मस्त विचार 1669
मुझे कुछ नहीं कहना……..बस इतनी गुज़ारिश है…
मुझे तुम उतने ही मिल जाओ जितने याद आते हो…
मुझे तुम उतने ही मिल जाओ जितने याद आते हो…
मिट्टी का बना हूँ, गुरुर जँचता नहीं मुझ पर ….!!
_ तो मक्खन लगाने वाले खुद ब खुद आ जायेंगे.
ये वो पूंजी है जिसे कमाना पड़ता है और ये पूंजी वही कमा पाता है,
जो दूसरों पर भी यही खर्च करता है.
….आप अपनी ही मिसाल ले लो…
उसके द्वार पर खड़ा सुख बाहर से ही लौट जाता है.