मस्त विचार 4301

हजार ग़म मेरी फ़ितरत नहीं बदल सकते.. क्या करू मुझे आदत मुस्कुराने की है..!!
ये ना होता तो कोई दूसरा ग़म होना था..

_ मैं तो वो हूँ.. जिसे हर हाल में बस रोना था..!!

मस्त विचार 4300

प्यास अगर शराब की होती तो, ना आता तेरे मैखाने में,

ये तो तुमारी नज़रो का जाम है, कही मिलता नहीं..।।”

मस्त विचार 4298

गम की अंधेरी रात में दिल को न यू बेकरार कर,

_ सुबह ज़रूर आएगी तो सुबह का इंतज़ार कर..

हर रात बहुत कुछ घटित होता है, रातें पिछले जीवन की पुनरावृत्ति होती हैं,

_ जीवन का हर परिदृश्य हर रात बिल्कुल एक जैसा मन में उभरता है,
_ हर रात हम पीछे जाकर बहुत सी चीजें बदलना चाहते हैं.!!
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