मस्त विचार 3874

यहां सभी को मतलब है, ” बेमतलब “कुछ नहीं है,

_यहां मैं भी मतलबी हूं, और तू भी मतलबी है..

लोग अपने बुरे बर्ताव के लिए आपसे कभी माफ़ी नहीं मांगेंगे,

लेकिन उनके बुरे बर्ताव के बाद आप में आए बदलाव के लिए आप को दोष जरूर देंगे.

लोग आपसे वैसा ही बर्ताव करते हैं.. जैसा वो आपके लिए महसूस करते है..!!
हां..! कर लिया हूं दरकिनार ..खुद को मतलबी लोगों से..

_ जो सिर्फ अपने मतलब खत्म होने तक साथ रहते हैं ..फिर बर्ताव ऐसा करते हैं कि ..जैसे पहचानते ही ना हो.
_ मुझे चाहिए भी नहीं ..अपने जीवन में ऐसे लोगों की भीड़ !!
_ मैं अकेला ही ठीक हूं..!!
मतलबी भीड़ का हिस्सा बनने से बेहतर है खुद को तराशना ; अपनी काबिलियत इतनी बढ़ाओ कि किसी की मेहरबानी न लेनी पड़े ; फिर रिश्ते मजबूरी के नहीं, सिर्फ प्रेम के होंगे.!!

मस्त विचार 3871

अच्छा नहीं लगता बार बार किसी को अपनी याद दिलाना,

_अगर अहमियत होगी तो लोग खुद याद कर लेंगे..

मस्त विचार 3870

“हमले हमेशा कमजोरों पर ही किये जाते हैं,

ताकतवर से सभी संधि चाहते हैं, यही दुनिया का रिवाज़ है “

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