मस्त विचार 2735
कुछ तो चाहत होगी बारिश की बूंदों को भी…वरना…
कौन छूता है इस जमीन को, आसमान से टूट कर…
कौन छूता है इस जमीन को, आसमान से टूट कर…
वो किसी की परछाई बनने में नहीं !!
जब सबको ही मेरे रब ने बनाया.
देख कर दिलों में भेद की दीवार,
कभी मैं रोया कभी मुस्कुराया.
हर वक़्त वाह वाह की ख्वाहिश नहीं होती.
मैंने मुस्करा के कहा….अपनी औकात में..!!
मैं उठा लाया हूँ झाड़कर खुद को..!!