मस्त विचार 3202

हथेली तब भी छोटी थी, हथेली अब भी छोटी है, _ पहले खुशियाँ बटोरने में चीजें,

छूट जाती थीं, _ अब चीजें बटोरने में खुशियाँ छूट जाती हैं.!!

मस्त विचार 3201

हम जैसे लोग ही दोहरा अज़ाब { पीड़ा } झेलते हैं,

_ हमें सोचते रहने की लत जो लगी हुई है..

पीड़ा का स्रोत अगर कोई अपना हो तो..

_ हम खुल कर विलाप भी नहीं कर पाते हैं…

मस्त विचार 3200

जो धोखा दे गया, उसकी यादों में हज़ार गुना मरने से अच्छा है _

_ जो साथ है, उसके साथ सुकून से जी लिया जाए.

मस्त विचार 3199

*जिम्मेदारियां भी खुब इम्तिहान लेती है..*

*जो निभाता है उसी को परेशान करती है.!!!*

Responsibilities also take a lot of test..

* He troubles the one who plays.

मस्त विचार 3198

न हम मीठे हैं और न ही मीठा बनने की आदत है,

हम तो वो सच हैं जो हमेशा सबको कड़वे लगते हैं.

We are neither sweet nor have the habit of becoming sweet,

We are the truth that always seems bitter to everyone.

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