मस्त विचार 2991
मैंने जिंदगी का हर दर्द चखा है,
यूं ही हम लाजवाब नहीं हुए साहिब !
यूं ही हम लाजवाब नहीं हुए साहिब !
ये मत सोचिए – ? घर किसका रोशन हुआ.
मैं भीड़ नहीं हूँ दुनिया की, मेरे अंदर ही एक जमाना है…!
_ किरदार जिनके खुद के मरम्मत मांग रहे हैं.
एक पन्ना जिंदगी का मैं, रोज मोड़ देता हूँ !!
_ पर सज़ा वहां मिली जहां बेकसूर थे !!