मस्त विचार 3203
मत रोना किसी के छोड़ जाने से, _ वक़्त ऐसा ला देना कि
वो खुद मिलने आयें _ नए नए बहाने से.
वो खुद मिलने आयें _ नए नए बहाने से.
छूट जाती थीं, _ अब चीजें बटोरने में खुशियाँ छूट जाती हैं.!!
_ हमें सोचते रहने की लत जो लगी हुई है..
_ हम खुल कर विलाप भी नहीं कर पाते हैं…
_ जो साथ है, उसके साथ सुकून से जी लिया जाए.
*जो निभाता है उसी को परेशान करती है.!!!*
Responsibilities also take a lot of test..
* He troubles the one who plays.
हम तो वो सच हैं जो हमेशा सबको कड़वे लगते हैं.
We are neither sweet nor have the habit of becoming sweet,
We are the truth that always seems bitter to everyone.