इतना बड़ा मत बनाओ कि आप अपने ही शरीर और मन को ख़राब करने लग जाओ.

    जब हमारा मन दुःखी होगा, तब हमारे शरीर में विषैले तत्व पैदा होते हैं और ये विषैले तत्व हमारे शरीर को मारते हैं.

    ज़िन्दगी में हर समस्या का निदान आगे बढ़ने में है.

    यदि आप बैठ कर सोचेंगे कि आखिर यह मेरे साथ ही क्यों हुआ,

    तो आप और अपने जीवन को स्वयं बर्बाद कर रहे हैं.

    हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है,

    सफल होने का सबसे निश्चित तरीका है _ एक बार और प्रयास करना..

    जब तक आपका सामना आपकी सबसे बड़ी कमजोरी से नहीं हो जाता,

    तब तक आपको अपनी सबसे बड़ी ताकत के बारे में पता नहीं चलता..

    जिंदगी में कभी कभी ऐसा भी मोड़ आ जाता है, कि हम खुद के बिछाए हुए जाल में खुद ही फंस जाते हैं !

    और लाख कोशिशों के बाद भी नहीं निकल पाते !!

    किसी सही इंसान के साथ इतना भी ग़लत मत करना कि उसके साथ किए धोखे का पछतावा सारी ज़िन्दगी करना पड़े.
    उम्र को दराज में रख दें, उम्रदराज न बनें..

    एक दिन शिकायत तुम्हे वक़्त और जमाने से नहीं ….खुद से होगी,

    कि ज़िंदगी सामने थी और तुम दुनिया में उलझे रहे…!!!

    जीवन भर लोगों ने मुझे सदैव विकल्प बना कर ही अपने जीवन मे शामिल किया है.. जब मन किया मुझे याद किया..मन किया मुझे दरकिनार कर दिया…अब बस हुआ..कब तक दूसरों के मनानुसार चलूंगा..अब मैं अलगाव का दर्द सह लूँगा…अकेला रह लूँगा परन्तु ये ढोंगी लोगों से दूर रहना ही पसन्द करूँगा..!!!
    कठिनाई से प्राप्त होने वाली चीजों का मूल्य एवम महत्व अधिक होता है… इसीलिए जीवन मे भी कठिन बनिए…

    _ लोग आपकी सराहना करेंगे…आसानी से उपलब्ध होने पर ही लोग आपको तुच्छ समझ लेते हैं….!!!

    गुस्से में कभी भी अपनी जगह न छोड़ें, कोई न कोई आपकी कमी को पूरा कर ही देता है ;

    _ फिर वापसी पर आपकी वो अहमियत नहीं रहती _ फिर चाहे वो मकान हो या किसी का मुकाम हो..

    यश लूटने में एक बुराई भी है, अगर हम इसे अपने पास रखना चाहते हैं तो हमें अपनी जिन्दगी

    लोगों को खुश करने में और यह जानने में बिता देनी होगी कि _ उन्हें क्या पसन्द है और क्या नहीं.

    जो चीजें आपको तोड़ती है, कमजोर करती है… आपको जीवन मे आगे बढ़ने नही देती… उसका पीछा करना बंद करो…

    वरना ये आपको जीवन मे कभी आगे बढ़ने नहीं देगी…

    कई बार आप सही होते हैं, फिर भी लोग आपको सही नहीं समझते हैं.

    उस वक्त सबसे जरुरी यह होता है कि आप सही रास्ते पर चलते रहें,

    लोगों की गलतफहमियाँ वक्त के साथ खुद- ब – खुद दूर हो जाएँगी.

    बहुत कोशिश करता हूँ अपनों को साथ लेकर चलूँ… बहुत हद तक सोचता हूँ ये अपने हैं… कहीं पीछे न छूट जाएं…परन्तु उल्टा वे मुझे ही डसने की कोशिश करते हैं। अब मैं केवल खुद के लिए जीता हूँ… मुझे अब किसी से वास्ता नहीं रखना…!! उन्हें मैं नहीं दिखता… मेरे उपकार नहीं दिखते… वक्त की नज़ाकत पर यक़ीन है मुझे… जब मेरे दिन लौटेंगे, तब सुख में भी मेरे साथ केवल मैं होऊंगा..!!!

