मस्त विचार 2177
हंसने की इच्छा ना हो…तो भी हसना पड़ता है…
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कोई जब पूछे कैसे हो…?? तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…
कोई जब पूछे कैसे हो…?? तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ.
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
उसके साथ जिया जाता है,
उनके सुधार से परिस्थिति और बिगड़ जाती है.
‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और
‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.