मस्त विचार 2880
पहचान लो तुम्हारा गुनहगार हूँ मैं…
इस तरह चांदनी में जला हूँ कि अब अंगार हूँ मैं…
इस तरह चांदनी में जला हूँ कि अब अंगार हूँ मैं…
संगीत भी मैं तेरा हूँ तेरे लिये हीे बजाता हूँ,
खूबियाँ हैं तेरी मुझमें तुझी पे लुटाता हूँ.
दोनो ही नकली हो गये आंसू और मुस्कान.
उसके पास पंख नहीं है “
मुझे लोगों की तरह बदल जाना नहीं आता……!
कैसे जीना है इस दुनिया में यारो, यह समझ मुझे ठोकर खाकर आयी है.