    ” जब रिश्ते अपशब्दों का शोर मचाते हैं, बेहतर है,

    कान ढ़क, गहरी चुप्पी ओढ़, दूर निकल लिया जाये…”

    जिसने आपको रुलाया हो… आपको जीवन के सबसे न्यूनतम बिंदु पर ला दिया हो…जिसने आपके आँसुओ को महज़ पानी समझा हो…वे आपके अपने कदापि नहीं हो सकते…कभी नहीं…!!!

    मेरे भीतर वो ताकत ही नहीं रही की मैं टूटते हुए रिश्तों को बचाने के लिए स्वयं को सर्वत्र झोंक दूँ … अब मुझे परवाह ही नहीं किसी की ,,_  इसे अहंकार कहो या जल्दी गिव अप कर देने की कमजोरी..

    मगर इन सब में फँस कर मैं स्वयं को दुःख नहीं दे सकता ,,_ बहुत झेला हूँ यार,, _ अब और नहीं ..!!!

    मैं दर्द में अकेले रहना ज्यादा पसन्द इसलिए करता हूं क्योंकि…मुझे पता है कि

    मेरे पास दर्द का मजाक उड़ाने वालों की भीड़ है समझने वालों की नहीं.

    जहां दूसरों को समझाना कठिन हो जाए, वहां स्वयं के मन को समझाकर भावनाओं को खुद तक सीमित कर लेना बुद्धिमानी है.

    यदि आपको अपने जीवन में सुकून एवं शांति चाहिए तो लोगों से अपेक्षा कम से कम ही रखिए, और बहुत ज़रूरत पड़ने पर ही उन्हें याद करें..

    हद से ज्यादा अपेक्षा और बेवजह की आशाएं आपको जाने-अनजाने में दुःख ही पहुँचाते हैं, इसलिए अपने हिस्से का कर्म करके भूल जाइए और खुश रहें..

    जीवन आपकी भावनाओं और वास्तविकता के बीच एक समझौता है, _

    _ जीवन के हर पड़ाव पर आपको अपनी भावनाओं को छोड़ना होगा और वास्तविकता को स्वीकार करना होगा..

    जब हम अपने जीवन का लछ्य किसी दूसरे के प्रभाव में आ कर चुनते हैं तो,

    _ उसी छण हम एक भीड़ का हिस्सा हो जाते हैं !!!!

    रुकना है नहीं, _ कभी कुछ बदलने के लिए और कभी खुद को सुधार कर _

    _ फिर कुछ करने के लिए..

    जरूरी तो नहीं कि जिससे रोज मिल रहे हों, बातें हो रही हो उनसे ये अपेक्षा भी रखी जाए कि वे हमारा सम्मान करें, हमारे मुताबिक़ हर काम करें, हर कार्य मे मेरा साथ दें या हमारे हिसाब से खुद को बदल दे,

    ऐसी उम्मीद रखना मूर्खता भरी होगी, क्योंकि उम्मीद टूटने के बाद दुःखी भी केवल हम ही होंगे !

    कुछ वर्ष पूव मुझे लगता था कि जीवन में कोई तो बात करने वाला होना चाहिए…जिससे अपनी खुशी, कार्य, दुःख साझा कर सकूँ..परन्तु जैसे जैसे वक्त बीता, लोगों की फितरत बदली..अब ऐसा लगता है कि इस जीवन युद्ध में खुद ही..स्वयं को ही स्वयं का पूरक बनाना होगा..!!
    घाव गहरा था बहुत, पर दीखता न था ; दिल भी बहुत दुखता था, पर कोई समझता न था ;

    बाद में सब कहते तो हैं कि हमसे कह सकते थे ; पर जब- जब कहना चाहा था ” कोई सुनता न था “

    मैंने विगत सालों में एक बात महसूस करी कि जो खुद पर बीतती है, वो दर्द सिर्फ आप महसूस कर सकते हो, इसीलिए मैं अपने इमोशन अथवा दुःख किसी से साझा नहीं करता. क्योंकि ऐसा करने के पश्चात् लोग हमें कमजोर समझ लेते हैं, बेफिजूल का ज्ञान देने लगते हैं, इधर उधर कह डालते हैं, मजाक भी बनाते हैं.. जोकि बाद में काफी आहत करता है, इसलिए अपनी व्यक्तिगत समस्याएं अपने पास ही रखना सबसे बेहतर है..!!!

