तमाशा लोग नहीं हम खुद बनते हैं, अपनी जिंदगी का..
_ हर किसी को अपनी कमजोरी बता कर..!!
अपने साथ गलत करने वालों को जरूर याद रखो,
_ लेकिन उन्हें भी याद रखना.. जिन्होंने खड़े होकर तमाशा देखा था.!!
इंसान तो तमाशा देखने आता है, मरहम तो सिर्फ ऊपर वाला ही लगाता है;
_ दुनिया के सामने रोना अपनी बेबसी का सरेआम मज़ाक उड़ाना है.!!
अक्सर आपकी हाँ में हाँ मिलाने वाले लोगों से सावधान रहिये..
_ तुष्टीकरण करने वाला व्यक्ति किसी का सगा नहीं होता.
_ जो आज आपके साथ मिलकर किसी और का तमाशा देख रहा है,
_ कल को किसी और के साथ मिलकर आपका तमाशा देख रहा होगा.
_ किसी पर अंधा विश्वास मत कीजिये.!!
दुनिया तमाशा है, पर मैं उसमें कहाँ खड़ा हूँ – दर्शक, खिलाड़ी या साक्षी ?
_ जब यह साफ होने लगता है, तभी जीवन का असली मोड़ शुरू होता है.
_ अगर दुनिया तमाशा है, तो असली सवाल यही है –
_ मैं दर्शक हूँ, अभिनेता हूँ, या साक्षी हूँ ?
_ अगर हम भीड़ में बह रहे हैं → हम भी उसी तमाशे का हिस्सा हैं.
_ अगर हम देख रहे हैं और समझ रहे हैं → हम दर्शक हैं.
_ और अगर हम भीतर शांत रहकर सबको आते-जाते देख पा रहे हैं → हम साक्षी हैं.
“दुनिया तमाशा है, पर मैं उसमें जितना जागा हुआ हूँ, उतना ही उससे अलग खड़ा हूँ.”




