मस्त विचार 3761
परख न सकोगे ऐसी शख्सियत है मेरी,
_ मैं उन्हीं के लिए हूं, जो जाने कदर मेरी..
*ना होने का एहसास सबको है ;
_मौजूदगी की कदर किसी को *नही*
_ मैं उन्हीं के लिए हूं, जो जाने कदर मेरी..
_मौजूदगी की कदर किसी को *नही*
हम इतने भी बुरे नहीं हैं, जितना तुमने सोच रखा है.
आपको ही मजबूत बनना पड़ेगा.
मगर मेरा साफ दिल नहीं नज़र आया.
_ जिसे अपना लिया, उसे कभी परखा नही.
_कहीं बुरा बना दिए जाते हैं, कहीं बुरे साबित कर दिए जाते हैं.!!