मस्त विचार 2722
ज़िन्दगी एक प्रतिध्वनि है ; सब कुछ वापस आ जाता है.
मर्जी आपकी ; आप वापस क्या पाना चाहते हैं.
मर्जी आपकी ; आप वापस क्या पाना चाहते हैं.
मैं तेरा रोज का ग्राहक हूँ….
लोग अपने किरदार में फ़रिश्ते हों जैसे.
फिक्र तो वो करें, जो बोलते कुछ हैं, करते कुछ हैं,
दिखते कुछ हैं और होते कुछ हैं.
बेहतरीन दिनों के लिए बुरे दिनों से लड़ना पड़ता है.
सुना है कम बोलने से बहुत मसले सुलझ जाते हैं.