मस्त विचार 1504

तू मत बना किनारों को, ये किनारे टूट जाते हैं.

तू मत बना सहारों को, ये सहारे छूट जाते हैं.

मुसीबत में कहां कोई काम आता है,

ये आदत है जहां वालों की, ये अक्सर रूठ जाते हैं.

मस्त विचार 1503

ये कैसा जादू समझ में न आया.

तूने ही मुझको जीना सीखाया.

ऎसा ज्ञान तूने दिया है.

बदल दिया जीवन मेरा सारा.

कैसे उतारूँ ये कर्जा तुम्हारा.

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