मस्त विचार 2734
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने में है,
वो किसी की परछाई बनने में नहीं !!
वो किसी की परछाई बनने में नहीं !!
जब सबको ही मेरे रब ने बनाया.
देख कर दिलों में भेद की दीवार,
कभी मैं रोया कभी मुस्कुराया.
हर वक़्त वाह वाह की ख्वाहिश नहीं होती.
मैंने मुस्करा के कहा….अपनी औकात में..!!
मैं उठा लाया हूँ झाड़कर खुद को..!!
आज तेरा है, कल मेरा भी आएगा.