मस्त विचार 4248

कभी कभी, कितनी बातें कहनी होती है, जब कोई सुनने वाला नहीं होता है…।
यह भी विचार कीजिए कि कोई आपकी बात कब काटता है ?

_ सीधी सी बात है — जब आप उसे बोलने का मौका नहीं देते..
_ बोलने का मौका दीजिए, कोई आपकी बात कभी नहीं काटेगा..
_ अगर कोई आपसे कुछ बोलना चाहे तो उसे बोलने दें, बोलने दें और इतना बोलने दें कि वह थक जाए..
_ जब वह चुप हो जाए तो आप बोलना शुरू कीजिए..
_ आपको हैरानी होगी यह देख कर कि आपकी बात काटना तो दूर, वह आपकी हर बात से सहमत होता जाएगा..
_ ज्यादातर लोगों को शिकायत ही यह होती है कि उनकी किसी ने सुनी नहीं ;
_ आपने सुन ली, सावन का बादल हल्का हो गया..
_ अब वह उमड़-घुमड़ कर नहीं आएगा..
_ आपने उसकी बात नहीं काटी, उसने आपकी..!!

मस्त विचार 4246

परिंदों को मंजिल मिलेगी यक़ीनन, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं.
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं, ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं

मस्त विचार 4245

क्या बेचकर हम खरीदें ” फुर्सत ऐ ” ज़िन्दगी…

_ सब कुछ तो ” गिरवी ” पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में..!!

‘जिम्मेदारी’ वो पिंजरा है, जहाँ इंसान आजाद होकर भी कैद है..!!

मस्त विचार 4244

इस भाग-दौड़ कि दुनियां में समझ नही आता की..

_ थकने के बाद शाम होती है या शाम होने के वजह से थकान..

“कभी-कभी बस कोई हमारी थकान समझ ले..- यही सबसे बड़ी राहत होती है.”
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