मस्त विचार 2337
वो किताबों में दर्ज था ही नहीं,
सिखाया जो सबक जिन्दगी ने.
सिखाया जो सबक जिन्दगी ने.
जैसे बिना स्याही का फाउण्टेन पेन.
कि तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे वज़ूद को तरसेगी..
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते..
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
_ इसका अर्थ है कि आपने कमियों के परे देखना शुरू कर दिया है..