मस्त विचार 1127
खुद पर भरोसे का हुनर आखिर सीख ही लिया हमने,
सहारे कितने भी अच्छे और सच्चे हों साथ छोड़ ही जाते हैं.
सहारे कितने भी अच्छे और सच्चे हों साथ छोड़ ही जाते हैं.
तेरी मेहरबानी से जिस सांचे में घुसे उसी में ढल गए.
पर जिंदगी जैसी दिखती है- होती नहीं वैसी
इस हकीकत को शायद भूला दिया था- हमने.
सबसे पहले उसे एक नए और अलग नजरिए से भी सोचें.
अपने आप में खुश रहो
खुशियों का इंतज़ार किसलिए
दूसरों की मुस्कान में खुश रहो
क्यूँ तड़पते हो हर पल किसी के लिए
कभी तो अपने आप में खुश रहो
छोटी सी ज़िन्दगी है हर हाल में खुश रहो.
अक्सर खो जाते हैं…
मुझे शौक है उन्हें जमा करने का.