मस्त विचार 4266
” सुलझते सुलझते भी जो उलझ उलझ जाती है,
एक ऐसी पहेली है, जो ज़िंदगी कहाती है,”
एक ऐसी पहेली है, जो ज़िंदगी कहाती है,”
जो बोया है वो निकलना तय है..
मेरे पास तो अब मैं भी नहीं..
जिसे अपनी ऊंचाई पर यकीन नहीं होता है.
_ मगर आज के जमाने में इंसान इच्छाधारी होते है.. मतलब पूरा होते ही अपना रूप बदल लेते है.!!