मस्त विचार 853
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
तुम से ये कैसा रिश्ता है………ना मिलते हो ना बिछड़ते हो…
रिवाज़ तो यही है दुनिया का मिल जाना बिछड़ जाना…
क्यों ठहर जाता है हर आता हुआ, जाता हुआ.
तेरे दीवाने में भी क्या आ गयी तेरी अदा.
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा… जहाँ लोग मिलते कम, झांकते ज़्यादा है.!!
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये. “– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“
वजह पूछने का तो मौका ही नही मिला, _