मस्त विचार 4182

जब लड़ाई आपकी तूफानों से हो..

_ तब बेवजह शोर मचाने वाली लहरों पर ध्यान नहीं दिया करते…

कई बार ऐसा होता है कि कल हम जिस बात पर गर्व करते थे, आज उस बात पर शर्मिन्दा होते हैं.

_ बात वही रहती है, हम भी वही रहते हैं, बस हमारे भीतर के भाव बदल जाते हैं.
_ बाहर सब कुछ शान्त होने पर भी “भीतर का शोर इसी को कहते हैं क्या ?”

मस्त विचार 4179

” कोयले की खदान से कोरा कोयला ही नहीं निकलता,

जौहरी की आंख हो तो, कोहिनूर हाथ लग जाता है,”

मस्त विचार 4177

” परखना सीखो, परखना, आ गया याने, – जीवन जीना आ गया,”
और हां..
रद्दी तक तोली जाती है तराजू में बिकने से पहले,
_ तुम्हे कोई परख रहा है तो इसमें बुरा ही क्या है.!!
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