मस्त विचार 4117
मेरी तबाहीयो में तेरा ही हाथ है,
और मैं सब से कह रहा हूं मुकद्दर खराब है..
और मैं सब से कह रहा हूं मुकद्दर खराब है..
उसने मेरी जिंदगी तमाम कर दी…
बिछड़कर फिर ज़िंदा कैसे रह गए.
_ रूह तो उत्तरी थी जमीं पे, मंज़िल का पता लेकर..!!
_ क्योंकि झूठी उड़ान अंत में गिरावट ही देती है.
मेरा होना तेरे होने की निशानी होगा !!
_ पर हकीकत में जरुरी किसी के लिए नहीं होते..
_ बगैर जरुरत के भी साथ कौन हैं ‘असल सवाल तो यह है’