मुमकिन नहीं ; हर वक़्त मेहरबान रहे जिंदगी,
_ कुछ लम्हें जीने का तजुर्बा भी सीखाते हैं..
कितने झंझावातों के बीच से गुज़रते हैं हम..
_ ज़िन्दगी जैसे ज़िन्दगी न हो, एक तजुर्बा हो..!!
हर चीज़ समझ कर करने के लिए उम्र का तजुर्बा ज़रूरी है, उम्र की परिपक्वता ज़रूरी है.
_ कच्ची उम्र के कर्म पक्की उम्र में पछतावे बन जाते हैं.!!






