मस्त विचार 4219
हल्की हल्की सी हंसी, साफ इशारा भी नहीं,
_ जान भी ले गए और जान से मारा भी नहीं.!!
दूसरों पर हँसना आसान है, लेकिन वही हँसी अगर खुद पर आ जाए तो चुभती है..
_ इसलिए सोचकर मुस्कुराइए.!!
_ इसलिए सोचकर मुस्कुराइए.!!
_ जान भी ले गए और जान से मारा भी नहीं.!!
तकदीर जब तमाचा मारती है, तो वो मुँह पर नहीं सीधा रूह पर लगता है…
रोज ये बात, भूल जाता हूँ.
वरना जहाँ बैठते थे रौनक ला दिया करते थे.
हाय ! उन किरदारों पर क्या गुज़री होगी.
तुम्हारे बदले में किसको याद करें..