मस्त विचार 3896
रात तो पाबंद है, वक़्त पर लौट आती है ;
_ नींद ही आवारा हो गई है आजकल..!!
_ नींद ही आवारा हो गई है आजकल..!!
_ कभी सुकूँ देते हैं तो कभी जला देते हैं..
..और दूसरी तरफ कहती है वक्त किसी का इंतजार नहीं करता….
_ मैं नये सिरे से जीना सिखना चाहता हूं.
काफ़िर हूँ मैं… कोई दीवाना नही जो लौट के फिर आऊँगा.
_ लोग समझने लगे मुझे तकलीफ नहीं होती..
कहीं न कहीं सारे लोग उलझे हुए हैं, या फिर किसी का दिल टूटा है, किसी के साथ कुछ हो गया _ जिससे परेशान है, वगैरह -वगैरह..!!
_ और उनके पास कोई सुनने या समझने वाला भी नहीं होता..!!