कायम रखो दिल मेँ धैर्य सुकून, चढ न जाये स्वार्थ का जुनून.
_ ईर्ष्या – द्वेष हैँ मीठे जहर, बचके रहना आठोँ पहर.
_ मन मेँ संजो लो मीठे सपने, अजनबी बन जाएंगे अपने.
_ घृणा की काट दो बेल बना रहेगा तालमेल.
_ सच्ची धारणा और पक्का विश्वास उन्नति के सोपान हैँ.
_ मत दिखाओ झूठी औकात, सब मेँ बाँटो खुशियोँ की सौगात.
_ सबकी उन्नति मेँ अपनी उन्नति, करते रहो इसी का गुणगान..
_ कण-कण मेँ आन्नद अपार, हर दिन रहेगी बसन्त बहार.!!
मैं हर समय उपलब्ध नहीं रहता.. खासकर उनके लिए तो बिल्कुल नहीं, जो मेरा ऊर्जा तो सोख लेते हैं.. पर बदले में न लिहाज़ देते हैं, न अपनापन,
_ दुनिया कहता है कि हम साथ निभाएंगे, मगर सच तो यह है.. मैं बस वहाँ से खामोशी से निकल जाता हूँ.. जहाँ बने रहने की कीमत खुद को खोना हो,
_ जो मुझे करीब से जानते हैं, वे मेरा सॉफ्टनेस और साथ निभाने का हुनर जानते हैं लेकिन जिस पल मेरी इस सॉफ्टनेस को कमज़ोरी समझा गया, मैं अपने कदम पीछे खींच लेता हूँ,
_ मैं कोई महात्मा नहीं हूँ, मुझे गुस्सा भी आता है और चोट भी लगती है, पर मैं अपना हिफाज़त करना जानता हूं,
_ मुझे पता है मैं क्या डिज़र्व करता हूँ और यह भी..कि मेरे अपने कौन हैं, मुझसे खुशामद नहीं होता, मेरे शब्द सीधे हैं और सम्मान मेरा स्वभाव..
_ इसलिए जब किसी का लहजा बदलने लगे और नज़रें बोझ जैसे हो जाएँ,
तो मैं अपने सुकून के लिए एक सेफ दूरी चुन लेता हूँ,
_ मैं छोड़ देता हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ, कहाँ ठहर कर इंतज़ार करना है और कहाँ से मुड़कर दोबारा नहीं देखना..!!
– Tanveer






