मस्त विचार 3989
“ख्वाहिशों के दाम बेशक़ ऊँचे हो सकते हैं”
_ “मगर खुशियाँ हर्गिज़ मँहगी नहीं होतीं”
_ “मगर खुशियाँ हर्गिज़ मँहगी नहीं होतीं”
_ मैंने जब भी पाया तुममे बस सुकून पाया है..
_ गम ये है जिसको वक़्त दिया उसने ही साथ न दिया..
_उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
_ “और दस्तूर देखिए जितने मिले, गिरगिट ही मिले !!
_ कुछ रंग बदलते गए तो कुछ रंग भरते गए.!!