मस्त विचार 3892

झोंका बन कर तेरे पास से गुजर जाऊँगा,

काफ़िर हूँ मैं… कोई दीवाना नही जो लौट के फिर आऊँगा.

मस्त विचार 3891

मैंने छोटी- छोटी बातों पर रोना क्या छोड़ दिया,

_ लोग समझने लगे मुझे तकलीफ नहीं होती..

हर इंसान को किसी दूसरे इंसान की तलाश रहती है कि _कोई उसे भी सुनने वाला हो, _ कोई उसे भी समझने वाला हो _ या फिर वो अपनी जिंदगी के पल, खुशी, गम किसी से बाटे !!

कहीं न कहीं सारे लोग उलझे हुए हैं, या फिर किसी का दिल टूटा है, किसी के साथ कुछ हो गया _ जिससे परेशान है, वगैरह -वगैरह..!!

_ और उनके पास कोई सुनने या समझने वाला भी नहीं होता..!!

मस्त विचार 3889

जिनकी वफा पर नाज़ था, हमने उनके हमराज बदलते देखे हैं ;

_ और हालात बदलते ही लोगों के अंदाज बदलते देखे हैं.

मनुष्य के जीवन में कल क्या होने वाला है कोई नहीं जानता ;

_ जैसा होना होता है, वैसे हालात बन जाते हैं..!!

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