    इसलिए मेरा ऐसा मानना है कि कोई और नहीं सिर्फ आप ही खुद को मोटिवेट करके ऐसी सिचुएशन से बाहर निकालने में हेल्प कर सकते हैं, अच्छे मित्र बनाकर, उन से बात करके, उनके साथ टाइम एक्सपेंड करके, यकीन से नहीं कह सकता कि, ये बहुत आसान होगा, क्यूंकि आपका भरोसा सबसे उठ चुका होता है, तो एक बार फिर किसी पर भरोसा करना बहोत मुश्किल होता है, फिर भी कोशिश करनी चाहिए..

    ” कुछ भी इंपॉसिबल नहीं है “

    ज़िन्दगी में अब तक के मिले अनुभवों के आधार पर मैंने समझा कि एक निश्चित वक्त तक ही हम किसी के लिए अच्छे या मनोरंजक इंसान होते हैं, उसके बाद हम उनकी ज़िन्दगी में गलत या बोरिंग पर्सन बनकर मात्र उनकी आवश्यकता के घटक बनकर रह जाते हैं, जिसे वह अपनी इच्छानुसार ही इस्तेमाल करते हैं.
    एक उम्र आता है जब इंसान को सब चीजें एक सी लगती है सही गलत में द्वेष करना भूल जाता हैं, हॉ ठीक है कोई बात नही, छोड़ो जाने दो, जैसी बातों का आदती हो जाता है, निरंतर कुछ खोते जाना है फिर भी आगे बढ़ते रहना है, इस बात से भलीभांति परिचित हो जाता है….हँसकर बातों को टाल देने की आदत विकसित कर लेता है,

    ऐसा लगता है जिंदगी का बहाव किसी शांत जलाशय की तरह अपने वेग में चलते जा रहा है, वही शून्यवस्था जिंदगी की परिपक्वता है जहां आप दूसरो से बेहतर नजरिये से जिंदगी को देखते है !!

    स्वयं की तलाश में मैं जीवन के उस पड़ाव पर आ गया हूँ जहाँ अपना-पराया में कोई भेद नहीं दिखता …

    सभी समान लगने लगे हैं…इन सब में अहमीयत्ता केवल स्वयं की रह जाती है.

    मौन ताकत बन जाता है और रब सबसे अच्छा मित्र…!!

    जैसे-जैसे हम उम्र की सीढ़ी चढ़ते हैं..तब हमें एहसास हो जाता है कि यह दुनिया इमोशन से नही परन्तु प्रैक्टिकल आधार पर चलती है। यहां इमोशनल होकर फैसले नही लिए जाते..ये जिंदगी व्यवहारिक एवम समायोजित होकर जीने के लिए ही मिला है… भावों के सागर में हम केवल अश्रु रूपी मोती ही पाते हैं।

    यदि आप जीवन में किसी को खुद से भी अधिक महत्व देना शुरू कर दिए हैं… तो सम्भल जाईए क्योंकि बदले में दर्द, नाउम्मीदी एवमं निराशा के सिवा कुछ नहीं मिलने वाला और अवसाद के गिरफ्त में जाएंगे सो अलग….!!!

    उम्र के उस पड़ाव पर हूं कि…अब किसी का साथ नहीं भाता, दरअसल जब कोई साथ होता है तो..जिंदगी बहुत आसान लगने लगती है और जब वो छोड़ जाते हैं. तो हम जीवन की सबसे निचली पायदान पे पहुंच जाते हैं, जहां सिवाय दर्द, बेबसी, अवसाद के कुछ नहीं मिलता,

    इसलिए अब मैं एकांत से नाता जोड़ लिया हूं.

    उम्र का एक स्टेशन पार कर जाने के बाद _आदमी बेहतरीन बनने की चाह त्याग देता है.. ;

    उसे इस बनावटी दुनिया से अधिक मोह नहीं रह जाता, _ क्योंकि वह थक चुका होता है_

    _ अतीत में निभाए गए कई रिश्तों से…और उनसे मिले निराशजनक परिणामों से _

    _ इसलिए अब वह अपनी ही विचित्र सी धुन में मगन रहने लगता है.

