मस्त विचार 3106
कितना समेट कर रखता हूँ जिन्दगी को,
फिर भी कुछ ना कुछ बिखर ही जाता है..!!
फिर भी कुछ ना कुछ बिखर ही जाता है..!!
तिनके कहां से लाते, अगर सदा, बहार रहती..!!
_ उससे ज्यादा आपकी जिन्दगी निकल रही है..
_ न किसी का इंतजार, न किसी की खोज..
क्योंकि शिकायतें तो उन्हें भी है जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है !!
जो सतह पर रहा, कोरा ही रहा
अनुभव कहां हासिल कर पाता है.