मस्त विचार – मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक सच्ची सी जिंदगी – 1137

कभी नीम सी जिंदगी, कभी नमक सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक शहद सी जिंदगी.

कभी पत्थर सी जिंदगी, कभी काँटों सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर,एक मुलायम सी जिंदगी.

कभी तपती सी जिंदगी, कभी गीली सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर,एक सलोनी सी जिंदगी.

कभी भागती सी जिंदगी, कभी रूकती सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक सुकून सी जिंदगी.

कभी सफ़ेद सी जिंदगी, कभी काली सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक रंगीन सी जिंदगी.

कभी पराई सी जिंदगी, कभी बेगानी सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर,एक अपनी सी जिंदगी.

कभी दिखावे सी जिंदगी, कभी झूठी सी जिंदगी.

मैं ढूंढता रहा उम्र भर, एक सच्ची सी जिंदगी.

मस्त विचार 1136

इन्सान सब कुछ कॉपी कर सकता है..!

लेकिन किस्मत और नसीब नही..!

“श्रेय मिले न मिले,

अपना श्रेष्ठ देना कभी बंद न करें.

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