    कभी-कभी किसी का रवैया इतना बुरा लग जाता है कि हम उनसे दुबारा बात करना नहीं चाहते…

    इसीलिए हम धीरे-धीरे उनके जीवन से निकल जाने का प्रयत्न करने लगते हैं.._ फिर उन्हें भनक लगे बिना स्वतः किनारे हो जाते हैं.

    कोई आप को एक बार – दो बार दुःखी कर सकता है. इसके बाद भी यदि

    वह इंसान आपको तकलीफ दे रहा है तो, गलती शायद आपकी है.

    आप उसे मौका दे रहे हैं, आपको हर्ट करने का ” उस से दूर न हो कर “

    “-जब रिश्ते रुलाने लगें _ तब इग्नोर करना सीखो _ जिंदगी आसान हो जाएगी “,,

    अक्सर, हम जिन्हें अपना समझकर समर्पित रहते हैं ;

    चालाकियां बताती हैं उनकी __ वे समर्पण के काबिल नहीं.

    मैं हर पल अपने लोगों को _ खोने से डरता हूँ, लेकिन कभी कभी खुद से _

    _ ये पूछ लेता हूँ कि _ कोई है तेरा _ जो तुझे खोने से डरता हो ?

    ज़िन्दगी भर उन रिश्तों के, पीछे भागता रहा,_ जो कभी अपने थे ही नही,

    जब होश आया तब देखा,_ जो रिश्ते सच मे अपने थे,_ उन्हें तो मैं_ संभाल पाया ही नही..

    — हम ऐसे लोगों पर अधिक ध्यान देते हैं ” जो हमें नज़रअंदाज़ ” करते हैं,

    और जो हम पर ध्यान देते हैं ” उन्हें हम नज़रअंदाज़ ” करते हैं..—

    कोई भरोसा तोड़े तो _ उसका भी धन्यवाद करो _ क्योंकि

    वो हमें सिखाते हैं कि _ भरोसा हमेशा _ सोच- समझ कर करना चाहिए..

    कभी- कभी थोड़ी दूरी बनाने से लोगों को यह पहचानने में मदद मिलेगी,

    कि आप वास्तव में उनके लिए कितना मायने रखते हैं..

    यदि आपके निजी जीवन के द्वन्दों मे कोई दखल दे रहा है, मतलब उसने आपके कमजोरी को भांप लिया है__ यह वक्त है आपके मजबूत होने का और उन लूप होल्स को बन्द करने का जो आपको कमजोर कर रहा है.

    यदि किसी भी व्यक्ति को आपकी कमजोरी, आपकी दुर्बलता के बारे में पता चला… तो कोई भी हो, वह आपका सगा-सम्बंधी भी क्यूँ न हो… उसका फायदा जरूर उठाएगा…!!!

    बुद्धिमान आदमी मूर्ख बनता हुआ प्रतीत हो सकता है, लेकिन उसे कोई मूर्ख बना दे ये भूल है ;

    मूर्ख लोग बनते हैं, जो उसके आगे के प्रोग्राम को समझ नहीं पाते “ बुद्धिमान को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता ”

    अक्सर लोग इसलिए आप की खुशियां बर्बाद करेंगे, क्योंकि उनके पास कुछ अच्छा करने के लिए नहीं है, या वह अपनी जिन्दगी से नाखुश हैं. इसलिए अपने रुख पर अडिग रहो.
    हर व्यक्ति को खुश रखने की कोशिश करने वाला व्यक्ति एक दिन सबसे अकेला हो जाता है. अतः हमें  एक सीमा के बाद अपने मन की ही बात सुननी चाहिए.

