मस्त विचार 3034
नसीब की बारिश कुछ इस तरह से होती रही मुझ पर
ख्वाइशें सूखती रही और पलकें भीगती रही.
ख्वाइशें सूखती रही और पलकें भीगती रही.
खुद को बस खुद समझता हूं.
_ क्या आपने कभी महसूस किया है कि हम कभी कभी बेफिजूल के दुखी रहते हैं ?
लेकिन लोग वैसे भी नही होते जैसे नजर आते है.
सब से ज्यादा खुद का ही दिल दुखाया है दूसरों को खुश करने में.
कभी तो छोड़ दीजिये कश्तियों को लहरों के सहारे..