मस्त विचार 3835
नासमझ ही रहते तो ठीक था, _ उलझने बढ़ गयी हैं जबसे समझदार हुए.
_ हमारी ही खताओं ने ज़रूर, इन्हें बुलाया होगा.
_ रोशनी की तरफ करके_देख लेते असली है या नकली..
_ मै वो दरख़्त हूं जिसकी रोज एक शाख़ टूट रही है…
_ तुझे एक पल नही लगा किसी ग़ैर को अपना बनाते.!!
_जब होगी फुरसत तो देखेंगे, किस किस को जीना है..