मस्त विचार 3574

मुमकिन नहीं ; हर वक़्त मेहरबान रहे जिंदगी,

_ कुछ लम्हें जीने का तजुर्बा भी सीखाते हैं..

कितने झंझावातों के बीच से गुज़रते हैं हम..

_ ज़िन्दगी जैसे ज़िन्दगी न हो, एक तजुर्बा हो..!!

हर चीज़ समझ कर करने के लिए उम्र का तजुर्बा ज़रूरी है, उम्र की परिपक्वता ज़रूरी है.

_ कच्ची उम्र के कर्म पक्की उम्र में पछतावे बन जाते हैं.!!

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