मस्त विचार 3171
लोग कहते हैं समझो, तो खामोशियाँ भी बोलती हैं,
मैं अरसे से ख़ामोश हूँ, वो बरसों से बेख़बर है..
मैं अरसे से ख़ामोश हूँ, वो बरसों से बेख़बर है..
तुम आओ तो सही, हम शाम को सवेरा कह देंगे..
कभी आप भी सामने वाले को समझने की कोशिश कीजिए !
उन्हें पूरा करने के लिए जी जान नहीं लगाते…!!!