मस्त विचार 1104

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए,

फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है, कल खाई होगी,

फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप, तुम भी चुप,

इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ?

बात छोटी को लगा लोगे दिल से,

तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़ कर,

सोचो फिर हाथ बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी, न तुम राजी,

फिर माफ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,

तो फिर धैर्य बंधाएगा कौन ?

एक अहम मेरे, एक तेरे भीतर भी,

इस अहम को फिर हराएगा कौन ?

जिंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?

फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें,

तो कल इस बात पर फिर पछताएगा कौन ?

मस्त विचार 1102

खुशनसीब हैं वो जो दिल में किसी को जगह देते हैं.

बैचेनी सहकर भी दूसरों को हँसना सीखा देते हैं.

दुनिया वाले लाख चाहे बदनाम उन्हें कर लें,

मगर वो सादगी से हर दिल में जगह बना लेते हैं.

मस्त विचार 1101

अजीब है यह बात कि दूसरे की मदद करने का समय किसी के पास नहीं है लेकिन दूसरे के कार्यों में अड़ंगे डालने का समय सब के पास है.

मस्त विचार 1100

 हर किसी को मैं खुश रख सकूं, वो सलीका मुझे नहीं आता,

जो मैं नहीं हूँ, वो दिखाने का तरीका मुझे नहीं आता……!!

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