मस्त विचार 3941
तेरी खैरियत का ही जिक्र रहता है दुआ में,
_ मसला मोहब्बत का नहीं, फ़िक्र का है यार…!
_ मसला मोहब्बत का नहीं, फ़िक्र का है यार…!
_ कई लोग तो एक कमरे में भी अलग अलग रहते हैं !!
_ बजाय इसके कि हम छूटे हुए पे इल्ज़ाम लगाकर, बुरा महसूस करवाकर जाएं..!!
_ मैं तो आज भी हरपल तुझे याद करता हूँ !!
_ कल जो #रंग थे, आज #दाग हो गये..
_ बस चलता रहता हूँ…अपनी राह…!
_ जिस पर पता ना लिखा हो तो कहीं नहीं पहुँचता..!!