सुविचार 2765

निरंतर सजग और जागरूक रहनेवाला व्यक्ति ही

सही मायनों में अपने जीवन का सदुपयोग कर पाता है.

सुविचार 2763

ज्ञान का महत्व तभी हो सकता है, जब आचरण मे हो,

अन्यथा उसका क्या महत्व.

सुविचार 2762

अहम का त्याग करके ही स्वयं को पहचाना जा सकता है.

यह एक गहनतम तथ्य है कि हम जीवन में जितना झुकेंगे उतने ही जीवंत हो सकेंगे.

रिश्तों में माधुर्य तभी रह सकता है जब हम अपने अहम को परे रख कर ग़लती  स्वीकारें और माफी माँगें.

मस्त विचार 2636

कहाँ ये जानते थे कि रस्में उल्फ़त कभी यूँ भी निभानी होगी….

तुम सामने भी होंगे और हमें नज़रे झुकानी होगी…..