अगर कोई आपकी कीमत ना समझे, तो निराश मत होना ;
_ क्योंकि कबाड़ के व्यापारी को, हीरे की परख नहीं होती.
जहाँ हमारी कीमत कम आँकी जाए, वहाँ रुकना अकलमंदी नहीं.!!
गलत महफ़िल में कद्र ढूँढना बेकार है, कबाड़ी के पास जाओगे तो वो हीरे को भी पत्थर ही समझेगा ; अपनी जगह बदलो, कीमत अपने आप बढ़ जाएगी.!!





