मस्त विचार 2975
“बेकार है करना ख़ुशामद पराये रास्तों की…,
काम अपने पाँव ही आते हैं सफ़र में।”
काम अपने पाँव ही आते हैं सफ़र में।”
इन्हे भी सुकून की तलाश है…
यह पल भी जाने ही वाला है.
महफ़िलों में जब तेरी बात उठती है.
दु:ख् बहोत हैं फिर भी सब हंसते रहते हैँ.
मंजिलों की फितरत है खुद चलकर नहीं आती.