मस्त विचार 4470
मौज लो और रोज लो, ना मिले तो खोज लो,,,
जिंदगी को अपनों से जोड़ लो, है चार दिन की ये सोच लो..
जिंदगी को अपनों से जोड़ लो, है चार दिन की ये सोच लो..
*चादर बड़ी करें या,* *ख़्वाहिशे दफ़न करें !*
पहले मुड़ कर देखते थे..,अब देख कर मुड़ जाते हैं ।
इसीलिए बाकी नहीं, अब कोई भी आस.
जो घड़ी जी लेंगे वो ही रह जानी है.
सच ही कहूंगा, क्यूं इतना घबरा रहे हो..