कल वो चालाक था, इसलिए दुनिया को बदलना चाहता था ;
आज वो बुद्धिमान है, इसलिए अपने आप को बदल रहा है.
चिड़िया को उतना चालाक होना ही पड़ता है,
_ जितना जंगल बचाये रखने और ज़िंदा रहने के लिये जरूरी है.!!
जहाँ लोग चालाकी को काबिलियत समझ लें, वहाँ एक साफ़ दिल इंसान का चुपचाप भीड़ से निकल जाना ही उसकी सबसे बड़ी जीत है.!!
चालाकियों से किसी को कुछ देर तक मोहित किया जा सकता है,
_ पर जहाँ दिल जीतने की बात आती है तो सरल और सहज होना जरुरी है,
_ नही तो मन में उतरने और मन से उतरने में ज्यादा वक्त नही लगता है..!!
चालाक इंसान कितनी भी चालाकी दिखा ले.. हमेशा मुंह की खाता है,
_ क्योंकि रंग बदलने वाले को रंग बदलने वाले ही रास आते हैं..
_ और बाद में होता ये है अपनी ही चाल में ठगा जाता है.
_ इसीलिए रिश्तों में चालाकी मत दिखाओ..
_ अगर दिखाओगे… आजीवन किसी सही इंसान के साथ टिक ही नहीं पाओगे..!!
**चालाकी करी तो नहीं.. चालाकी झेलने की ताकत भी नहीं रही.!!
— कभी-कभी इंसान के भीतर इतनी सच्चाई और सरलता होती है कि वह चालाकी करना तो दूर, उसे सहन करने की शक्ति भी खो देता है.
_ यह कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मा की थकान है—जहाँ दिल अब बस पारदर्शिता और सच्चाई चाहता है.
_ यह एहसास याद दिलाता है कि हमें अपनी जगह वहीं तलाशनी चाहिए, जहाँ चालाकी नहीं, बल्कि सच्चे मन का साथ हो.!!





