मस्त विचार 1353
जिंदगी ने दिया है जब इतना बेशुमार यहाँ, तो फिर जो नहीं मिला उसका हिसाब क्या रखें,
दोस्तों ने दिया है इतना प्यार यहाँ, तो दुश्मनी की बातों का हिसाब क्या रखें,
दिन हैं उजालों से इतने भरपूर यहाँ, तो रात के अँधेरों का हिसाब क्या रखे,
खुशी के दो पल काफी हैं खिलने के लिये, तो फिर उदासियों का हिसाब क्या रखें,
हसीन यादों के मंजर इतने हैं जिन्दगानी में, तो चंद दुख की बातों का हिसाब क्या रखें,
मिले हैं फूल यहाँ इतने किन्हीं अपनों से, फिर काँटों की चुभन का हिसाब क्या रखें,
चाँद की चाँदनी जब इतनी दिलकश है, तो उसमें भी दाग है, ये हिसाब क्या रखें,
जब खयालों से ही पलक भर जाती हो दिल में. तो फिर मिलने, ना मिलने का हिसाब क्या रखें,
कुछ तो जरूर बहुत अच्छा है सभी में यारों, फिर जरा सी, बुराइयों का हिसाब क्या रखें.
मस्त विचार 1352
भरोसा करके लूट जाना बेहतर है.
मस्त विचार 1351
बजाय किसी जरूरतमंद के लिए खर्च करने के.
मस्त विचार 1350
मस्त विचार 1349
किस मंजिल तक लेकर जाए
हँसी खुशी की सौगातें दे
या जीभरकर हमें रुलाए
अतः नहीं अच्छा है बिल्कुल
जग में नफरत के विष बोना
नहीं चाहिए कि हम कलुषित
रखें मन का कोई कोना
रहना है तो रहो प्रेम से
नहीं किसी से नफरत करना
करना है यदि प्यार किसी से
समझो अपने से ही करना!





