मस्त विचार 1316
हम भी जरूर काबे को चलते, मगर ऐ यार,
किस्मत से बुतकदे में ही दीदार हो गया.
किस्मत से बुतकदे में ही दीदार हो गया.
क्योंकि वे हमारी प्राथमिकता की सूची में निचले पायदान पर होते हैं.
_क्योंकि अधिकतर लोगों की बातें मनोबल गिराने वाली होती हैं.
एक रोज बढ़ के मंजिल उसको गले से लगाए.
जीनी है जिंदगी को तो आगे देखो.