मस्त विचार 2774
खुद को लिखते हुए हर बार लिखा है तुमको…
इससे ज्यादा कोई जिंदगी को क्या लिखता.
इससे ज्यादा कोई जिंदगी को क्या लिखता.
तेरा साथ पाकर मंजिल की ख्वाइश ही नहीं रहती.
*तुम तो …ख्वाहिश बन बैठे, ……वो भी बेइंतहा……*
किसी को प्यासा जो देखूँ, तो ख़ुद पानी हों जाऊँ.
ज़िन्दगी है, उसे बहने दो…..!!
आज उसी ने सीखा दिया हद में रहना…!!