मस्त विचार 4301
हजार ग़म मेरी फ़ितरत नहीं बदल सकते.. क्या करू मुझे आदत मुस्कुराने की है..!!
ये ना होता तो कोई दूसरा ग़म होना था..
_ मैं तो वो हूँ.. जिसे हर हाल में बस रोना था..!!
_ मैं तो वो हूँ.. जिसे हर हाल में बस रोना था..!!
ये तो तुमारी नज़रो का जाम है, कही मिलता नहीं..।।”
ग़िला भी कर सके उससे अब इतना भी हक़ ना रहा।”
_ सुबह ज़रूर आएगी तो सुबह का इंतज़ार कर..
पास अगर हो तो ,,,,,,अहसास कहाँ होता है !!
कुछ तो बाक़ी रह गया है तेरे मेरे दरमिया..