    हम लाख किसी के लिए अच्छा करते रहें. लेकिन, हमारी एक गलती पिछली सभी अच्छाइयों को धो कर रख देती है. हम लाख किसी की फिक्र करें, लेकिन यदि किसी समय हम किसी एक मौके पर कुछ भूल गए, तो सारा पिछला किया कूड़े के ढेर का हिस्सा बन जाता है. इसलिए आप कुछ भी करके किसी को हमेशा खुश नहीं रख सकते या यह कहें कि आप कुछ भी करके सबको खुश भी नहीं रख सकते. क्योंकि, लोगों की आपसे अपेछाओं का कोई अंत नहीं है. जैसे ही आप उनकी एक अपेछा पर खरे उतरे, आपके लिए तुरंत एक नयी शर्त उनके मन में तैयार हो जायेगी. इसलिए, अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठां से करते रहें और आगे बढ़ते चलें,

    क्योंकि हमेशा सबको खुश रख पाना पूरी तरह असंभव है.

    अपने सपनों का पीछा करें और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें. अगर आप ऐसा करेंगे, तब आप बहुत अच्छा जीवन जिएंगे. जो लोग अपनी पसंद का काम करते हुए जीवन व्यतीत करते हैं, वह अपने लाइफ को इन्जॉय करते हैं और ऐसे लोग ही खतरा उठाने का साहस भी करते हैं.
    अपने आप को अपने लिए समय दें. काम और आराम के बीच संतुलन खोजें. ” जाओ दुनिया की सैर करो,”

    ऐसे लोगों को खोजें, जो आपको महत्व देते हैं. अतीत में मत जियो, तुम्हारे पास देखने के लिए और भी बहुत कुछ है.

    वहां जाएं जहां आप सबसे ज्यादा जीवित महसूस करते हों.

    जो व्यक्ति दूर दृष्टि रख कर चलता है अर्थात आगे की ओर सोच कर कदम रखता है, जिस व्यक्ति में योजनाबद्ध तरीके से चलने की आदत है, जिसने अपने आपको पूरी तरह व्यवस्थित किया हुआ है, अपने ह्रदय को आनन्द से भरने की आदत है, जो महापुरुषों की तरह जीवन जीता है, किसी के सामने जिसके हाथ नहीं फैलते, जो दूसरों को आदर देना जानता है लेकिन स्वयं आदर पाने की कामना नहीं करता, जिस व्यक्ति का ह्रदय विशाल है, जिसको प्रेम बाँटना आता है – ऎसी सारी परिभाषा को जोड़कर मनुष्य का स्वस्थ होना कहलाता है.
    जिंदगी बहुत छोटी है. यह केवल उन लोगों के लिए लंबी है, जिनकी हालत दयनीय है. इंसान के पास जो विशाल संभावना है उसको देखते हुए हमें जो जिंदगी दी गयी है, वह बहुत ही छोटी है.

    लेकिन, उसमें भी लोग बोर हो जाते हैं और इस जीवन की सरलता को जाने बिना ही अपने आप को खत्म कर लेते हैं.

    क्योंकि लोगों के शारीरिक और मानसिक नाटक_ जीवन के अस्तित्व की वास्तविकता से_ कहीं ज्यादा बड़े हो जाते हैं.

    जब आप अपने घर की सफाई को ले कर इतने ज्यादा सतर्क रहते हैं, तो फिर अपने दिमाग को ले कर क्यों नहीं ? क्यों आप किसी व्यक्ति को अपने दिमाग में कूड़ा भरने की इजाजत देते हैं ?

    …………….इस बारे में सोचें, ताकि आप का दिमाग बेहतर काम कर सके.

    कई लोग यह समझ नहीं पाते कि किसी की बुराई, गॉसिप, नकारात्मक विचार दरअसल दिमाग के लिए कूड़ा ही है. ये न केवल आपकी कार्यछमता कम करते हैं, बल्कि लोगों से आप को दूर भी करते हैं.

    ……………………….इसलिए दिमाग में न जमा होने दें, विचारों का कूड़ा. 

    जब हम अपने घर की साफ सफाई और रंग रोगन आदि करते हैं तो हमारी दिनचर्या अस्त व्यस्त हो जाती है और हमें कई परेशानियाँ होती है. _ लेकिन कार्य पूरा होने के बाद बहुत सुकून मिलता है.

    इसी प्रकार जीवन की उठा पटक भी अंततोगत्वा सुकून देती है, क्योंकि इस उठा पटक मे हमारे जीवन का बहुत सा कचरा साफ हो जाता है.

