मस्त विचार 2963
कितने महंगे हो चले यह फुर्सत के लम्हे,
मिलता ही नहीं वक़्त अपनों को अपनों के लिए.
मिलता ही नहीं वक़्त अपनों को अपनों के लिए.
जब से शहर में शुरू कमाना हुआ…
सब को आज़माते हो या मुझसे ही दुश्मनी है ….
_ चाहे आज़मा कर देख लीजिए..!!
कोई आज, तो कोई कल अलविदा बोल जाता है.
जिसे तुम पर यकीन है उसे जरुरत नहीं ; और जिसे तुम पर यकीन नहीं वो मानेगा नहीं
उन्हें हर समस्या बड़ी लगती है..