मस्त विचार 1195

ये सोच है हम इंसानों की, कि एक अकेला क्या कर सकता है

पर देख जरा उस सूरज को, वो अकेला ही तो चमकता है.

मस्त विचार 1194

जो चलते हैं मंजिल की ओर, वो शिकवे नहीं किया करते.

जो करते हैं शिकवे गिले, वो मंजिल पर पहुंचा नहीं करते.

मस्त विचार 1193

मैं लोगों से मुलाक़ातों के.,…..लम्हे याद रखता हूँ.

मैं बातें भूल भी जाऊँ.,…..तो लहजे याद रखता हूँ.

सा-री-महफ़िल निगाहें मुझ पे.,…..जिन लोगों की पड़ती हैं.,

…निगाहों के हवाले से वो चेहरे हमेशा याद रखता हूँ

ज़रा सा हट के चलता हूँ .,……..ज़माने की रवायात से

के जिन पे बोझ मैं डालूं ……”वो कंधे याद रखता हूँ “

मस्त विचार 1192

किसी से नाराज हो जाओ तो बस इतने

फासले पर ही होना जो –

एक कदम…

एक स्पर्श….

एक मुस्कुराहट…

एक आंसू…..

एक शब्द से सब कुछ

भूल कर वापस सम्बन्ध सोहाद्र-पूर्ण हो जाए।

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