मस्त विचार 772
ज़माना मेरे गिरेबान में झाँकता क्यूँ हैं.
ज़माना मेरे गिरेबान में झाँकता क्यूँ हैं.
ठीक उसी समय उसे करना ही चाहिए, नहीं तो लोगों का विश्वास उठ जाता है.
इसी भ्रम में आज कल घूम रहा इंसान.
ढले हुए सूरज को निकलने में वक्त लगता है !
थोड़ा धीरज रख, थोड़ा और जोर लगाता रह,
किस्मत के जंग लगे दरवाजे को खुलने में वक्त लगता है !
कुछ देर रुकने के बाद फिर से चल पड़ना दोस्त,
हर ठोकर के बाद संभलने में वक्त लगता है !
बिखरेगी फिर वही चमक तेरे वजूद से तू महसूस करना,
टूटे हुए मन को संवरने में थोड़ा वक्त लगता है !
जो तूने कहा कर दिखायेगा रख यकीन,
गरजे जब बादल तो बरसने में वक्त लगता है !
खुशी आ रही है और आएगी ही, इन्तजार कर,
जिद्दी दुख को टलने में थोड़ा सा वक्त तो लगता है.
किसी की फितरत देखनी हो तो उसे आजादी दो.
किसी की नीयत देखनी हो तो उसे कर्ज दो.
किसी के गुण देखने हो तो उस के साथ खाना खाओ.
किसी का सब्र देखना हो तो उसे हिदायत दे कर देख लो.
किसी की अच्छाई देखनी हो तो उस से सलाह ले लो.
_ हकीकत को गले लगा _ उसके साथ मुस्कुराते हुए _ ज़िंदग़ी जी जाए…