मस्त विचार 1197
चला जाता हूँ इसी धुन में, कि कुछ करने कि आस है.
रास्ता है गर सही, तो मंजिल भी पास है.
रास्ता है गर सही, तो मंजिल भी पास है.
जीया वही, जिसने जीवन जीना जाना.
पर देख जरा उस सूरज को, वो अकेला ही तो चमकता है.
जो करते हैं शिकवे गिले, वो मंजिल पर पहुंचा नहीं करते.
मैं बातें भूल भी जाऊँ.,…..तो लहजे याद रखता हूँ.
सा-री-महफ़िल निगाहें मुझ पे.,…..जिन लोगों की पड़ती हैं.,
…निगाहों के हवाले से वो चेहरे हमेशा याद रखता हूँ
ज़रा सा हट के चलता हूँ .,……..ज़माने की रवायात से
के जिन पे बोझ मैं डालूं ……”वो कंधे याद रखता हूँ “
फासले पर ही होना जो –
एक कदम…
एक स्पर्श….
एक मुस्कुराहट…
एक आंसू…..
एक शब्द से सब कुछ
भूल कर वापस सम्बन्ध सोहाद्र-पूर्ण हो जाए।