    जिस दिन मैं दुनिया से चला जाऊंगा उस दिन लोग मुझे याद करेंगे, अगर आप ऐसा सोचते है तो ये आपकी गलतफहमी है, आपके आस पास बहुत से लोगो की मौत हुई है आप किसको याद करते हो ? लोग केवल इंसान के अच्छे कर्मों को याद करते है. इसलिए इस गलतफ़हमी में न रहे कि आपके चले जाने से किसी को कोई फर्क पड़ेगा.

    इसलिए सिर्फ अच्छे कर्म करें और अपने लिए जीना शुरू करें। लोगों की ज्यादा परवाह न करें, या किसी बात के लिए दुःखी न होयें. एक दिन सबको चले जाना है. जीने पर ध्यान दें न की चिंता, तनाव, दुःख और काम चोरी पर.

    कुछ लोग इतने सताये हुए महसूस करते हैं इस दुनियाँ में _ जैसे उनके आस – पास सब दुश्मन ही भरे पड़े हैं !_ जबकि ऐसा होता नहीं, _ बस मन का वहम होता है, _ और ज़िंदगी भर इस भ्रम में जीते रहते हैं..

    अगर इंसान किसी के साथ दो पल बैठ कर हंसी मज़ाक न करे और बातें ना करे, __ अकेले – अकेले रह कर ज़िंदगी गुजारे , _ तब उसको ये सारी दुनियाँ मतलबी और दुश्मन ही नजर आती है..!!

    जीवन में हर समस्या के अंदर एक उपहार होता है.. इसलिए जब आप समस्या का सामना करें तो परेशान न हों _

    _ इसका अंत आपकी अपेक्षा से अधिक सुंदर हो सकता है.

    आप किसी इंसान का दिल तब तक दुखा सकते हैं, _

    _ जब तक वो आप से प्रेम करता है ..

    शायद मुझे अब तक सब से अधिक गलत समझा गया है लेकिन इसका मुझ पर कोई असर नहीं ;

    कारण केवल इतना है कि, मुझे सही समझे जाने की जिज्ञासा नहीं,

    यदि वे सही नहीं समझते तो यह उनकी समस्या है, यह मेरी समस्या नहीं है,

    यदि वे गलत समझते हैं तो यह मेरी नहीं उन की समस्या है, उन का दुःख है ;

    मैं अपनी नींद नहीं खराब करूँगा, यदि वे मुझे गलत समझ रहे हैं..

    बुरे वक्त में किसी से कोई आस मत रखिये.._ सभी एक से एक बहाने बना कर निकलने की कोशिश में रहेंगे…

    _ आपकी मदद करने के लिए आप स्वयं पर्याप्त हैं…केवल रब से जुड़े रहें, _ सब अच्छा होगा…!!!!

    मैं इस सच को स्वीकार कर चुका हूँ, कि मैं अकेला हूँ, मेरे साथ कोई नहीं है ;

    इन सालों में मैंने बहुत कुछ देख लिया है, और बहुत कुछ सीख लिया है ;

    अगर आप कुछ हैं तो ही आप के अपने भी आप के साथ आएंगे, आप के काम आएंगे, वरना कोई नहीं ;

    कमजोरों का साथ कोई नहीं देता है, भले ही वह अपने ही क्यों ना हों, सगे ही क्यों ना हो ;

    जब साथ देने की बात आती है तो वह कमियां गिनाने लग जाते हैं ;

    कमियां मुझ में थीं, इस कारण आप ने मेरा साथ नहीं दिया, कमियों के बाद भी मेरा साथ देते, तभी तो अपने होते ;

    लोगों का साथ दिया दुनिया का साथ दिया, लेकिन मेरा साथ आप ने कभी नहीं दिया ;

    मैं इस बात को स्वीकार कर चुका हूं, कि मैं अकेला हूं, मेरा कोई नहीं है ;

    यह बात अपने आप से पूछो, कि दिखावा करने के लिए आप ने बाहर बहुत कुछ दान दिया ;

    लेकिन अपने घर में जिनको जरुरत थी, लेकिन आप ने उनको नहीं दिया ;

    मैं इस सच को स्वीकार कर चुका हूँ, कि मैं अकेला हूँ, मेरे साथ कोई नहीं है ;

    ये जो अपने होने की आड़ में लोग हमारी जिंदगी में दखल देते हैं,_ इनके जीवन को

    जरा गौर से देखना _ ये वही लोग हैं जो खुद बहुत ग्लानि में जी रहे होते हैं _

    _ ये स्वयं के ही बहुत बड़े विरोधी हैं_ वो तुम्हारा समर्थन क्या करेंगे_

    खैर मरने से पहले जग जाओ _ दोनों बाहें फैला के समेट लो अपनी जिन्दगी को_

    _ बाद में वो भी खाक तुम भी खाक..

