मस्त विचार 2177

हंसने की इच्छा ना हो…तो भी हसना पड़ता है… .

कोई जब पूछे कैसे हो…?? तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…

मस्त विचार 2176

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,

आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ

या काम करने के लिए जीता हूँ.

मस्त विचार 2175

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!

जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….

अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……

मस्त विचार 2174

आज ना जाने क्यों आँख में आँसू आ गए,

पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,

मिलने कि तमन्ना थी आपसे,

लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,

मस्त विचार 2173

कुछ गलतियां सुधारी नहीं जाती

उसके साथ जिया जाता है,

उनके सुधार से परिस्थिति और बिगड़ जाती है.

मस्त विचार 2172

‘इंसान’ की ‘फ़ितरत’ भी ‘अज़ीब’ है –

‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और

‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.

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