मस्त विचार 2881
झुके थे तेरे आगे…बिके नहीं थे,
जो इतना गुमान कर गया.
जो इतना गुमान कर गया.
इस तरह चांदनी में जला हूँ कि अब अंगार हूँ मैं…
संगीत भी मैं तेरा हूँ तेरे लिये हीे बजाता हूँ,
खूबियाँ हैं तेरी मुझमें तुझी पे लुटाता हूँ.
दोनो ही नकली हो गये आंसू और मुस्कान.
उसके पास पंख नहीं है “
मुझे लोगों की तरह बदल जाना नहीं आता……!