मस्त विचार 3105
परिंदे शुक्रगुजार हैं, पतझड़ के भी दोस्तों..!
तिनके कहां से लाते, अगर सदा, बहार रहती..!!
तिनके कहां से लाते, अगर सदा, बहार रहती..!!
_ उससे ज्यादा आपकी जिन्दगी निकल रही है..
_ न किसी का इंतजार, न किसी की खोज..
क्योंकि शिकायतें तो उन्हें भी है जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है !!
जो सतह पर रहा, कोरा ही रहा
अनुभव कहां हासिल कर पाता है.
हम शिकायत कर सकते हैं कि गुलाब की झाड़ियों में कांटें हैं…
या खुश हो सकते हैं कि काँटों की झाड़ियों में गुलाब हैं…!!!