    ‘नक़ाब का सही मतलब, रिश्तेदारो से ही बेनकाब होते हैं, _ कहने को अपने होते हैं, पर जानें कब गैरों में शामिल होते हैं ,_ मीठी छुरी से क़त्ल कर के झुठे आंसू बहाने में माहिर.. ये दो चेहरे रख, _ उसे बखूबी निभाने वाले ये _ बेवफाई का सही वक्त, चुनने का हुनर कोई इनसे सीखे _ ‘ घर होते हुए, बेघर बनाना कोई इनसे सीखे ‘

    ” जो रिश्तेदार और लोग आप की सबसे बड़ी खुशखबरी में भी खुश न हुए हों, _

    _ ऐसे रिश्तेदारों और लोगों को आगे से कोई ख़ुशख़बरी मत देना “

    किसी का खास होना और किसी को अपना खास मानना, ये दो भ्रम बेहद खतरनाक है_ याद रखना आपका अच्छा बुरा सब कुछ आपको अकेले ही भोगना है तो बेहतर है भीड़ में भी अकेला बन के रह लिया जाए !!

    बहुत समझदार होने की सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि हर शख्स आपको अपनी परिस्थिति समझा के बच निकलता है और आप क्या महसूस कर रहे किसी को बता नही पाते !!

    हम सबसे अधिक मूर्ख तब होते है जब हम भावनात्मक होते है !! और इस दुनिया में मूर्खों के लिए कोई सम्मान नहीं !!

    जिस दिन आप लोगों के साथ वही करेंगे जो वो आपके साथ करते हैं उस दिन उनके लिए आप दुनियाँ के सबसे बुरे इंसान बन जाएँगे।

    सामने वाला आपसे जो सुनना चाहता है उसे वही सुनाओ चाहे वो लाख गलत हो आप उसके सबसे खास लोगो मे से एक बन जाओगे ….

    जरुरी नहीं कि सभी आप से खुश हों, मानसिक रूप से मजबूत बनना है तो _

    _ कभी – कभी खुद को लोगों की नजर में अलग और बुरा भी बनाना पड़ता है..

    कितनी ज्यादा गलतफहमी होती हैं ना हमे कि हम किसी के खास है

    पर हकीकत तो कुछ और ही होती हैं
    हमे लगता है हमारा प्यार करना, हमारा नाराज होना ये सब सामने वाले पर असर करता है पर नही
    वो सिर्फ एक दिखावा होता है वो सिर्फ एक झूठ होता है
    जो हमे ये यकीन दिलाने k लिए बोला जाता है कि हम खास है
    उन्हें कोई फर्क नही पड़ता कि आप दर्द में हो या किसी मुसीबत में उन्हें बस अपने मतलब से मतलब होता है
    अगर आप खुश हैं तो वो आपसे प्यार भरी बातें करते हैं
    और अगर आप दर्द में है तो फिर उनके पास खुद उनकी कई समस्या है उनके पास खुद के लिए टाइम नही
    तो आपके दर्द को सुनने का कैसे होगा
    इस दुनिया मे सब अपने मतलब से ही किसी न किसी के करीब जाते हैं
    कोई किसी का खास नही होता
    सब वक्त की बात होती है
    अगर वक्त अच्छा है तो आप लोगों की जान है
    और अगर आपका वक्त खराब है तो आप लोगों के लिए अंजान
    ये ही दुनिया की हकीकत है..
    आप किसी को अपना समझ कर अपने दिल की बात बताते हैं और वो आप से बोर हो जाते हैं, इसलिए वो आप से बचते हैं,

    _ दुनिया मतलबी है ” मेरे यार “

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