मस्त विचार 2058
मैंने तूफ़ान में उस कश्ती को पतवार मारना बंद कर दिया …
जिस पर मैं सवार था और कुछ पलो में ही
मैं ये देख कर हैरान रह गया …
कि कश्ती खुद ही पार लगना जानती थी…
जिस पर मैं सवार था और कुछ पलो में ही
मैं ये देख कर हैरान रह गया …
कि कश्ती खुद ही पार लगना जानती थी…
बस मैंने गलतियां आपसे ज्यादा की हैं.
वजन बातों का नहीं, जेब का होता है,
जो जेब हो भारी,तो रिश्ता गहरा होता है,
खाली जेब वाला, कोड़ियों में बिकता है.
कुछ इस तरह हमने जिंदगी संभाली है.
नहीं चाह इस दुनिया की, बस तुझ संग प्रीत लगाते हैं.
बस गए हो यू इस तरह इन नयनों में
जिधर देखो बस तुम ही तुम नज़र आते हो.
_ अक्सर इधर उधर की बातें दिल में बैठा लेता है…