मस्त विचार 1181

जिन्दगी का सफ़र, है ये कैसा सफ़र

कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं

है ये कैसी डगर, चलते हैं सब मगर

कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं. 

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