विपरीत परिस्थितियों में आपके पास दो ही विकल्प होते हैं,
_ या तो हार मानकर बैठ जाएं या लड़ें और जीत की गुंजाइश पैदा करें.
अगर सच में आगे बढ़ना चाहते हो, तो शब्द कम और सुनने की क्षमता ज्यादा रखो, यही जीत का पहला कदम है.!!
कई बार हमें पहले से पता होता है कि कोई बुरी परिस्थिति सामने आने ही वाली है,
_ फिर भी हम उससे बचने की कोशिश करते हैं, _ लेकिन अक्सर जिस बात से हम छुपते हैं,
_ अगर उसी का निडर होकर सामना कर लिया जाए, तो वही समस्या शायद उतनी बड़ी नहीं रह जाती और उसका हल भी मिल सकता.!





