मस्त विचार 921

हँस कर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का;

एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का;

बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते;

यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का;

जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बिताओ;

रोने का टाइम कहां, सिर्फ: मुस्कुराओ;

चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा;

बस याद रखना “जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”.

मस्त विचार 920

खूबसूरत है वो मुस्कराहट जो किसी गैर के चेहरे पर

मुस्कराहट ला सके….

खूबसूरत वो दिल है जो किसी का दर्द समझ सके…

ख़ूबसूरत वो जज़्बात है जो किसी का अहसास कर सके…

ख़ूबसूरत वो अहसास है जो किसी दर्द की दवा बन सके…

ख़ूबसूरत वो हाथ है जो किसी को मुश्किलों में थाम ले…..

ख़ूबसूरत वो कदम है जो किसी की मदद को बढ़ सके..,,

मस्त विचार 919

लडखडाती शाम को इश्क का सलाम लिख दिया…..

इन आँखों से छलके अश्कों को जाम लिख दिया…..

आज कुछ नहीं था लिखने को मेरे ज़हन में…..

कोरे कागज़ पे मैंने तेरा नाम लिख दिया…..!!

मस्त विचार 917

हम भी कभी मुसकराया करते थे.

उजाले में भी शोर मचाया करते थे.

उसी दीए ने जला दिया हाथों को,

जिस दीए को हम हवा से बचाया करते थे.

मस्त विचार 916

मस्ती में गुनगुनाने वाला मै न था.

चाँद को निहारने वाला मै न था.

तारों को गिनने वाला मै न था.

ये तो तेरे साथ का असर है.

वरना किसी को इतना,

याद करने वाला मै न था.

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